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लोकतंत्र Class 9 Social Science [LATEST] Solutions Additional Questions with Answers in hindi - CBSE Study

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लोकतंत्र Class 9 Social Science [LATEST] Solutions Additional Questions with Answers in hindi - CBSE Study

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Class 9 English Medium Social Science All Chapters:

लोकतंत्र

2. Additional Questions with Answers

अध्याय 6. लोकतंत्र (Democracy)

Extra Questions with Answers

प्रश्न 1. लोकतंत्र से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: लोकतंत्र ऐसी शासन-व्यवस्था है जिसमें नागरिक शासन और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेते हैं। इसमें स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर लोगों की भागीदारी के लिए संस्थाएँ, नियम और प्रक्रियाएँ होती हैं। लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि पारदर्शिता, समानता, सहभागिता, समावेशन, जवाबदेही और विभिन्न विचारों के सम्मान पर भी आधारित है।

प्रश्न 2. लोकतंत्र के प्रमुख सिद्धांत कौन-कौन से हैं?

उत्तर: लोकतंत्र के प्रमुख सिद्धांत हैं—लोकप्रिय संप्रभुता, कानून का शासन, मौलिक अधिकार, शक्तियों का पृथक्करण, जवाबदेही और पारदर्शिता, बहुदलीय व्यवस्था, कमजोर समूहों का संरक्षण तथा भागीदारी और समावेशन।

प्रश्न 3. लोकप्रिय संप्रभुता (Popular Sovereignty) क्या है?

उत्तर: लोकप्रिय संप्रभुता का अर्थ है कि राज्य की सत्ता का अंतिम स्रोत जनता होती है। लोकतंत्र में सरकार की सत्ता जनता से प्राप्त होती है और नागरिक अपने प्रतिनिधियों को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों के माध्यम से चुनते हैं।

प्रश्न 4. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) क्या है?

उत्तर: प्रत्येक नागरिक जिसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक है, उसे बिना किसी भेदभाव के मतदान करने का अधिकार प्राप्त है। इसे सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार कहा जाता है। भारत में नागरिक गुप्त मतदान के माध्यम से अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं।

प्रश्न 5. लोकतंत्र में लोगों की भागीदारी क्यों आवश्यक है?

उत्तर: लोकतंत्र में सत्ता का अंतिम स्रोत जनता होती है। मतदान, सार्वजनिक चर्चा, स्थानीय संस्थाओं में भागीदारी और सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से नागरिक शासन और निर्णय लेने की प्रक्रिया में योगदान करते हैं। इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की भूमिका बनी रहती है।

प्रश्न 6. कानून का शासन (Rule of Law) क्या है?

उत्तर: कानून का शासन वह सिद्धांत है जिसके अनुसार प्रत्येक व्यक्ति कानून के अधीन होता है और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं होता। कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए तथा विवादों का समाधान कानून द्वारा निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।

प्रश्न 7. कानून का शासन लोकतंत्र के लिए क्यों आवश्यक है?

उत्तर: कानून का शासन नागरिकों को मनमानी कार्रवाई से सुरक्षा देता है। यह कानून के सामने समानता सुनिश्चित करता है, सत्ता के दुरुपयोग को रोकने में सहायता करता है और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है। इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्याय, जवाबदेही और विश्वास मजबूत होते हैं।

प्रश्न 8. “कानून के सामने समानता” से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: इसका अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति, चाहे उसकी स्थिति, पहचान या पद कुछ भी हो, कानून द्वारा समान रूप से व्यवहार का अधिकारी है। किसी व्यक्ति को उसकी सामाजिक स्थिति या प्रभाव के आधार पर कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता।

प्रश्न 9. “कानून का समान संरक्षण” क्या है?

उत्तर: समान संरक्षण का अर्थ है कि समान परिस्थितियों में सभी व्यक्तियों के साथ कानून द्वारा समान व्यवहार किया जाए और मनमाना भेदभाव न किया जाए।

प्रश्न 10. भारतीय संविधान में कितने मौलिक अधिकार हैं?

उत्तर: भारतीय संविधान में छह मौलिक अधिकार हैं:

  • समानता का अधिकार — अनुच्छेद 14–18
  • स्वतंत्रता का अधिकार — अनुच्छेद 19–22
  • शोषण के विरुद्ध अधिकार — अनुच्छेद 23–24
  • धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार — अनुच्छेद 25–28
  • सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार — अनुच्छेद 29–30
  • संवैधानिक उपचार का अधिकार — अनुच्छेद 32

प्रश्न 11. मौलिक अधिकार लोकतंत्र के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?

उत्तर: मौलिक अधिकार नागरिकों के अधिकारों, स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा करते हैं। इनके उल्लंघन की स्थिति में नागरिक न्यायालयों से संवैधानिक उपचार प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार ये लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की स्वतंत्रता और अधिकारों की सुरक्षा करते हैं।

प्रश्न 12. अनुच्छेद 21 किससे संबंधित है?

उत्तर: अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा से संबंधित है। इसके अनुसार किसी व्यक्ति को जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जा सकता है।

प्रश्न 13. अनुच्छेद 21A का क्या महत्त्व है?

उत्तर: अनुच्छेद 21A के अंतर्गत 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है। इसे 2009 में जोड़ा गया।

प्रश्न 14. शक्तियों का पृथक्करण (Separation of Powers) क्या है?

उत्तर: शक्तियों का पृथक्करण शासन की शक्तियों को विभिन्न अंगों में बाँटने की व्यवस्था है। विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका कानूनों को लागू करती है और न्यायपालिका कानूनों तथा संविधान की व्याख्या करती है। इससे सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण को रोकने में सहायता मिलती है।

प्रश्न 15. शासन के तीन प्रमुख अंग कौन-कौन से हैं?

उत्तर:

  • विधायिका: कानून बनाती है।
  • कार्यपालिका: कानूनों को लागू करती है।
  • न्यायपालिका: कानूनों और संविधान की व्याख्या करती है।

प्रश्न 16. Checks and Balances से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: Checks and Balances का अर्थ ऐसी व्यवस्था से है जिसमें शासन की विभिन्न संस्थाएँ एक-दूसरे की शक्तियों और कार्यों पर नियंत्रण एवं संतुलन बनाए रखती हैं। इसका उद्देश्य सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण को रोकना है।

प्रश्न 17. न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) क्या है?

उत्तर: न्यायिक समीक्षा के माध्यम से न्यायपालिका सरकारी कार्यों और कानूनों की संवैधानिकता की जाँच कर सकती है। यदि कोई कानून संविधान के अनुरूप नहीं है, तो न्यायपालिका उसके संबंध में संवैधानिक निर्णय दे सकती है।

प्रश्न 18. जनहित याचिका (PIL) क्या है?

उत्तर: जनहित याचिका (Public Interest Litigation) सार्वजनिक हित से संबंधित मामलों को न्यायालय के समक्ष लाने का एक माध्यम है। यह सार्वजनिक हित के मुद्दों पर न्यायिक प्रक्रिया तक पहुँच में सहायता करती है।

प्रश्न 19. लोकतांत्रिक सरकार की जवाबदेही से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: लोकतांत्रिक सरकार जनता के प्रति अपने कार्यों के लिए जवाबदेह होती है। चुनाव, सार्वजनिक बहस, मीडिया, नागरिक समाज और विभिन्न संस्थागत व्यवस्थाएँ सरकार के कार्यों की जाँच और समीक्षा में सहायता करती हैं।

प्रश्न 20. पारदर्शिता (Transparency) लोकतंत्र में क्यों आवश्यक है?

उत्तर: पारदर्शिता से नागरिकों को सरकारी कार्यों और निर्णयों के बारे में जानकारी प्राप्त करने में सहायता मिलती है। इससे सरकार के कार्यों की समीक्षा और जवाबदेही को मजबूत किया जा सकता है।

प्रश्न 21. सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 क्या है?

उत्तर: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को सरकारी विभागों और सार्वजनिक प्राधिकरणों से जानकारी प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। यह पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक शासन को मजबूत करने में सहायता करता है।

प्रश्न 22. RTI Act के निर्माण में किन लोगों और संस्थाओं की भूमिका रही?

उत्तर: अध्याय के अनुसार नागरिकों, पत्रकारों, नागरिक समाज समूहों और निर्वाचित प्रतिनिधियों ने पारदर्शिता और जवाबदेही से संबंधित चिंताओं को उठाया। प्रस्ताव पर विशेषज्ञ समूहों ने विचार किया, संसद में बहस हुई और विभिन्न हितधारकों से परामर्श के बाद कानून को अंतिम रूप दिया गया।

प्रश्न 23. संसद का Question Hour क्या है?

उत्तर: Question Hour संसदीय सत्र का वह समय है जब सदस्य सरकार से प्रश्न पूछते हैं। इससे सरकार के कार्यों की जाँच करने और उसे जवाबदेह बनाए रखने में सहायता मिलती है।

प्रश्न 24. बहुदलीय व्यवस्था (Multi-Party System) क्या है?

उत्तर: ऐसी राजनीतिक व्यवस्था जिसमें अनेक राजनीतिक दल चुनावों में भाग लेते हैं और विभिन्न सामाजिक, क्षेत्रीय, राजनीतिक तथा वैचारिक हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं, बहुदलीय व्यवस्था कहलाती है। भारत में बहुदलीय व्यवस्था है।

प्रश्न 25. लोकतंत्र में कमजोर एवं वंचित समूहों की सुरक्षा क्यों आवश्यक है?

उत्तर: लोकतंत्र में सभी नागरिकों और समुदायों के अधिकारों की रक्षा आवश्यक है। जाति, लिंग, धर्म या क्षेत्र के आधार पर किसी समूह के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। कमजोर समूहों की सुरक्षा लोकतांत्रिक समानता और समावेशन को मजबूत करती है।

प्रश्न 26. अनुच्छेद 46 का क्या महत्त्व है?

उत्तर: अनुच्छेद 46 राज्य को समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देने तथा उन्हें सामाजिक अन्याय और शोषण से बचाने का निर्देश देता है।

प्रश्न 27. प्रतिनिधि लोकतंत्र (Representative Democracy) क्या है?

उत्तर: प्रतिनिधि लोकतंत्र में नागरिक अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं और चुने हुए प्रतिनिधि उनकी ओर से शासन तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेते हैं। भारत प्रतिनिधि लोकतंत्र का उदाहरण है।

प्रश्न 28. प्रत्यक्ष लोकतंत्र (Direct Democracy) क्या है?

उत्तर: प्रत्यक्ष लोकतंत्र में नागरिक महत्वपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रिया में सीधे भाग लेते हैं। अध्याय में स्विट्जरलैंड को प्रत्यक्ष लोकतंत्र के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

प्रश्न 29. संसदीय लोकतंत्र और राष्ट्रपतिात्मक लोकतंत्र में क्या अंतर है?

उत्तर: संसदीय लोकतंत्र में कार्यपालिका के सदस्य विधायिका का हिस्सा होते हैं और उसके प्रति जवाबदेह रहते हैं। राष्ट्रपतिात्मक लोकतंत्र में कार्यपालिका विधायिका से स्वतंत्र होती है और राष्ट्रपति सरकार का प्रमुख होता है। अध्याय में भारत को संसदीय लोकतंत्र और संयुक्त राज्य अमेरिका को राष्ट्रपतिात्मक लोकतंत्र के उदाहरण के रूप में बताया गया है।

प्रश्न 30. संघवाद (Federalism) क्या है?

उत्तर: संघवाद ऐसी शासन-व्यवस्था है जिसमें शक्तियाँ सरकार के विभिन्न स्तरों के बीच बाँटी जाती हैं। भारत में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया है।

प्रश्न 31. भारत में विधायी शक्तियों का विभाजन किन सूचियों के माध्यम से किया गया है?

उत्तर: भारत में विधायी शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों के माध्यम से किया गया है—संघ सूची (Union List), राज्य सूची (State List) और समवर्ती सूची (Concurrent List)।

प्रश्न 32. सहभागी लोकतंत्र (Participatory Democracy) क्या है?

उत्तर: सहभागी लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी केवल चुनावों तक सीमित नहीं रहती। नागरिक स्थानीय परिषदों, सार्वजनिक परामर्श, सामुदायिक पहलों, ग्राम सभाओं और नागरिक संगठनों के माध्यम से नीतियों और शासन से जुड़े कार्यों में भाग लेते हैं।

प्रश्न 33. भारत में तीन-स्तरीय शासन व्यवस्था कौन-सी है?

उत्तर: भारत में शासन के तीन प्रमुख स्तर हैं:

  • केंद्र सरकार
  • राज्य सरकार
  • स्थानीय सरकार

प्रश्न 34. ग्रामीण और शहरी स्थानीय सरकारों में क्या अंतर है?

उत्तर: ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाएँ स्थानीय शासन का कार्य करती हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में नगरपालिकाएँ स्थानीय शासन की संस्थाएँ हैं। दोनों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर शासन और नागरिक भागीदारी को बढ़ाना है।

प्रश्न 35. ग्राम सभा का लोकतंत्र में क्या महत्त्व है?

उत्तर: ग्राम सभा ग्रामीण स्तर पर लोगों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर देती है। यह जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करती है और स्थानीय मुद्दों पर समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देती है।

प्रश्न 36. PESA Act, 1996 क्या है?

उत्तर: PESA Act, 1996 अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज के सिद्धांतों का विस्तार करता है। इसके अंतर्गत ग्राम सभा को स्थानीय निर्णय लेने की प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण भूमिका दी गई है।

प्रश्न 37. नागरिक समाज (Civil Society) लोकतंत्र को कैसे मजबूत करता है?

उत्तर: नागरिक समाज में स्वैच्छिक समूह, NGOs और सामुदायिक संगठन शामिल होते हैं। ये नागरिकों और राज्य के बीच सेतु का कार्य करते हैं। जनहित याचिका, अभियान और सामुदायिक संगठनों के माध्यम से वे लोकतंत्र को अधिक समावेशी और उत्तरदायी बनाने में सहायता करते हैं।

प्रश्न 38. मीडिया लोकतंत्र में क्या भूमिका निभाता है?

उत्तर: मीडिया नागरिकों को जानकारी देता है और सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा का मंच प्रदान करता है। समाचार पत्र, टेलीविजन समाचार और सोशल मीडिया नागरिकों को विभिन्न मुद्दों से अवगत कराने में सहायता करते हैं। जिम्मेदार मीडिया उपयोग लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत कर सकता है।

प्रश्न 39. सोशल मीडिया लोकतंत्र को कैसे कमजोर कर सकता है?

उत्तर: यदि सोशल मीडिया का उपयोग गैर-जिम्मेदारी से किया जाए और गलत या अप्रमाणित जानकारी फैलायी जाए, तो इससे भ्रम पैदा हो सकता है, जनमत प्रभावित हो सकता है और कभी-कभी संघर्ष की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। इसलिए सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करने से पहले उसकी प्रामाणिकता पर ध्यान देना आवश्यक है।

प्रश्न 40. भारत में महिलाओं को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार कब प्राप्त हुआ?

उत्तर: भारत में संविधान के लागू होने के साथ 1950 में पुरुषों और महिलाओं को बिना भेदभाव के सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्राप्त हुआ।

प्रश्न 41. केवल मतदान का अधिकार महिलाओं की समान राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित क्यों नहीं करता?

उत्तर: मतदान का अधिकार राजनीतिक भागीदारी का एक महत्त्वपूर्ण साधन है, लेकिन सामाजिक पूर्वाग्रह और अन्य सामाजिक परिस्थितियाँ महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और भागीदारी को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए समान राजनीतिक भागीदारी के लिए केवल मतदान का अधिकार पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

प्रश्न 42. पंचायतों में महिलाओं के आरक्षण से संबंधित कौन-सा अनुच्छेद है?

उत्तर: पंचायतों में महिलाओं के आरक्षण से संबंधित प्रावधान अनुच्छेद 243D में है। इसके अनुसार प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष चुनाव से भरी जाने वाली सीटों में कम-से-कम एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

प्रश्न 43. नगरपालिकाओं में महिलाओं के आरक्षण से संबंधित कौन-सा अनुच्छेद है?

उत्तर: नगरपालिकाओं में महिलाओं के आरक्षण से संबंधित प्रावधान अनुच्छेद 243T में है। इसमें प्रत्यक्ष चुनाव से भरी जाने वाली सीटों में कम-से-कम एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है।

प्रश्न 44. लोकतंत्र की प्रमुख चुनौतियाँ कौन-कौन सी हैं?

उत्तर: अध्याय में निरक्षरता, गलत सूचना, असमानता, गरीबी, क्षेत्रवाद, लैंगिक असमानता, सामाजिक भेदभाव तथा कानूनों और नीतियों के क्रियान्वयन में अंतर जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया गया है।

प्रश्न 45. गलत सूचना लोकतंत्र के लिए चुनौती क्यों है?

उत्तर: गलत सूचना लोगों की समझ को प्रभावित कर सकती है और जनमत में भ्रम पैदा कर सकती है। सोशल मीडिया के माध्यम से गलत जानकारी तेजी से फैल सकती है। इसलिए लोकतांत्रिक नागरिकों के लिए सही और प्रामाणिक जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है।

प्रश्न 46. 1975–77 के आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल लगाया गया। इसके दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और अनेक राजनीतिक नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गंभीर दबाव पड़ा और नागरिक स्वतंत्रताएँ सीमित हुईं।

प्रश्न 47. जयप्रकाश नारायण का 1975–77 के संदर्भ में क्या उल्लेख है?

उत्तर: अध्याय में जयप्रकाश नारायण, जिन्हें लोकनायक कहा जाता है, के नेतृत्व में विशेष रूप से बिहार और गुजरात में हुए जन आंदोलनों का उल्लेख किया गया है। ये आंदोलन उस समय के राजनीतिक और सामाजिक असंतोष के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण थे।

प्रश्न 48. 1977 में आपातकाल के बाद क्या हुआ?

उत्तर: 1977 में आपातकाल समाप्त हुआ और आम चुनाव कराए गए। लोगों ने मतदान के माध्यम से अपनी राजनीतिक इच्छा व्यक्त की। अध्याय इस घटना को भारतीय लोकतंत्र में नागरिक भागीदारी और संवैधानिक सुरक्षा उपायों के महत्त्व से जोड़ता है।

प्रश्न 49. लोकतंत्र में एक युवा नागरिक की क्या जिम्मेदारियाँ हैं?

उत्तर: युवा नागरिकों को लोकतंत्र और संविधान को समझना चाहिए, प्रामाणिक जानकारी प्राप्त करनी चाहिए, मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करना चाहिए, मौलिक कर्तव्यों का पालन करना चाहिए, दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए तथा विद्यालय और समुदाय की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए।

प्रश्न 50. लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित क्यों नहीं है?

उत्तर: लोकतंत्र में चुनाव नागरिकों की भागीदारी का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम हैं, लेकिन लोकतांत्रिक जीवन में पारदर्शिता, जवाबदेही, कानून का शासन, मौलिक अधिकार, सार्वजनिक चर्चा, स्थानीय भागीदारी, नागरिक समाज और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार भी आवश्यक हैं। इसलिए लोकतंत्र एक निरंतर प्रक्रिया है जो रोजमर्रा के नागरिक जीवन में भी दिखाई देती है।

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