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6. जैव-प्रक्रम Class 10 Science [LATEST] Solutions पाठगत-प्रश्न in Hindi - CBSE Study

6. जैव-प्रक्रम Science Class 10 exercise - [LATEST] Solutions पाठगत-प्रश्न cbse board school study materials like cbse notes in Hindi medium, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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6. जैव-प्रक्रम Class 10 Science [LATEST] Solutions पाठगत-प्रश्न in Hindi - CBSE Study

NCERT Solutions for Class 10 Science are carefully prepared according to the latest CBSE syllabus and NCERT textbooks to help students understand every concept clearly. These solutions cover all important 6. जैव-प्रक्रम with detailed explanations and step-by-step answers for better exam preparation. Each पाठगत-प्रश्न is explained in simple language so that students can easily grasp the fundamentals and improve their academic performance. The study material is designed to support daily homework, revision practice, and final exam preparation for Class 10 students. With accurate answers, concept clarity, and structured content, these NCERT solutions help learners build confidence and score higher marks in their examinations. Whether you are revising a specific topic or preparing an entire chapter, this resource provides reliable and syllabus-based guidance for complete success in Science.

Class 10 English Medium Science All Chapters:

6. जैव-प्रक्रम

2. पाठगत-प्रश्न

अध्याय - 6 जैव प्रक्रम


Page : 105

Q1. हमारे जैसे बहुकोशिकीय जीवों में ऑक्सीजन की आवश्यकता पूरी करने में विसरण क्यों अपर्याप्त है?

उत्तर : विसरण क्रिया द्वारा बहुकोशिकीय जीवो में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन शरीर के प्रत्येक अंग में नहीं पहुचाय जा सकती है | बहुकोशिकीय जीवो में ऑक्सीजन बहुत आवश्यक होता है | बहुकोशिकीय जीवो की संरचना अति जटिल होती है | अतः प्रत्येक अंग को ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है | जो विसरण क्रिया नहीं पूरी कर सकती है | 

Q2. कोई वस्तु सजीव है, इसका निर्धरण करने के लिए हम किस मापदंड का उपयोग करेंगे?

उत्तर : सजीव वस्तुए निरंतर गति करती रहती है | चाहे वे सुप्त अवस्था में ही हो | बाह्य रूप से वे अचेत दिखाई देते है | उनके अणु गतिशील रहते है | इससे उनके जीवित होने का प्रमाण मिलता है |  

Q3. किसी जीव द्वारा किन कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है?

उत्तर : जीवो को शारीरिक वृद्धि के लिए बाहर से अतिरिक्त कच्ची सामग्री की आवश्यकता होती है | पृथ्वी पर जीवन कार्बन अणुओं पर आधारित है | अतः यह खाद्य पदार्थ कार्बन पर निर्भर है | ये कार्बनिक यौगिक भोजन का ही अन्य रूप है | इनमे ऑक्सीजन व कार्बन - डाइआक्साइड का आदान - प्रदान प्रमुख है | इसके अतिरिक्त जल व खनिज लवण अन्य है | हरे - पौधे इन कच्चे पदार्थ साथ सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में स्टार्च का निर्माण होता है |

Q4. जीवन के अनुरक्षण के लिए आप किन प्रक्रमों को आवश्यक मानेंगे ?

उत्तर : अनेक जैविक क्रियाएँ जीवन के अनुरक्षण के लिए आवश्यक है जैसे : पोषण , गति , श्वसन , वृद्धि एवं उत्सर्जन |  

Page : 111 

Q1. स्वयंपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में क्या अंतर है?

उत्तर : 

स्वयंपोषी पोषण :- जब हरे पादप अपना भोजन कलोरोफील तथा सूर्य की प्रकाश की उपस्थिति में , CO2 तथा जल का प्रयोग करते हुए स्वयं निर्मित करते हैं| इस क्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं|

विषमपोषी पोषण :- जब जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते हैं बल्कि अपने भोजन के लिए दूसरे पर निर्भर होते हैं, तब वे विषमपोशी कहलाते हैं| उदाहरण के लिए कवक, मानव| 

Q2. प्रकाशसंश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री पौधा कहाँ से प्राप्त करता है?

उत्तर : जल - पौधे की जडे भूमि से जल प्राप्त करती है | 

कार्बन - डाइआक्साइड - पौधे इसे वायुमंडल से रंध्रो द्वारा प्राप्त करते हैं |

क्लोरोफिल - हरे पत्तो में क्लोरोप्लास्ट होता है , जिसमे क्लोरोफिल मौजूद होता है |

सूर्य का प्रकाश - सूर्य द्वारा इसे प्राप्त करते है |  
Q3. हमारे आमाशय में अम्ल की भूमिका क्या है?

उत्तर : हमारे आमाशय में हाईडरोक्लोरिक अम्ल उपस्थित होता है |यह अम्ल अमाशय में अम्लीय माध्यम का निर्माण करता है | इसी की मदद से एंजाइम अपना कार्य करता है | HCl अम्ल हमारे भोजन में उपस्थित रोगाणुओं को नष्ट कर देता है |  HCl अम्ल आमाशय में भोजन को पचाने में सहायता करता है |  
Q4. पाचक एंजाइमों का क्या कार्य है?

उत्तर : पाचन एंजाइम जटिल भोजन को सरल ,  सूक्ष्म तथा लाभदायक पदार्थ में बदल देता है | इस प्रकार से सरल पदार्थ छोटी आंत द्वारा अवशोषित कर लिए जाते है | 

Q5. पचे हुए भोजन को अवशोषित करने के लिए क्षुद्रांत्रा को कैसे अभिकल्पित किया गया है?

उत्तर : पचा हुआ भोजन , क्षुद्रांत में अवशोषित होता है | क्षुद्रान्त्र में हजारो सूक्ष्म , अन्गुलिनुमा विलाई होते है इसी कारण इनका आन्तरिक क्षेत्रफल बढ़ जाता है | क्षेत्रफल के बढ़ने से अवशोषण भी बढ़ जाता है | यह अवशोषित भोजन रूधिर में पहुचता है |

Page : 116 

Q1. श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में एक जलीय जीव की अपेक्षा स्थलीय जीव किस प्रकार लाभप्रद है?

उत्तर : वातावरण में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है जो स्थलीय  जीवो  द्वारा   आसानी  से ली जाती  है परन्तु जल में ऑक्सीजन की सूक्ष्म मात्रा होती है तथा वह जल में मिला होता है अत: जलीय जीव इस मिले ऑक्सीजन को लेने के लिए काफ़ी गति से साँस लेते है तथा संघर्ष करते है |  

Q2. ग्लूकोज़ के ऑक्सीकरण से भिन्न जीवो में ऊर्जा प्राप्त करने के विभिन्न पथ क्या हैं?       उत्तर : मासपेशियो में ग्लूकोज ऑक्सीजन कि पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीकृत हो ऊर्जा प्रदान करता है तथा ऑक्सीजन कि कम मात्रा होने पर विशलषित होता है तथा लैकिटक अम्ल बनाता है |जीवो कि कोशिकाओ में ऑक्सीकरण पथ निम्न है |

(i) वायवीय श्वसन : इस प्रकम में ऑक्सीजन , ग्लूकोज को खंडित कर जल तथा CO2 

में  खंडित कर देती है | ऑक्सीजन की पयार्प्त मात्रा में  ग्लूकोज विश्लेषित होकर 3 कार्बन परमाणु परिरुवेट के दो अणु निर्मित करता है |

(ii) अवायवीय  श्वसन : ऑक्सीजन कि अनुपस्थिति में यीस्ट में किण्वन क्रिया होती है तथापायरूवेट इथेनाल व CO2 का निमार्ण होता है | 

(iii) ऑक्सीजन की कमी में लेकिटक अम्ल का निमार्ण होता है जिससे मासपेशियो में कैम्प आते है |

Q3. मनुष्यो में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन कैसे होता है?

उत्तर : मनुष्यों में ऑक्सीजन तथा काबर्न - डाइऑक्साइड के परिवहन को श्वसन कहते है | यह प्रक्रिया फैफडो द्वारा संपन्न कि जाति है |फैफडो में साँस के द्वारा पहुची हुई वायु में से हीमोग्लोबिन  (लाल रक्त कण ) ऑक्सीजन को ग्रहण कर के शरीर की सभी कोशिकाओ तक पहुचता है | इस प्रकार ऑक्सीजन शरीर के प्रत्येक अंग तक पहुचता है | इसी प्रकार CO2  जो हमारे शरीर में ग्लूकोज के खंडित होकर ऊर्जा में बदलने पर बनती है |यह CO2 रक्त के सपर्क में आने पर उसके प्लाजमा में घुल जाती है | यह CO2  प्लाज़मा के द्वारा पूरे शरीर से पुन : रक्त से वायु में चली जाती है और अतः में नासद्रवारा से बाहर कर दी जाती है |  

Q4. गैसो के विनिमय के लिए मानव-फुफ्फुस में अध्कितम क्षेत्रफल को कैसे अभिकल्पित किया है?

उत्तर : मानव फुफ्फुस छोटी -छोटी नलियों में बटा होती है | श्वसनी श्वसनिकाओ के बाद अत में कुपिकाए होती है जिनकी सरचना गुब्बरो के समान होती है | कुपिकाए ही गैसों के परिवहन को सरल बनाती है तथा एक विशाल क्षेत्र 

Page : 122 

Q1. मानव में वहन तंत्र के घटक कौन से हैं? इन घटकों के क्या कार्य हैं?

उत्तर : मानव में वहन तंत्र के प्रमुख घटक है : हृदय , रूधिर तथा रूधिर वाहिकाए |

(i) हृदय : हृदय एक पम्प की तरह रक्त का शरीर के विभिन्न अंगो से आदान -प्रदान करता है

(ii) रूधिर : इनमे तीन रक्त कण होते है |इनका तरल  माध्यम प्लाज्मा है |रक्त शरीर  मे

CO, भोजन ,जल , ऑक्सीजन ,तथा अन्य पर्दाथ का वहन करती है | RBC कोशिकाओं  CO2  तथा ऑक्सीजन गैसों तथा अन्य पदार्थ का वहन करता है | WBC शरीर में बाहर से आए जीवाणुओं से लड़कर शरीर को रोग मुक्त करता है | प्लेटलेट्स चोट लगने पर रक्त को बहने से रोकता है

 Q2. स्तनधारी तथा पक्षियों में ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुध्रि को अलग करना क्यों आवश्यक है?

उत्तर : स्तनधारी तथा पक्षियों को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है,जो ग्लूकोज के  खंडित होने पर प्राप्त होती है | ग्लूकोज  के  खंडन के लिए ऑक्सीजन की  आवश्यकता होती है|  ऑक्सीजनित  तथा विऑक्सीजनित रक्त को अलग करके ही शरीर कि इतनी ज्यादा मात्रा में ऊर्जा उपलब्ध करा सकती है |

Q3. उच्च संगठित पादप में वहन तंत्र के घटक क्या हैं?

उत्तर : उच्च संगठित पादप में वहन  तंत्र  के प्रमुख घटक है :

 (i)जाइलम ऊतक 

(ii) फ्लोएम ऊतक  
Q4. पादप में जल और खनिज लवण का वहन कैसे होता है?

उत्तर: पादप में जल और खनिज लवण का वहन जाइलम ऊतक करता है | जड़ो की कोशिकाए मृदा के अंदर होती है तथा वह आयन का आदान - प्रदान करती है | यह जड़ और मृदा में जड़ के आयन में एक अंतर उत्पन्न करता है | इस अंतर को समाप्त करने के लिए जल गति करते हुए जड़ के  जाइलम  में जाता है और और जल के स्तभ का निमार्ण करता है , जो लगातार  ऊपर की ओर धकेला जाता है | यह दाब जल को ऊपर की तरफ पहुचा नही सकता है | पत्तियो के द्वारा वाष्पोत्सर्जन क्रिया द्वारा जल की हानि होती है , जो जल को जड़ो में उपस्थित कोशिकाओ द्वारा खीचता है | अतः  वाष्पोत्सर्जन कर्षण  जल की गति के लिए महत्वपूर्ण बल होता है |    
Q5. पादप में भोजन का स्थानांतरण कैसे होता है?

उत्तर : पत्तिया भोजन तैयार करती  है | पात्तियो से भोजन स्थानांतरण पूरे पौधे में फ्लोएम वाहिकाए करती है |

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Q1. वृक्काणु (नेफॉन ) की रचना तथा क्रियाविधि का वर्णन कीजिए।

उत्तर : 

Q2. उत्सर्जी उत्पाद से छुटकारा पाने  लिए पादप किन विधियो का उपयोग करते हैं।

उत्तर : उत्स्जी उत्पाद से छूटकारा पाने के लिए निम्न विधिया है :

(i) प्रकाश -सश्लेषण में पौधे ऑक्सीजन उत्पन्न करते है तथा कार्बन - डाइआक्साइड श्वसन के लिए रंध्रो द्वारा उपयोग में लाते है |

(II) पौधे अधिक संख्या में उपस्थित जल को वाष्पोत्सर्जन क्रिया द्वारा कम कर सकते है |

(III) पौधे कुछ अपशिष्ट पदार्थ को अपने आस - पास के मृदा को उत्सर्जित कर देते है |
Q3. मूत्र बनने की मात्रा का नियमन किस प्रकार होता है?

उत्तर: मनुष्य द्वारा पीया जाने वाले पानी व शरीर द्वारा अवशोषण पर मूत्र की मात्रा निर्भर करती है | कम पानी पीने पर मूत्र की मात्रा कम होती है  कुछ हार्मोन इसे अपने नियंत्रण में रखते है|यूरिया तथा यूरिक अम्ल के उत्सर्जन के लिए भी जल की मात्रा बढ़ जाती है | अत : अधिक मूत्र उत्सर्जित होता है | 

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