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Chapter 15. हमारा पर्यावरण Class 10 Science CBSE notes in hindi परितंत्र - CBSE Study

Chapter 15. हमारा पर्यावरण Science Class 10 cbse notes परितंत्र in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter 15. हमारा पर्यावरण Class 10 Science CBSE notes in hindi परितंत्र - CBSE Study

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Class 10 English Medium Science All Chapters:

15. हमारा पर्यावरण

2. परितंत्र

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अध्याय 15. हमारा पर्यावरण 


 

जैव निम्नीकरनीय पदार्थों के गुण :

(i) ये पदार्थ सक्रीय (active) होते हैं |

(ii) इनका जैव अपघटन होता है |

(iii) ये बहुत कम ही समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं |

(iv) ये पर्यावरण को अधिक हानि नहीं पहुँचाते हैं |

जैव अनिम्नीकरनीय पदार्थों के गुण :

(i) ये पदार्थ अक्रिय (Inert) होते हैं |

(ii) इनका जैव अपघटन नहीं होता है |

(iii) ये लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं |

(iv) ये पर्यावरण के अन्य पदार्थों को हानि पहुँचाते हैं |

परितंत्र : किसी भी क्षेत्र के जैव तथा अजैव घटक मिलकर संयुक्त रूप से एक तंत्र का निर्माण करते हैं जिन्हें परितंत्र कहते है |

जैसे – बगीचा, तालाब, झील, खेत, नदी आदि |

उदाहरण के लिए बगीचा में हमें विभिन्न जैव घटक जैसे – घास, वृक्ष, पौधे, विभिन्न फूल आदि मिलते है वही जीवों के रूप में मेंढक, कीट, पक्षी जैसे जीव होते है, और अजैव घटक वहाँ का वायु, मृदा, ताप आदि होते हैं | अत: बगीचा एक परितंत्र है |

जैव घटक : किसी भी पर्यावरण के सभी जीवधारी जैसे – पेड़-पौधे एवं जीव-जन्तु जैव घटक कहलाते हैं |

अजैव घटक : किसी परितंत्र के भौतिक कारक जैसे- ताप, वर्षा, वायु, मृदा एवं खनिज इत्यादि अजैव घटक कहलाते हैं |

परितंत्र दो प्रकार के होते है :

(i)  प्राकृतिक परितंत्र : वन, तालाब नदी एवं झील आदि प्राकृतिक परितंत्र हैं |

(ii) कृत्रिम परितंत्र : बगीचा, खेत आदि कृत्रिम अर्थात मानव निर्मित परितंत्र हैं |  

जीवन निर्वाह के आधार पर जीवों का वर्गीकरण : 

जीवन निर्वाह के आधार पर जीवों को तीन भागों में विभाजित किया गया है :

(1) उत्पादक (Producer)

(2) उपभोक्ता (Consumer)

(3) अपघटक (Decomposer)

1. उत्पादक (Producer) : वे जीव जो सूर्य के प्रकाश में अकार्बनिक पदार्थों जैसे शर्करा व स्टार्च का प्रयोग कर अपना भोजन बनाते हैं, उत्पादक कहलाते हैं | 

अर्थात प्रकाश संश्लेषण करने वाले सभी हरे पौधे, नील-हरित शैवाल आदि उत्पादक कहलाते हैं | 

2. उपभोक्ता (Consumer) : ऐसे जीव जो अपने निर्वाह के लिए परोक्ष या अपरोक्ष रूप से उत्पादकों द्वारा निर्मित भोजन का उपयोग करते हैं | 

उपभोक्ताओं का निम्नलिखित चार प्रकार है :

(i) शाकाहारी (Herbivores) : वे जीव जो अपने जीवन निर्वाह के लिए सिर्फ पेड़-पौधों पर ही निर्भर रहते हैं, शाकाहारी कहलाते हैं | जैसे - गाय, हिरण, बकरी और खरगोस आदि | 

(ii) माँसाहारी (Carnivores) : वे जीव जो सिर्फ माँस खाते है अर्थात जीव-जन्तुओ से अपना भोजन करते है, माँसाहारी कहलाते हैं | उदाहरण : शेर, बाघ, चीता आदि | 

(iii) परजीवी (Parasites) : वे जीव स्वयं भोजन नहीं बनाते परन्तु ये अन्य जीवों के शरीर में या उनके ऊपर रहकर उन्हीं से भोजन लेते हैं परजीवी कहलाते हैं | उदाहरण: प्लाजमोडियम, फीता कृमि, जू आदि |  

(iv) सर्वाहारी (Omnivores) : वे जीव जो पौधे एवं माँस दोनों खाते हैं सर्वाहारी कहलाते हैं | जैसे- कौवा, कुत्ता आदि | 

3. अपमार्जक या अपघटक (Decomposer) : वे जीव जो मरे हुए जीव व् पौधे या अन्य कार्बनिक पदार्थों के जटिल पदार्थों को सरल पदार्थों में विघटित कर देते है | अपघटक कहलाते हैं | 

वे जीव जो मृतजैव अवशेषों का अपमार्जन करते है अपमार्जक कहलाते हैं | जैसे - जीवाणु, कवक, गिद्ध आदि |  जैसे - फफूँदी व जीवाणु आदि | 

 

 

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