Chapter Chapter 4. व्यावसायिक सेवाएँ Class 11 Business Study CBSE notes in hindi बैंकिंग - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 11 English Medium Business Study All Chapters:
Chapter 4. व्यावसायिक सेवाएँ
2. बैंकिंग
बैंकिंग
बैंकिंग व्यवसायिक सेवाओं का एक प्रकार है जो बैंको और बैंकिंग कंपनियों द्वारा जनता को प्रदान की जाती है | बैंकिंग कंपनी वह कंपनी है जो बेंकिंग का व्यापार करती है | यह ऋण देती है और जमा स्वीकार करती है | बैंक जमा के रूप में धन स्वीकार करती है और ऋण देती है जिसे मांगनें पर लौटना होता है |
भारतीय बैंक अधिनियम 1949 के अनुसार बैंकिंग का अर्थ है, ऋण देने अथवा विनियोग के लिए जनता से जमा स्वीकार करना |
बैंक: बैंक से अभिप्राय ऐसी संस्था से है जो मुद्रा का लेन - देन करती है तथा जमा के रूप में धन स्वीकार करती है और ऋण देती है जिसे मांगनें पर लौटना होता है | बैंक चेक, क्रेडिट कार्ड, ड्राफ्ट जैसी सुविधाएँ भी प्रदान करती है |
बैंको के प्रकार
वाणिज्यिक बैंक : वाणिज्यिक बैंक ऐसी संस्था है जो मुद्रा में लेन - देन करती है और जमा के रूप में धन स्वीकार करती है और ऋण देती है | ये बैंक मुख्य रूप से व्यवसायिक इकईयो को कई विशेष प्रकार सुविधाएँ प्रदान करती है जैसे - चेक सुविधा, धन का हस्तांतरण, बिलों का भुगतान, लॉकर सुविधा आदि |
सहकारी बैंक : सहकारी बैंक ऐसे बैंक होते है जो किसी विशेष समूह के लिए स्थापित किए जाते है | सहकारी बैंक राज्य सहकारी अधिनियम के प्रावधानों द्वारा शाशित होते है तथा यह अपने सदस्यों को सस्ती दरो पर ऋण मुहैया करते है | जैसे - किसान सहकारी बैंक |
विशिष्ट बैंक : विशिष्ट बैंक ऐसे बैंक होते है जो किसी विशेष उद्देश्यों, विशेष कार्यो तथा विशेष जरूरतों की पूर्ति के लिए बनाए जाते है | ये बैंक औद्योगिक इकईयो, भारी परियोजनाओं एवं विदेशी व्यापार को वितीय सहायता प्रदान करती है | जैसे - विशिष्ट विदेशी बैंक, विकास बैंक, औद्योगिक बैंक आदि |
केंद्रीय बैंक : किसी भी देश का केंद्रीय बैंक उस देश के सभी बैंको के कार्यो, नीतियों को देखता है | यह उस देश के मुद्रा तथा ऋण सम्बंधित सभी नीतियों को नियंत्रित करता है तथा निगरानी करता है |
वाणिज्यिक बैंक के प्रकार
1. सार्वजनिक क्षेत्र के वाणिज्यिक बैंक : सार्वजानिक क्षेत्र के बैंक वे बैंक होते है जिनमें सरकार का बड़ा हिस्सा होता है | ये सामाजिक उद्देश्यों पर ज़ोर देते है तथा लाभ कमाना इनका उद्देश्य नहीं होता है |
2. निजी क्षेत्र के वाणिज्यिक बैंक : निजी क्षेत्र के बैंक वे बैंक होते है जिनका स्वामित्व, नियंत्रण, प्रबंधन(manegment) निजी लोगो के हाथो में होता है |इनका उद्देश्य लाभ कमाना होता है |
वाणिज्यिक बैंको के कार्य
1. वाणिज्यिक बैंको का मुख्य कार्य जमा स्वीकार करना है |
2. वाणिज्यिक बैंको का कार्य जमा के माध्यम से प्राप्त धन का प्रयोग कर जरूरतमन्दो को ऋण देना भी है |
3. बैंक अपने ग्राहकों को चेक, ड्राफ्ट, क्रेडिट - डेबिट कार्ड जैसी कई प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध कराती है |
4. वाणिज्यिक बैंक का एक महत्वपूर्ण तथा विशेष कार्य अपने ग्राहकों को धन हस्तांतरण की सुविधा प्रदान करना है | धन का हस्तांतरण बैंक ड्राफ्ट, भुगतान आदेश(पेआर्डर ), डाक द्वारा किया जाता है |
5. वाणिज्यिक बैंक इनके अलावा कई प्रकार कि सहयोगी सेवाएँ जैसे बिलों का भुगतान, लॉकर की सुविधा आदि सुविधाएँ भी उपलब्ध करता है |
ई-बैंकिंग का अर्थ
इन्टरनेट बैंकिंग का अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति कम्प्यूटर के द्वारा इन्टरनेट पर बैंको के वेबसाइट से जुड़कर अपने बैंक से जुड़े कार्य कर सकता है तथा बैंको से जुड़े लाभ प्राप्त कार सकता है | इन्टरनेट पर बैंको की सेवाएँ प्रदान करनें को ही ई-बैंकिंग कहतें है |
ई-बैंकिंग से ग्राहकों को लाभ
(i) ई-बैंकिंग की सेवाएँ 24 घंटें 365 दिन अपनी सेवाएँ उपलब्ध कराता है |
(ii) ग्राहक ई-बैंकिंग का लाभ कही भी कभी भी ले सकतें है जिससे श्रम तथा समय की बचत होती है |
(iii) इससे प्रत्येक लेनदेन रजिस्टर हो जाता है इससे वितीय अनुशाशन आता है |
(iv) ई-बैंकिंग ग्राहकों की जोखिम को कम करता है क्योकि धन जमा करने के लिए बैंको में जाने की जरूरत नहीं होती है |
(v) ई-बैंकिंग अपने ग्राहकों को क्रेडिट तथा डेबिट कार्ड की सुविधा प्रदान करती है |
(vi) ई-बैंकिंग से कागजी कार्यवाही कम होती है |
ई-बैंकिंग से बैंको को लाभ
(i) ई-बैंकिंग बैंको के कार्यभार को कम करता है |
(ii) ई-बैंकिंग समय तथा श्रम की बचत करता है |
(iii) ई-बैंकिंग के के कारण बैंको का कार्यभार कम होता है जिससे बैंको में भीड़ कम होती है |
(iv) इससे बैंक की प्रतियोगी शक्ति बढ़ती है |
(v) ई-बैंकिंग से कागजी कारवाही कम होती है |
ई-बैंकिंग की हानियाँ तथा सीमाएँ
(i) ई-बैंकिंग के कारण हमारी जानकारियां गोपनीय नहीं रहती तथा कोई भी हमारी जानकारियों का दुरूपयोग कर सकता है |
(ii) ई-बैंकिंग की एक महत्वपूर्ण सीमा यह है की इसका प्रयोग करनें के लिए कम्प्यूटर कि जानकारी जैसी तकनीकी ज्ञान होना जरूरी है |
(iii) ई-बैंकिंग के प्रयोग के लिए कम्प्यूटर तथा इन्टरनेट का उपलब्ध होना जरूरी है |