Chapter गति पर बलों का प्रभाव Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi न्यूटन का गति का प्रथम नियम - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:
गति पर बलों का प्रभाव
6. न्यूटन का गति का प्रथम नियम
अध्याय 6. गति पर बलों का प्रभाव
घर्षण बल तथा जड़त्व (Inertia) की अवधारणा को समझने के बाद अब हम न्यूटन (Newton) के गति के प्रथम नियम का अध्ययन करेंगे। यह नियम बताता है कि किसी वस्तु की गति में परिवर्तन तभी होता है जब उस पर कोई परिणामी बल (Net Force) कार्य करे। यह नियम जड़त्व की वैज्ञानिक व्याख्या भी प्रस्तुत करता है।
न्यूटन का गति का प्रथम नियम
न्यूटन का प्रथम नियम (Newton's First Law of Motion)
न्यूटन का गति का प्रथम नियम कहता है कि यदि किसी वस्तु पर कोई परिणामी बल (Net Force) कार्य नहीं कर रहा हो, तो विरामावस्था में रखी वस्तु विरामावस्था में ही रहेगी तथा गतिमान वस्तु समान वेग (Uniform Velocity) से सीधी रेखा में चलती रहेगी। वस्तु की गति में परिवर्तन तभी होगा जब उस पर कोई असंतुलित या परिणामी बल कार्य करेगा।
- परिणामी बल शून्य होने पर गति में परिवर्तन नहीं होता।
- स्थिर वस्तु स्वयं गति करना प्रारम्भ नहीं करती।
- गतिमान वस्तु समान वेग से चलती रहती है।
- गति में परिवर्तन के लिए बाहरी परिणामी बल आवश्यक है।
जड़त्व एवं प्रथम नियम का संबंध
न्यूटन का प्रथम नियम जड़त्व (Inertia) की व्याख्या करता है। प्रत्येक वस्तु अपनी वर्तमान अवस्था बनाए रखने का प्रयास करती है। यही कारण है कि बिना बाहरी बल के कोई वस्तु अपनी गति या विरामावस्था नहीं बदलती।
- जड़त्व वस्तु का प्राकृतिक गुण है।
- अधिक द्रव्यमान वाली वस्तु का जड़त्व अधिक होता है।
- जड़त्व के कारण वस्तु परिवर्तन का विरोध करती है।
परिणामी बल का महत्व
यदि किसी वस्तु पर लगने वाले सभी बल एक-दूसरे को संतुलित कर दें, तो परिणामी बल शून्य होगा और वस्तु की गति में कोई परिवर्तन नहीं होगा। लेकिन यदि परिणामी बल शून्य नहीं है, तो वस्तु का वेग, दिशा अथवा दोनों बदल सकते हैं।
| परिणामी बल | वस्तु पर प्रभाव |
|---|---|
| शून्य (0 N) | वस्तु अपनी वर्तमान अवस्था बनाए रखती है। |
| शून्य से अधिक | वस्तु की गति या दिशा में परिवर्तन होता है। |
न्यूटन के प्रथम नियम के उदाहरण
- चलती बस अचानक रुकने पर यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं।
- खड़ी बस अचानक चलने पर यात्री पीछे की ओर झुकते हैं।
- मेजपोश को तेजी से खींचने पर बर्तन लगभग अपनी जगह पर बने रहते हैं।
- पेड़ की शाखा हिलाने पर फल नीचे गिर जाते हैं।
स्थिति-समय एवं वेग-समय ग्राफ
यदि किसी वस्तु पर परिणामी बल कार्य नहीं कर रहा हो, तो उसकी गति की अवस्था के अनुसार स्थिति-समय (Position-Time) तथा वेग-समय (Velocity-Time) ग्राफ बनाए जा सकते हैं। विरामावस्था में स्थिति-समय ग्राफ क्षैतिज रेखा तथा वेग-समय ग्राफ शून्य वेग दर्शाता है। समान वेग से गति करने पर स्थिति-समय ग्राफ सीधी रेखा तथा वेग-समय ग्राफ क्षैतिज रेखा प्राप्त होती है।
| वस्तु की अवस्था | स्थिति-समय ग्राफ | वेग-समय ग्राफ |
|---|---|---|
| विरामावस्था | क्षैतिज रेखा | शून्य वेग |
| समान वेग से गति | सीधी रेखा | नियत वेग वाली क्षैतिज रेखा |
Our Concept Builder
मान लीजिए एक बॉक्स समतल फर्श पर समान वेग से चल रहा है। यदि उस पर लगने वाला धक्का और घर्षण बल बराबर हों, तो परिणामी बल शून्य होगा और बॉक्स उसी वेग से चलता रहेगा। लेकिन यदि धक्का बढ़ा दिया जाए या घर्षण कम हो जाए, तो परिणामी बल उत्पन्न होगा और बॉक्स की गति बदल जाएगी। यही न्यूटन के प्रथम नियम का मूल सिद्धांत है।
Exam Booster
- न्यूटन का प्रथम नियम जड़त्व (Inertia) का नियम कहलाता है।
- परिणामी बल शून्य होने पर वस्तु की गति में परिवर्तन नहीं होता।
- गति में परिवर्तन के लिए असंतुलित बल आवश्यक है।
- जड़त्व एवं प्रथम नियम का संबंध परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- स्थिति-समय एवं वेग-समय ग्राफ पर आधारित प्रश्न CBSE परीक्षा में पूछे जाते हैं।
- बस, मेजपोश तथा पेड़ से फल गिरने जैसे उदाहरण अवश्य याद रखें।