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Chapter Chapter 1. ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ Class 12 History Part-1 CBSE notes in hindi Quick Revising Notes - CBSE Study

Chapter Chapter 1. ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ History Part-1 Class 12 cbse notes Quick Revising Notes in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter Chapter 1. ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ Class 12 History Part-1 CBSE notes in hindi Quick Revising Notes - CBSE Study

कक्षा 12 History Part-1 के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 1. ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक Quick Revising Notes को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन History Part-1 में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 12 English Medium History Part-1 All Chapters:

Chapter 1. ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ

3. Quick Revising Notes

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ईंटें, मनके और अस्थियाँ — त्वरित पुनरावृति

इतिहास कक्षा 12 (पाठ्यपुस्तक 1) — सिंधु घाटी सभ्यता

परिचय

यह अध्याय सिंधु घाटी सभ्यता के पुरातात्त्विक स्रोतों पर आधारित है। ईंटें (Bricks), मनके (Beads) और अस्थियाँ (Bones) हमें इस सभ्यता के नगर-योजना, अर्थव्यवस्था, धार्मिक मान्यताओं और जीवन शैली के बारे में जानकारी देते हैं।

मुख्य नगर केन्द्र

  • हड़प्पा — पंजाब (1921 में खोज)।
  • मोहनजोदड़ो — सिंध (1922 में खोज)।
  • अन्य केन्द्र: कालीबंगन, लोथल, धौलावीरा, राखीगढ़ी, बनावली।

नगर योजना

  • सड़कें ग्रिड प्रणाली पर बनी हुई थीं।
  • गढ़ीला भाग (Citadel) — शासकों, सार्वजनिक भवन और अन्नागार।
  • निचला भाग — आवासीय क्षेत्र।
  • नालियाँ पक्की ईंटों से बनी और ढकी हुई।
  • ईंटें समान आकार की — उन्नत तकनीक का प्रमाण।

कृषि और अर्थव्यवस्था

  • मुख्य फसलें: गेहूँ, जौ, चावल (लोथल), कपास, तिल।
  • पशुपालन: गाय, भैंस, भेड़, बकरी।
  • व्यापार:
    • आंतरिक — कपास, मनके, मिट्टी के बर्तन।
    • बाहरी — मेसोपोटामिया, ओमान, अफगानिस्तान।

शिल्प उत्पादन (मनके और अन्य वस्तुएँ)

  • मनके: कार्नेलियन, स्टियाटाइट, लैपिस लाजुली।
  • धातु कार्य: ताँबा, कांसा, सोना, चाँदी।
  • मिट्टी के बर्तन, खिलौने और मूर्तियाँ।

धार्मिक मान्यताएँ

  • मातृ देवी की मूर्तियाँ।
  • पशुपति (Proto-Shiva) मुद्राएँ
  • पीपल वृक्ष और पशु पूजा।
  • कालीबंगन से अग्नि वेदी।

समाज और शासन

  • नगरों की सुव्यवस्थित योजना → किसी केंद्रीकृत सत्ता का संकेत।
  • समाज में किसान, व्यापारी, कारीगर, श्रमिक आदि।

लिपि और भाषा

  • हड़प्पा लिपि चित्रलिपि थी।
  • अब तक अपठनीय (Undeciphered)।

समाधि प्रथा (अस्थियाँ)

  • समाधि में वस्तुएँ रखी जाती थीं → मृत्यु के बाद जीवन में विश्वास।
  • अस्थियों से आहार और स्वास्थ्य का ज्ञान।

पतन के कारण

  • जलवायु परिवर्तन और सूखा।
  • नदियों का मार्ग बदलना।
  • बाढ़ या भूकंप।
  • आर्य आक्रमण (कम मान्य)।
  • सबसे मान्य कारण: पारिस्थितिक असंतुलन + नदियों का बदलना।

त्वरित पुनरावृति बिंदु

  • हड़प्पा और मोहनजोदड़ो — प्रमुख नगर।
  • ग्रिड पैटर्न + उन्नत जल निकासी।
  • मुख्य फसलें: गेहूँ, जौ, कपास।
  • व्यापार — मेसोपोटामिया से संबंध।
  • धर्म — मातृ देवी, पशु पूजा, पशुपति मुहर।
  • लिपि अभी तक अपठनीय।
  • पतन — जलवायु व नदी परिवर्तन।

कर्निन्घम का भ्रम

परिचय

अलेक्ज़ेंडर कर्निन्घम भारत के पहले पुरातत्व सर्वेक्षक (Archaeological Survey of India – ASI) थे। उन्होंने 19वीं शताब्दी में कई पुरातात्विक स्थलों की खुदाई करवाई।

भ्रम क्या था?

हड़प्पा स्थल से प्राप्त मुहरों और अवशेषों को देखकर कर्निन्घम ने यह माना कि ये गुप्तकालीन या उत्तरवर्ती काल (लगभग 1000 ई.पू. के आसपास) के हैं। उन्होंने यह नहीं समझा कि यह स्थल वास्तव में अत्यंत प्राचीन है।

भ्रम का कारण

उस समय विद्वानों को यह कल्पना ही नहीं थी कि भारत में भी मेसोपोटामिया जैसी प्राचीन नगरीय सभ्यता रही होगी। इस कारण कर्निन्घम ने हड़प्पा को नए युग का स्थल मान लिया।

सत्य का उद्घाटन

1920 के दशक में दयाराम साहनी और आर.डी. बनर्जी की खुदाई से यह स्पष्ट हुआ कि हड़प्पा और मोहनजोदड़ो विश्व की सबसे प्राचीन नगरीय सभ्यताओं (सिंधु घाटी सभ्यता, 2600–1900 ई.पू.) में से हैं। इस प्रकार कर्निन्घम का भ्रम दूर हुआ।

परीक्षा के लिए उत्तर

संक्षिप्त उत्तर: कर्निन्घम का भ्रम यह था कि हड़प्पा से प्राप्त मुहरें और अवशेष गुप्तकालीन या उत्तरवर्ती काल के थे। वास्तव में यह स्थल सिंधु घाटी सभ्यता (2600–1900 ई.पू.) का था।

कर्निन्घम का भ्रम

उत्तर: कर्निन्घम ने हड़प्पा से प्राप्त मुहरों और अवशेषों को गुप्तकालीन या उत्तरवर्ती काल का माना। वास्तव में ये अवशेष सिंधु घाटी सभ्यता (2600–1900 ई.पू.) के थे।

नगर योजना की विशेषताएँ

प्रश्न:

हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

  • सड़कें ग्रिड पैटर्न पर बनी थीं।
  • नगर दो भागों में विभाजित था – गढ़ीला भाग (Citadel) और निचला नगर।
  • पक्की ईंटों से मकान व भवन बनाए जाते थे।
  • उन्नत जल निकासी प्रणाली थी।
  • सार्वजनिक भवन जैसे स्नानागार और अन्नागार पाए गए।

धार्मिक मान्यताएँ

प्रश्न:

हड़प्पावासियों की धार्मिक मान्यताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

  • मातृ देवी की पूजा।
  • ‘पशुपति महादेव’ जैसी आकृति की मुहरें।
  • पीपल वृक्ष और पशु पूजा।
  • कालीबंगन से अग्नि वेदी के प्रमाण।

लिपि

प्रश्न:

हड़प्पा सभ्यता की लिपि के बारे में क्या ज्ञात होता है?

उत्तर:

हड़प्पा सभ्यता की लिपि चित्रलिपि (pictographic) थी, जो अब तक अपठनीय (undeciphered) है।

अर्थव्यवस्था

प्रश्न:

हड़प्पा सभ्यता की अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताएँ क्या थीं?

उत्तर:

  • खेती – गेहूँ, जौ, तिल, चावल, कपास।
  • पशुपालन – गाय, भैंस, भेड़, बकरी।
  • आंतरिक एवं बाहरी व्यापार – मेसोपोटामिया, अफगानिस्तान, ओमान से संबंध।
  • हस्तशिल्प – मनके, आभूषण, धातु व मिट्टी के बर्तन।

अस्थियाँ एवं समाधि

प्रश्न:

हड़प्पावासियों की समाधि पद्धति से क्या ज्ञात होता है?

उत्तर:

हड़प्पावासी मृतकों के साथ वस्तुएँ (गहने, बर्तन आदि) रखते थे, जिससे प्रतीत होता है कि वे मृत्यु के बाद जीवन में विश्वास करते थे। अस्थियों से उनके भोजन एवं स्वास्थ्य की जानकारी मिलती है।

पतन के कारण

प्रश्न:

हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारणों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

  • जलवायु परिवर्तन एवं सूखा।
  • नदियों का मार्ग बदलना।
  • भूकंप या बाढ़।
  • पारिस्थितिक असंतुलन।
  • कुछ इतिहासकारों के अनुसार आर्यों का आक्रमण।

 

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