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Chapter Chapter 8. व्यावसायिक वित्त के स्रोत Class 11 Business Study CBSE notes in hindi संचित आय के गुण तथा इसके लाभ - CBSE Study

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Chapter Chapter 8. व्यावसायिक वित्त के स्रोत Class 11 Business Study CBSE notes in hindi संचित आय के गुण तथा इसके लाभ - CBSE Study

कक्षा 11 Business Study के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 8. व्यावसायिक वित्त के स्रोत को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक संचित आय के गुण तथा इसके लाभ को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Business Study में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 11 English Medium Business Study All Chapters:

Chapter 8. व्यावसायिक वित्त के स्रोत

2. संचित आय के गुण तथा इसके लाभ

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अध्याय 8 व्यवसायिक वित् के स्रोत  

संचित आय

कुल अर्जित लाभ में से देनदारो को देने के बाद जो आय या income बच जाती है उसे शुद्ध आय कहते है | शुद्ध आय का वह भाग जिसे भविष्य में उपयोग या दुबारा विनियोग(re-invest) के लिए व्यवसाय जमा कर लेती है उसे संचित आय कहते है | इस कोष का प्रयोग कंपनी अपने व्यवसाय के विकास तथा विस्तार के लिए करती है | संचित आय व्यवसाय के लाभ पर निर्भर करता है |

संचित आय के गुण तथा इसके लाभ 

1. यह वित् प्राप्त करने का सस्ता तथा आसान साधन है क्योंकि इसके लिए न तो कंपनी को ब्याज देना होता है और न ही सम्पति गिरवी रखनी पड़ती है |

2. संचित आय कंपनी के लाभ से निकाला जाता है जिस कारण कंपनी इस आय का कही भी प्रयोग कर सकती है |

3. संचित आय कंपनी के अन्दर से ही जुटाई जाती है इसलिए कंपनी बाजार के उतार - चढावो से सुरक्षित रहती है |

4. संचित आय के कारण कंपनी के विस्तार के लिए पूँजी की चिंता नहीं करनी पड़ती जिससे कंपनी के विस्तार और उसके विकास में आसानी होती है |

5. यह कंपनी की स्थाई पूँजी होती है |

6. इससे कंपनी के अंशो के मूल्य में वृद्धि होती है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जितनी कंपनी की संचित आय ज्यादा होगी उतनी ही बाजार में उसकी स्थति अच्छी होगी, जिससे अंशो के मूल्य में वृद्धि होगी |  

संचित आय की सीमाएँ तथा इसकी हानियाँ 

1. संचित आय कंपनी के लाभ का हिस्सा होता है, जिसके कारण अंशधारियो के लाभांश का भाग कम हो जाता है | यह अंशधारियो के असंतोष तथा मतभेद का कारण बन सकता है | 

2. व्यवसाय में लाभ हो भी सकता है और नहीं भी इसलिए यह व्यवसायिक स्रोत का अनिश्चित स्रोत है |

3. कई कम्पनियाँ संचित आय को सही नहीं मानती क्योकि कंपनी ने संचित आय का क्या किया, कहाँ इसका प्रयोग किया इसका जवाब किसी को नहीं देना पड़ता इसलिए इसका दुरूपयोग संभव है |

4. संचित आय के कारण एक कंपनी काफी विस्तार कर सकती है तथा अधिक लाभ कम सकती है | यदि ये कंपनिया अत्यधिक लाभ कम लेती है तो बाजार पर इनके एकाधिकार का खतरा पैदा हो जाता है |   

व्यापारिक साख 

व्यापारिक साख वह उधार सुविधा है जिसे एक व्यापारी दूसरे व्यापारी को देता है | व्यवसायिक वित् के इस स्रोत में एक व्यापारी दूसरे व्यापारी की साख(Goodwill) तथा उनके बीच संबंधो के आधार पर वस्तुओं तथा सेवाओं को उधार खरीदनें की सुविधा प्रदान करता है | यह व्यवसाय का अल्पकालीन वितीय स्रोत होता है |

व्यापारिक साख के निर्धारक तत्व  

(i) उधार माल खरीदने वाली कंपनी(क्रेता) की साख |

(ii) विक्रेता की वितीय स्थति, इसका अर्थ है की विक्रेता इस स्थति में है या नहीं कि वह उधार सुविधा दे सके |

(iii) क्रय की मात्रा, इसका अर्थ है की यदि क्रेता कम खरीद रहा है तो वह पैसे से ख़रीदे |

(iv) व्यापारिक साख इसपे भी निर्भर करता है की क्रेता ने अपना पिछला उधार कितना चुकाया है |

(v) क्रेता की स्थति, उधार सुविधा क्रेता की स्थति को भी ध्यान में रखकर दिया जाता है क्योंकि क्रेता की स्थति इतनी तो खराब नहीं है की वो पैसे लौटा ही न पाए|

व्यापारिक साख के गुण तथा लाभ 

1. यह कोष जुटाने का आसान तथा सुविधाजनक स्रोत है |

2. क्रेता तथा विक्रेता के बीच सम्बन्ध अच्छे हो तो उधार तुरंत और आसानी से मिल जाता है |

3. व्यापारिक साख व्यवसायिक संगठन की बिक्री को बढाता है क्योंकि व्यापारिक साख कंपनी की साख को देखकर ही दिया जाता है | यदि किसी कंपनी ने व्यापारिक साख की उधार सुविधा ले रखी है तो इसका अर्थ है बाजार में उसकी साख अच्छी है, जिससे बिक्री बढ़ेगी |

4. व्यापारिक साख की उधार सुविधा प्राप्त करने के लिए अपनी सम्पतियो को गिरवी नहीं रखना पड़ता है |

व्यापारिक साख की हानियाँ तथा सीमाएँ 

1. व्यापारिक साख के द्वारा सीमित कोष ही जुटाएँ जा सकते है |

2. कोई भी व्यवसाय इतनी आसानी से कोष मिलाने पर आपने व्यवसाय को बढाने की सोच सकता है जिससे उसका जोखिम बढ़ सकता है | 

लीज वितीयन

लीज एक ऐसा अनुबंध होता है जिसमें एक पक्ष दूसरे पक्ष को अपनी सम्पतियो को प्रयोग करने का अधिकार देता है जिसके बदले में वह वार्षिक या मासिक किराया लेता है | यह अपनी सम्पति को निश्चित समय के लिए किराये पर देने जैसा है | इसका प्रयोग कंपनी अपने आधुनिकीकरण तथा विविधीकरण के लिए करती है |

पट्टाकार :  सम्पति का मालिक पट्टाकार कहलाता है |

पट्टाधारक : वह व्यक्ति जो सम्पति किराये पर लेता है |

लीज वितीयन के गुण 

1. इसके कारण पट्टाधारक को सम्पति कम निवेश पर मिल जाती है |

2. ज्यादा कागजी कार्यवाही की आवश्यकता नहीं होती है |

3. इसके कारण व्यवसायी को अन्य जरूरतों के लिए ऋण लेने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता |

लीज वितीयन की हानियाँ 

1. हम सम्पति का प्रयोग लीज में लिखे शर्तो से हटकर नहीं कार सकते तथा उसमे कोई परिवर्तन नहीं कार सकते |

2. जिस सम्पति को किराये पर लिय गया है उसमे परिवर्तन न करने पर व्यवसाय प्रभावित हो सकता है |

 

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