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Chapter 6. जैव-प्रक्रम Class 10 Science CBSE notes in hindi श्वसन (Respiration) - CBSE Study

Chapter 6. जैव-प्रक्रम Science Class 10 cbse notes श्वसन (Respiration) in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter 6. जैव-प्रक्रम Class 10 Science CBSE notes in hindi श्वसन (Respiration) - CBSE Study

कक्षा 10 Science के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण 6. जैव-प्रक्रम को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक श्वसन (Respiration) को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Science में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 10 English Medium Science All Chapters:

6. जैव-प्रक्रम

3. श्वसन (Respiration)

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Peristalsis Movement (क्रमाकुंचन गति): आहारनाल की वह गति जिससे भोजन आहारनाल के एक भाग से दुसरे भाग तक पहुँचता है क्रमाकुंचन गति कहलाता है | 

श्वसन (Respiration) : 

भोजन प्रक्रम के दौरान हम जो खाद्य सामग्री ग्रहण करते है, इन खाद्य पदार्थों से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग कोशिकाओं में होता है | जीव इन ऊर्जा का उपयोग विभिन्न जैव प्रक्रमों में उपयोग करता है | 

(1) कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration) : ऊर्जा उत्पादन के लिए कोशिकाओं में भोजन के बिखंडन को कोशिकीय श्वसन कहते है | 

(2) श्वास लेना (Respiration) : श्वसन की यह क्रिया फेंफडे में होता होता है | जिसमें जीव ऑक्सीजन लेता है और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है |

विभिन्न जैव प्रक्रमों के लिए ऊर्जा : 

कोशिकाएं विभिन जैव प्रक्रमों के लिए ऊर्जा कोशिकीय श्वसन के दौरान भिन्न-भिन्न जीवों में भिन्न विधियों के द्वारा प्राप्त करती हैं |

(i) ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में : कुछ जीव जैसे यीस्ट किण्वन प्रक्रिया के समय ऊर्जा प्राप्त करने के लिए करता है |

इसका प्रवाह इस प्रकार है :

6 कार्बन वाला ग्लूकोज ⇒ तीन कार्बन अणु वाला पायरुवेट में बिखंडित होता है ⇒ इथेनॉल, कार्बन डाइऑक्साइड और ऊर्जा मुक्त होता है | 

चूँकि यह प्रक्रिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है इसलिए इसे अवायवीय श्वसन कहते हैं |  

(ii) ऑक्सीजन का आभाव में : अत्यधिक व्यायाम के दौरान अथवा अत्यधिक शारीरिक परिश्रम के दौरान हमारे शरीर की पेशियों में ऑक्सीजन का आभाव की स्थिति में होता है | जब शरीर में ऑक्सीजन की माँग की अपेक्षा पूर्ति कम होती है |  

इसका प्रवाह निम्न प्रकार होता है : 

6 कार्बन वाला ग्लूकोज ⇒ तीन कार्बन अणु वाला पायरुवेट में बिखंडित होता है ⇒ लैक्टिक अम्ल और ऊर्जा मुक्त होता है | 

(iii) ऑक्सीजन की उपस्थिति में: यह प्रक्रिया हमारी कोशिकाओं के माइटोकोंड्रिया में ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है | 

इसका प्रवाह निम्न प्रकार से होता है : 

6 कार्बन वाला ग्लूकोज ⇒ तीन कार्बन अणु वाला पायरुवेट में बिखंडित होता है ⇒ कार्बन डाइऑक्साइड, जल और अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा मोचित होता है | 

यह प्रक्रिया चूँकि ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है इसलिए इसे वायवीय श्वसन कहते हैं | 

विभिन्न पथों द्वारा ग्लूकोज का विखंडन का प्रवाह आरेख : 

 

वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration) : ग्लूकोज विखंडन की वह प्रक्रिया जो ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है उसे वायवीय श्वसन कहते हैं |

अवायवीय श्वसन (Anaroebic Respiration) : ग्लूकोज विखंडन की वह प्रक्रिया जो ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है उसे अवायवीय श्वसन कहते हैं |

वायवीय और अवायवीय श्वसन में अंतर : 

अवायवीय श्वसन 

1. इसमें 2 कार्बन अणु वाला ATP ऊर्जा उत्पन्न होती है।

2. यह प्रक्रम कोशिका द्रव्य में होता है। 

3. यह निम्नवर्गीय जीव जैसे यीस्ट कोशोकाओं में होता है | 

4. इस प्रकार की श्वसन क्रिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होती है।

5. इसमें ऊर्जा के साथ एथेनोल और कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त होता है | 

वायविय श्वसन : 

1. इसमें 3 कार्बन अणु वाला ATP ऊर्जा उत्पन्न होती है। 

2. यह प्रक्रम माइटोकॉड्रिया में होता है। 

3. ये सभी उच्चवर्गीय जीवों में पाया जाता हैं ।

4. इस प्रकार की श्वसन क्रिया ऑक्सीजन की उपस्थिति में होती हैं ।

5. इसमें ऊर्जा के साथ कार्बन डाइऑक्साइड और जल मुक्त होता है | 

ऊर्जा का उपभोग : कोशिकीय श्वसन द्वारा मोचित ऊर्जा तत्काल ही ए.टी.पी. (ATP) नामक अणु के संश्लेषण में प्रयुक्त हो जाती है जो कोशिका की अन्य क्रियाओं के लिए ईंधन की तरह प्रयुक्त होता है।

(i) ए.टी.पी. के विखंडन से एक निश्चित मात्रा में ऊर्जा मोचित होती है जो कोशिका के अंदर होने वाली आंतरोष्मि (endothermic) क्रियाओं का परिचालन करती है।

(ii) इस ऊर्जा का उपयोग शरीर विभिन्न जटिल अणुओं के निर्माण के लिए भी करता है जिससे प्रोटीन का संश्लेषण भी होता है | यह प्रोटीन का संश्लेषण शरीर में नए कोशिकाओं का निर्माण करता है | 

(iii) ए.टी.पी. का उपयोग पेशियों के सिकूड़ने, तंत्रिका आवेग का संचरण आदि अनेक क्रियाओं के लिए भी होता है।​

वायवीय जीवों में वायवीय श्वसन के लिए आवश्यक तत्व : 

(i) पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन ग्रहण करें | 

(ii) श्वसन कोशिकाएं वायु के संपर्क में हो |

श्वसन क्रिया और श्वास लेने में अंतर : 

श्वसन क्रिया :      
1. यह एक जटिल जैव रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें पाचित खाद्यो का ऑक्सिकरण होता है।
2. यह प्रक्रिया माइटोकॉड्रिया में होती हेै। 

3. इस प्रक्रिया से ऊर्जा का निर्माण होता है | 
श्वास लेना ​:
1. ऑक्सिजन लेने तथा कार्बन डाइऑक्साइड छोडने की प्रक्रिया को श्वास लेना कहते है।
2. यह प्रक्रिया फेफडे में होती है।

3. इससे ऊर्जा का निर्माण नहीं होता है | यह रक्त को ऑक्सीजन युक्त करता है और कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त करता है | 

विसरण : कोशिकाओं की झिल्लियों द्वारा कुछ चुने हुए गैसों का आदान-प्रदान होता है | इसी प्रक्रिया को विसरण कहते है | 

पौधों में विसरण की दिशा : 

विसरण की दिशा पर्यावरणीय अवस्थाओं तथा पौधे की आवश्यकता पर निर्भर करती है।

(i) पौधे रात्रि में श्वसन करते हैं : जब कोई प्रकाशसंश्लेषण की क्रिया नहीं हो रही है, कार्बन डाइऑक्साइड का निष्कासन करते है और ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं | 

(ii) पौधे दिन में प्रकाशसंश्लेषण की क्रिया करते है : श्वसन के दौरान निकली CO2 प्रकाशसंश्लेषण में प्रयुक्त हो जाती है अतः कोई CO2 नहीं निकलती है। इस समय ऑक्सीजन का निकलना मुख्य घटना है।

कठिन व्यायाम के समय श्वसन दर बढ़ जाती है : 

कठिन व्यायाम के समय श्वास की दर अधिक हो जाती है क्योंकि कठिन व्यायाम से कोशिकाओं में श्वसन क्रिया की दर बढ जाती है जिससे अधिक मात्रा में उर्जा का खपत होता है। ऑक्सिीजन की माँग कोशिकाओं में बढ जाती है और अधिक मात्रा में CO2 निकलने लगते है जिससे श्वास की दर अधिक हो जाती है।

 

 

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