प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ Class 9 Social Science [LATEST] Solutions NCERT Textbook Questions & Answers in hindi - CBSE Study
NCERT Solutions for Class 9 Social Science are carefully prepared according to the latest CBSE syllabus and NCERT textbooks to help students understand every concept clearly. These solutions cover all important प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ with detailed explanations and step-by-step answers for better exam preparation. Each NCERT Textbook Questions & Answers is explained in simple language so that students can easily grasp the fundamentals and improve their academic performance. The study material is designed to support daily homework, revision practice, and final exam preparation for Class 9 students. With accurate answers, concept clarity, and structured content, these NCERT solutions help learners build confidence and score higher marks in their examinations. Whether you are revising a specific topic or preparing an entire chapter, this resource provides reliable and syllabus-based guidance for complete success in Social Science.
Class 9 English Medium Social Science All Chapters:
प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ
3. NCERT Textbook Questions & Answers
अध्याय 4. प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ
NCERT पाठ्यपुस्तक प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. क्या आपको लगता है कि मनुष्यों द्वारा खेती शुरू करने के बाद जीवन आसान हो गया या अधिक चुनौतीपूर्ण? अपने उत्तर के लिए दो कारण दीजिए।
उत्तर: मनुष्यों द्वारा खेती शुरू करने के बाद जीवन कुछ मायनों में आसान हुआ, लेकिन साथ ही नई चुनौतियाँ भी उत्पन्न हुईं।
पहला कारण: खेती के कारण मनुष्य नियमित रूप से भोजन का उत्पादन करने लगा। वह अनाज उगाकर उसे संग्रहित कर सकता था, जिससे भोजन की उपलब्धता अधिक नियंत्रित हुई।
दूसरा कारण: खेती के कारण मनुष्य को एक स्थान पर रहकर फसलों और पालतू पशुओं की देखभाल करनी पड़ती थी। वह मौसम, वर्षा, पानी की उपलब्धता, फसल खराब होने और कीटों जैसी परिस्थितियों पर अधिक निर्भर हो गया। इसलिए खेती ने स्थायी जीवन के अवसर दिए, लेकिन नई जिम्मेदारियाँ और चुनौतियाँ भी पैदा कीं।
प्रश्न 2. पर्यावरण मानव समाजों को अवसरों के साथ-साथ चुनौतियाँ भी प्रदान करता है। प्रारम्भिक कृषि समुदायों और नदी-घाटी सभ्यताओं के संदर्भ में समझाइए।
उत्तर: पर्यावरण ने प्रारम्भिक मानव समाजों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपजाऊ भूमि और जल की उपलब्धता ने कृषि के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान कीं। नदियों के आसपास की भूमि खेती के लिए उपयोगी थी और नदियों से जल प्राप्त होता था।
लेकिन नदियों और प्राकृतिक पर्यावरण ने कुछ चुनौतियाँ भी उत्पन्न कीं। बाढ़, जल की अनियमित उपलब्धता तथा बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों से निपटने के लिए मानव समाजों को जल प्रबंधन की तकनीक विकसित करनी पड़ी। मेसोपोटामिया में बाँधों और नहरों का निर्माण तथा विभिन्न नदी-घाटी सभ्यताओं में जल के प्रबंधन के प्रयास इसी आवश्यकता से जुड़े थे।
इस प्रकार पर्यावरण ने एक ओर कृषि, बस्तियों और सभ्यताओं के विकास के लिए संसाधन उपलब्ध कराए, वहीं दूसरी ओर मानव समाजों को प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलन और तकनीकी विकास के लिए प्रेरित किया।
प्रश्न 3. इतिहासकार प्रारम्भिक मानव इतिहास को पाषाण युग, कांस्य युग और लौह युग जैसे विभिन्न युगों में क्यों बाँटते हैं? यह वर्गीकरण मानव प्रगति के बारे में क्या बताता है?
उत्तर: इतिहासकार प्रारम्भिक मानव इतिहास को अलग-अलग युगों में मुख्यतः तकनीकी विकास, औजारों के निर्माण और उपयोग, कृषि की शुरुआत तथा मानव जीवन और बस्तियों में हुए परिवर्तनों के आधार पर बाँटते हैं।
उदाहरण के लिए, पाषाण युग में पत्थर के औजारों का व्यापक उपयोग हुआ। बाद में ताम्रपाषाण काल में पत्थर के साथ तांबे का उपयोग शुरू हुआ। कांस्य युग में तांबे और टिन को मिलाकर कांस्य बनाने की तकनीक विकसित हुई तथा नगरों, व्यापार और प्रारम्भिक सभ्यताओं का विस्तार हुआ। लौह युग में लोहे के व्यापक उपयोग से अधिक मजबूत औजार और हथियार बनाए जाने लगे।
यह वर्गीकरण बताता है कि मानव समाजों में तकनीक, कृषि, शिल्प, व्यापार, बस्तियों और सामाजिक संगठन में धीरे-धीरे परिवर्तन और विकास हुआ। यह मानव प्रगति को समझने के लिए एक उपयोगी ऐतिहासिक ढाँचा प्रदान करता है।
प्रश्न 4. कल्पना कीजिए कि आप एक नवपाषाण किसान हैं। अपने जीवन के एक दिन का वर्णन कीजिए। ऐसी कौन-सी चुनौतियाँ होंगी जिनका सामना एक शिकारी-संग्राहक को नहीं करना पड़ता?
उत्तर: मैं एक नवपाषाण किसान के रूप में सुबह अपने खेतों की जाँच से दिन की शुरुआत करूँगा। मैं देखूँगा कि फसल को पर्याप्त पानी मिल रहा है या नहीं और खेत में खरपतवार या कीट तो नहीं हैं। इसके बाद खेत की देखभाल, मिट्टी की तैयारी और फसल से संबंधित कार्य करूँगा। मुझे अपने पालतू पशुओं को भी भोजन और पानी देना होगा। दिन के अन्य समय में अनाज को सुरक्षित रखना, भोजन तैयार करना, मिट्टी के बर्तन बनाना या बुनाई जैसे कार्य किए जा सकते हैं।
एक किसान के रूप में मुझे ऐसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा जो शिकारी-संग्राहक के जीवन में उसी रूप में नहीं थीं। मुझे एक स्थान पर रहकर खेतों और पशुओं की लगातार देखभाल करनी होगी। फसल के लिए वर्षा और पानी पर निर्भरता, मौसम में बदलाव, कीटों तथा फसल खराब होने का खतरा भी रहेगा। इसके अलावा भोजन के भंडारण और स्थायी बस्ती की व्यवस्था बनाए रखना भी आवश्यक होगा।