6. नगर, व्यापारी और शिल्पिजन Class 7 History [LATEST] Solutions अभ्यास in Hindi - CBSE Study
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Class 7 English Medium History All Chapters:
6. नगर, व्यापारी और शिल्पिजन
2. अभ्यास
अभ्यास - प्रश्न:
प्रश्न: रिक्त स्थानों की पूर्ति करें:
(क) राजराजेश्वर मंदिर ____________ में बनाया गया था|
(ख) अजमेर सूफी संत _____________ से संबंधित है|
(ग) हम्पी _______________ साम्राज्य की राजधानी थी|
(घ) हॉलैंडवासियों ने आंध्र प्रदेश में ______________ पर अपनी बस्ती बसाई|
उत्तर:
(क) तंजावूर
(ख) ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती
(ग) विजयनगर
(घ) मसूलीपट्टनम
प्रश्न: बताएँ क्या सही हैं और क्या गलत:
(क) हम राजराजेश्वर मंदिर के मूर्तिकार (स्थापति) का नाम एक शिलालेख से जानते हैं|
(ख) सौदागर लोग काफ़िलों में यात्रा करने की बजाय अकेले यात्रा करना अधिक पसंद करते थे|
(ग) काबुल हाथियों के व्यापार का मुख्य केंद्र था|
(घ) सूरत बंगाल की खाड़ी पर स्थित एक महत्त्वपूर्ण व्यापारिक पत्तन था|
उत्तर:
(क) सही
(ख) गलत
(ग) गलत
(घ) सही
प्रश्न: तंजावूर नगर को जल की आपूर्ति कैसे की जाती थी?
उत्तर: तंजावूर नगर को बारहमासी नदी कावेरी से जल की आपूर्ति की जाती थी| कुओं और तालाबों से भी शहर में जल की आपूर्ति की जाती है|
प्रश्न: मद्रास जैसे बड़े नगरों में स्थित 'ब्लैक टाउन' में कौन रहता था?
उत्तर: मद्रास स्थित ब्लैक टाउन में देशी व्यापारी, शिल्पकार, व्यवसायी और दस्तकार जैसे लोग रहते थे|
प्रश्न: आपके विचार से मंदिरों के आस-पास नगर क्यों विकसित हुए?
उत्तर: मंदिरों के आस-पास नगर विकसित होने के निम्न कारण थे|
(i) मंदिर प्राय: अर्थव्यवस्था और समाज के केंद्र होते थे|
(ii) मंदिरों का निर्माण करवाने वाले राजा बड़े धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भूमि और धन दान करते थे, साथ-ही साथ यात्रियों और पुरोहितों का पेट पालते थे|
(iii) पुरोहित, कामगार, शिल्पी और व्यापारी|
प्रश्न: मंदिरों के निर्माण तथा उसके रख रखाव के लिए शिल्पिजन कितने महत्त्वपूर्ण थे?
उत्तर:
1. मंदिरों के निर्माण के लिए शिल्पी काफी महह्त्व्पूर्ण थे - शिल्पियों में सुनार, कसेरे, लोहार, राजमिस्त्री और बढ़ी शामिल थे|
2. शिल्पकार मंदिरों को संदुर बनाने में काफी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते थे| शिल्पकार ही मंदिरों के विभिन्न भागों को निर्मित करते थे|
3. मंदिरों को कलात्मक रूप से सजाने का कार्य शिल्पकार ही करते थे|
प्रश्न: लोग दूर - दूर करे देशों - प्रदेशों में सूरत क्यों आते थे?
उत्तर: सूरत नगर में लोगों के दूर - दूर प्रदेशों से आने के कारण -
1. सूरत अरब सागर के तट पर्स थित एक बंदरगाह नगर था, जहाँ से पश्चिमी एशिया के देशों से व्यापार होता था|
2. सूरत को मक्का का प्रस्थान द्वारा भी कहा जाता था, क्योंकि संख्या बहुत से हज यात्री जहाज से कहीं से रवाना होते थे|
3. सूरत शिल्प उद्योग का प्रमुख केंद्र था, जिससे काफी संख्या में लोगों को रोजगार मिला हुआ था|
4. सूरत एक व्यापारिक नगर था, जहाँ पर कई वस्तुओं के थोक और फुटकर बाज़ार थे|
प्रश्न: कलाल्त्ता जैसे नगरों में शिल्प उत्पादन तंजावूर जैसे नगरों के शिल्प उत्पादन से किस प्रकार भिन्न था?
उत्तर: तंजावूर कलकत्ता से पहले का विकसित नगर हैं, इसलिए तंजावूर में शिल्प का उत्पादन कलकत्ता से पहले हो गया था| सोनों नगरों में शिल्प उत्पादन में काफी भिन्नता थी -
1. कलकत्ता में मुख्यत: शिल्प उत्पादन सूती, रेशमी व जूट उत्पादन तक सिमित था|
2. तंजावूर में सूती वस्त्रों के अतिरिक्त कांस्य मूर्तियों, धातु के दीपदान, मदिरों के घंटे, आभूषणों आदि का निर्माण बड़े पैमाने पर होता था, क्योंकि तंजावूर एक मंदिर नगर था|
प्रश्न: इस अध्याय में वार्णित किसी एक नगर की तुलना आप, अपने परिचित किसी कसबे या गाँव से करे| क्या दोनों के बीच कोई समानता या अंतर हैं?
उत्तर: सूरत (नगर) और टोकरी (कास्बा) की तुलना:
सूरत:
(i) सूरत एक व्यापारिक नगर हैं| यहाँ पर लोगों को आवश्यकता की अधिकाँश वस्तुएंप्राप्त हो जाती हैं|
(ii) सूरत एक महानगर हैं जिसकी आबादी 28 लाख से रूप में विकसित हो जुका हैं|
टेकारी (गया) बिहार:
(i) टेकारी एक छोटा - सा कस्बा हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों की आवश्यकता की पूर्ति करता हैं|
(ii) टेकारी की आब्दी 20,000 से भी कम हैं|
(iii) टेकारी ग्रामीण क्षेत्र का एक प्रखंड हैं|
प्रश्न: सौदागरों को किन - किन समस्याओं का सामना करना पड़ता था? आपके विचार से क्या वैसी कुछ समस्याएँ आज भी बनी हुई हैं?
उत्तर: सौदागरों को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता था -
1. व्यापारियों को अनेक राज्यों तथा जंगलों में से होकर गुजरना पड़ता था, इसलिए वे आमतौर पर काफिले बनाकर एक साथ यात्रा करते थे|
2. सौदागर अपने हितों की रक्षा के लिए व्यापार संघ (गिल्ड) बनाते थे|
3. उन्हें विभिन्न प्रकार के कर चुकाने पड़ते थे|
4. प्राचीन व मध्यकाल में यातयात के रूप में बैलगाड़ी, घोदागादी, नावे आदि प्रमुख थे| अर्थात यातायात के साधन भी पर्याप्त मात्रा में नहीं थे|
वर्तमान संत में भी सौदागरों को व्यापार संघ बनाने पड़ते हैं| उन्य्हें विभिन्न कर चुकाने पड़ते हैं तथा व्यापार के लिए दूर - दूर तक यात्राएँ करनी पड़ती हैं|
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