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Chapter Chapter 8. व्यावसायिक वित्त के स्रोत Class 11 Business Study CBSE notes in hindi Page 3 - CBSE Study

Chapter Chapter 8. व्यावसायिक वित्त के स्रोत Business Study Class 11 cbse notes Page 3 in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter Chapter 8. व्यावसायिक वित्त के स्रोत Class 11 Business Study CBSE notes in hindi Page 3 - CBSE Study

कक्षा 11 Business Study के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 8. व्यावसायिक वित्त के स्रोत को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक Page 3 को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Business Study में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 11 English Medium Business Study All Chapters:

Chapter 8. व्यावसायिक वित्त के स्रोत

3. Page 3

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अध्याय 8 व्यवसायिक वित् के स्रोत 

सार्वजानिक जमा 

सार्वजनिक जमा कोष जमा करने की ऐसी विधि है जिसमें कंपनिया या व्यवसायिक संगठन द्वारा अपने व्यवसाय को चलाने के लिए सीधे जनता से धन जमा किया जाता है |सार्वजानिक जमा में जनता को बैंक जमा से अधिक दरो पर ब्याज दिया |

सार्वजानिक जमा के लाभ 

1. यह वित् प्राप्त करने का सबसे सरल रास्ता है क्योंकि इसमें ज्यादा कागजी कार्यवाही नहीं होती है |  

2. इस स्रोत से वित् प्राप्त करने पर कंपनी को अपनी सम्पतिओं को गिरवी नहीं रखना पड़ता |

3. जमाकर्ताओं का कंपनी के कार्यो में कोई हस्तक्षेप नहीं होता इसलिए कंपनी अपना काम आसनी से कर सकती है |

सार्वजानिक जमा की हानियां

1. नई कंपनियों के लिए सार्वजानिक जमा से कोष जुटाना थोडा मुश्किल होता है |

2. यह वित् का स्थाई स्रोत नहीं है क्योंकि, यह हो सकता है की जब कंपनी को वित् की जरूरत हो तो कोई धन जमा ही न कराएँ तथा जब कंपनी की आर्थिक स्थति अच्छी न हो तो को भी धन जमा करवाने के लिए तैयार नहीं होता है | 

3. इससे वित् जुटाना कठिन होता है | यदि जमा की राशि बड़ी हो तो और भी मुश्किल होती है क्योकि जमाकर्ताओं को धन जमा करने के बदले कुछ भी सम्पति गिरवी नहीं मिलती इसलिए उन्हें डर रहता है |

वाणिज्यिक पत्र 

वाणिज्यिक पत्र ऐसे प्रतिज्ञा पत्र(promissory note)होते है जिसे एक कंपनी कोष जुटाने के लिए कंपनी के नाम पर बैंको को, दूसरी कंपनी को या बीमा कंपनी को जारी करती है | वाणिज्यिक पत्र का प्रयोग अल्प अवधि वित् के स्रोत के रूप में किया जाता है | इसे अच्छी साख वाली फार्म ही जारी करती है |

वाणिज्यिक पत्र के लाभ और उसके गुण 

1. इसमे किसी भी प्रकार की शर्ते नहीं होती है |

2. वाणिज्यिक पत्र को बिना किसी जमानत के बेचा जाता है |

3. अन्य कोषों की तुलना में इससे अधिक कोष जुटाएँ जा सकते है |

4. यह बैंको से कोष जमा करने या ऋण लेने में लगने वाले खर्चे की तुलना में सस्ता होता है |

5. वाणिज्यिक पत्रों को आसानी से बेचा जा सकता है |

वाणिज्यिक पत्र की हानियाँ  

1. वाणिज्यिक पत्र से केवल अच्छी साख वाली या वह कंपनी जिसकी वितीय स्थति अच्छी हो वही कोष जमा कर सकती है |

2. वाणिज्यिक पत्र से उतना ही कोष जुटाया जा सकता है जितना कोष देने वाली कंपनी के पास अतरिक्त धन या रोकड़ हो |

3. वाणिज्यिक पत्र की भुगतान तिथि यानि जिस दिन पैसा वापस करना है, निश्चित होती है | उसे बढाया नहीं जा सकता है चाहे कंपनी की आर्थिक स्थति ख़राब ही क्यों न हो |

ऋण पत्र 

 ऋण पत्र व्यवसायिक वित् के स्रोतों का ही एक प्रकार है | ऋण पत्र ऐसे पत्र होते है जिसमे ऋणदाता कंपनी को निश्चित ब्याज दरो पर ऋण देते है जिसे कंपनी एक निश्चित अवधि के बाद लौटाने का वचन देती है | कंपनी को लाभ हो या हानि कंपनी को ऋणदाताओं को ब्याज देना ही होता है | ऋण पत्र दीर्घ अवधि के कोषों के लिए होता है |

ऋण पत्रों को जारी करने के लिए आवश्यक करक    

1. कंपनी के विकास का लेखा - जोखा |

2. कितना लाभ कमाती है |

3. उधार चुकाने की क्षमता |

4. कंपनी की साख |

5. पिछला हिसाब - किताब |

ऋण पत्रों के लाभ 

1. ऋणपत्रधारियों का कंपनी के लाभ में कोई हिस्सा नहीं होता है |

2. ऋण पत्र जारी करना तब अच्छा होता है जब व्यवसाय की आर्थिक स्थति अच्छी हो |

3. ऋण देने वालो के लिए यह स्थाई आय का स्रोत होता है क्योकि कंपनी को लाभ हो या हानि ब्याज मिलता ही है |

4. ऋण पत्रों को अंशो की तुलना मं आसानी से बचा जा सकता है |  

5. ऋणपत्रधारियों का कंपनी के कार्यो तथा निर्णयों में कोई हस्तक्षेप नहीं होता है |

6. ऋणपत्रों पर दिए जाने वाले ब्याज को लाभ में से काटकर बचे लाभ पर कंपनी आयकर देती है जिससे कंपनी को कर कम देना पड़ता है |

ऋण पत्रों की हानियाँ

1.  कंपनी को लाभ हो या हानि कंपनी को ऋणदाताओं को ब्याज देना ही होता है |

2. अगर कंपनी मूल तथा ब्याज का भुगतान नहीं कर सकते तो ऋणपत्रधारी कंपनी पर कानूनी कार्यवाही कर सकती है |

3. ऋण पत्र से कोष जुटाने के लिए सम्पतियो को गिरवी रखना पड़ता है तथा इसके कारण कंपनी की साख भी प्रभावित होती है |

4. प्रत्येक कंपनी की ऋण लेने की निश्चित क्षमता होती है, इससे कम्पनी की ऋण लेने की क्षमता कम हो जाती है |

वाणिज्यिक बैंक 

वाणिज्यिक बैंक व्यवसायिक वित् के स्रोत के रूप में  प्रसिद्ध है | वाणिज्यिक बैंक कंपनी को निश्चित ब्याज दरो पर ऋण मुहैया कराती है | बैंक कंपनी को अल्प अवधि, मध्य अवधि तथा दीर्घ अवधि के लिए ऋण प्रदान करती है इसके अलावा यह बैंक और भी कई प्रकार की सुविधाए प्रदान करता है | ऋण लेने के लिए व्यवसायिक संगठनों को संपतियां गिरवी रखना पड़ता है |

वाणिज्यिक बैंको के लाभ  

1. व्यवसाय में जब भी धन की जरूरत होती बैंक हमेशा समय पर ऋण देकर मदद करते है |

2. बैंको को जो भी व्यवसाय से सम्बंधित जानकारियां दी जाती है उसे गुप्त रखा जाता है | जिससे गोपनीयता बनी रहती है |

3. यह वित् का लचीला स्रोत है क्योकि उधार लिए गए धन को समय से पहले भी चुकाया जा सकता है या और ऋण लिया जा सकता है |

वाणिज्यिक बैंको की हानियाँ 

1. ऋण आमतौर पर छोटी अवधि के लिए दिया जाता है न की लम्बी अवधि के लिए |

2. ऋण लेने के लिए व्यवसायिक संगठनों को संपतियां गिरवी रखना पड़ता है |

3. ऋण लेने के लिए काफी दौड़-भाग करना पड़ता है और ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया जटिल होती है क्योकि बैंक काफी जांच पड़ताल करते है |

4. कई प्रकार की प्रतिबंधित शर्तो का पालन करना पड़ता है |

 

 

  

 

 

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