Chapter 13. विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव Class 10 Science CBSE notes in hindi फ्लेमिंग का वामहस्त नियम - CBSE Study
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CBSE NOTES:
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13. विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव
3. फ्लेमिंग का वामहस्त नियम
फ्लेमिंग का वामहस्त नियम :
इस नियम के अनुसार, अपने बाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा तथा अँगूठे को इस प्रकार फैलाइए कि ये तीनों एक-दूसरे के परस्पर लंबवत हों | यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा चालक में प्रवाहित विद्युत धारा की दिशा की ओर संकेत करती है तो अँगूठा चालक की गति की दिशा अथवा चालक पर आरोपित बल की दिशा की ओर संकेत करेगा। इसी नियम को फ्लेमिंग का वामहस्त नियम कहते है |

इसी नियम के आधार पर विद्युत मोटर कार्य करता है |
- विद्युत मोटर, विद्युत जनित्र, ध्वनि विस्तारक यंत्र, माइक्रोप़ फोन तथा विद्युत मापक यंत्र कुछ ऐसी युक्तियाँ हैं जिनमें विद्युत धरावाही चालक तथा चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग होता है।
MRI - इसका पूरा नाम चुम्बकीय अनुनाद प्रतिबिम्बन (Magnetic Resonance Imaging) है | यह एक विशेष तकनीक है जिससे शरीर के भीतर चुंबकीय क्षेत्र, शरीर के विभिन्न भागों के प्रतिबिंब प्राप्त करने का आधार बनता है | इन प्रतिबिंबों का विश्लेषण कर बिमारियों का निदान (diagnosis) किया जाता है |
मानव शरीर के दो भाग जहाँ चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होते है :
(i) मानव मस्तिष्क
(ii) मानव ह्रदय
विद्युत मोटर (Electric Motor):
विद्युत मोटर एक घूर्णन युक्ति है जिसमें विद्युत ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा में रूपांतरण होता है | इस युक्ति का उपयोग विद्युत पंखे, रेफ्रीजिरेटरों, विद्युत मिक्सी, वाशिंग मशीन, कंप्यूटर, MP 3 प्लेयर आदि में किया जाता है |
विद्युत मोटर का सिद्धांत :
विद्युत मोटर का कार्य करने का सिद्धांत विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव पर आधारित है | चुंबकीय क्षेत्र में लौह-क्रोड़ पर लिपटी कुंडली से जब विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो वह एक बल का अनुभव करती है | जिससे मोटर का आर्मेचर चुंबकीय क्षेत्र में घूमने लगता है | कुंडली के घूमने की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम के अनुसार होता है | यही विद्युत मोटर का सिद्धांत हैं |

विद्युत मोटर में विभक्त वलय की भूमिका :
विद्युत मोटर में विभक्त वलय दिक्-परिवर्तक का कार्य करता है | दिक्-परिवर्तक एक युक्ति है जो परिपथ में विद्युत-धारा के प्रवाह को उत्क्रमित कर देता है |
दिक्परिवर्तक (Commutator) :
वह युक्ति जो परिपथ में विद्युत धरा के प्रवाह को उत्क्रमित कर देती है, उसे
दिकपरिवर्तक कहते हैं।
व्यावसायिक मोटरों के गुण : व्यावसायिक मोटर एक शक्तिशाली मोटर होता है | इसके निम्न गुणों के कारण यह शक्तिशाली होता है |
(i) स्थायी चुंबकों के स्थान पर विद्युत चुंबक प्रयोग किए जाते हैं,
(ii) विद्युत धरावाही कुंडली में फेरों संख्या अत्यधिक होती है तथा
(iii) कुंडली नर्म लौह-क्रोड पर लपेटी जाती है। वह नर्म लौह-क्रोड जिस पर कुंडली को लपेटा जाता है तथा कुंडली दोनों मिलकर आर्मेचर कहलाते हैं। इससे मोटर की शक्ति में वृद्धि हो जाती है।