Chapter 15. हमारा पर्यावरण Class 10 Science CBSE notes in hindi परितंत्र - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 10 English Medium Science All Chapters:
15. हमारा पर्यावरण
2. परितंत्र
अध्याय 15. हमारा पर्यावरण
जैव निम्नीकरनीय पदार्थों के गुण :
(i) ये पदार्थ सक्रीय (active) होते हैं |
(ii) इनका जैव अपघटन होता है |
(iii) ये बहुत कम ही समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं |
(iv) ये पर्यावरण को अधिक हानि नहीं पहुँचाते हैं |
जैव अनिम्नीकरनीय पदार्थों के गुण :
(i) ये पदार्थ अक्रिय (Inert) होते हैं |
(ii) इनका जैव अपघटन नहीं होता है |
(iii) ये लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं |
(iv) ये पर्यावरण के अन्य पदार्थों को हानि पहुँचाते हैं |
परितंत्र : किसी भी क्षेत्र के जैव तथा अजैव घटक मिलकर संयुक्त रूप से एक तंत्र का निर्माण करते हैं जिन्हें परितंत्र कहते है |
जैसे – बगीचा, तालाब, झील, खेत, नदी आदि |
उदाहरण के लिए बगीचा में हमें विभिन्न जैव घटक जैसे – घास, वृक्ष, पौधे, विभिन्न फूल आदि मिलते है वही जीवों के रूप में मेंढक, कीट, पक्षी जैसे जीव होते है, और अजैव घटक वहाँ का वायु, मृदा, ताप आदि होते हैं | अत: बगीचा एक परितंत्र है |
जैव घटक : किसी भी पर्यावरण के सभी जीवधारी जैसे – पेड़-पौधे एवं जीव-जन्तु जैव घटक कहलाते हैं |
अजैव घटक : किसी परितंत्र के भौतिक कारक जैसे- ताप, वर्षा, वायु, मृदा एवं खनिज इत्यादि अजैव घटक कहलाते हैं |
परितंत्र दो प्रकार के होते है :
(i) प्राकृतिक परितंत्र : वन, तालाब नदी एवं झील आदि प्राकृतिक परितंत्र हैं |
(ii) कृत्रिम परितंत्र : बगीचा, खेत आदि कृत्रिम अर्थात मानव निर्मित परितंत्र हैं |

जीवन निर्वाह के आधार पर जीवों का वर्गीकरण :
जीवन निर्वाह के आधार पर जीवों को तीन भागों में विभाजित किया गया है :
(1) उत्पादक (Producer)
(2) उपभोक्ता (Consumer)
(3) अपघटक (Decomposer)
1. उत्पादक (Producer) : वे जीव जो सूर्य के प्रकाश में अकार्बनिक पदार्थों जैसे शर्करा व स्टार्च का प्रयोग कर अपना भोजन बनाते हैं, उत्पादक कहलाते हैं |
अर्थात प्रकाश संश्लेषण करने वाले सभी हरे पौधे, नील-हरित शैवाल आदि उत्पादक कहलाते हैं |
2. उपभोक्ता (Consumer) : ऐसे जीव जो अपने निर्वाह के लिए परोक्ष या अपरोक्ष रूप से उत्पादकों द्वारा निर्मित भोजन का उपयोग करते हैं |
उपभोक्ताओं का निम्नलिखित चार प्रकार है :
(i) शाकाहारी (Herbivores) : वे जीव जो अपने जीवन निर्वाह के लिए सिर्फ पेड़-पौधों पर ही निर्भर रहते हैं, शाकाहारी कहलाते हैं | जैसे - गाय, हिरण, बकरी और खरगोस आदि |
(ii) माँसाहारी (Carnivores) : वे जीव जो सिर्फ माँस खाते है अर्थात जीव-जन्तुओ से अपना भोजन करते है, माँसाहारी कहलाते हैं | उदाहरण : शेर, बाघ, चीता आदि |
(iii) परजीवी (Parasites) : वे जीव स्वयं भोजन नहीं बनाते परन्तु ये अन्य जीवों के शरीर में या उनके ऊपर रहकर उन्हीं से भोजन लेते हैं परजीवी कहलाते हैं | उदाहरण: प्लाजमोडियम, फीता कृमि, जू आदि |
(iv) सर्वाहारी (Omnivores) : वे जीव जो पौधे एवं माँस दोनों खाते हैं सर्वाहारी कहलाते हैं | जैसे- कौवा, कुत्ता आदि |
3. अपमार्जक या अपघटक (Decomposer) : वे जीव जो मरे हुए जीव व् पौधे या अन्य कार्बनिक पदार्थों के जटिल पदार्थों को सरल पदार्थों में विघटित कर देते है | अपघटक कहलाते हैं |
वे जीव जो मृतजैव अवशेषों का अपमार्जन करते है अपमार्जक कहलाते हैं | जैसे - जीवाणु, कवक, गिद्ध आदि | जैसे - फफूँदी व जीवाणु आदि |