Chapter मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi मिश्रणों के पृथक्करण की विधियाँ - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:
मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
5. मिश्रणों के पृथक्करण की विधियाँ
अध्याय 5. मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
दैनिक जीवन में अनेक मिश्रण ऐसे होते हैं जिनके घटकों की आवश्यकता अलग-अलग होती है। इसलिए मिश्रणों को उनके घटकों में पृथक करना आवश्यक होता है। पृथक्करण (Separation) की विधि मिश्रण के घटकों के भौतिक गुणों, जैसे कणों के आकार, घुलनशीलता, क्वथनांक (Boiling Point) तथा चुंबकीय गुणों के अंतर पर निर्भर करती है।
मिश्रणों के पृथक्करण की विधियाँ
मिश्रणों का पृथक्करण क्यों आवश्यक है?
मिश्रणों का पृथक्करण उपयोगी पदार्थ प्राप्त करने, अशुद्धियाँ हटाने तथा शुद्ध पदार्थों का निर्माण करने के लिए किया जाता है। विभिन्न परिस्थितियों में अलग-अलग पृथक्करण विधियाँ अपनाई जाती हैं।
- शुद्ध पदार्थ प्राप्त करने के लिए।
- अशुद्धियाँ हटाने के लिए।
- उपयोगी एवं अनुपयोगी पदार्थों को अलग करने के लिए।
- औद्योगिक एवं प्रयोगशाला कार्यों में शुद्ध रसायन प्राप्त करने के लिए।
हाथ से चुनना (Hand Picking)
जब मिश्रण में अशुद्धियाँ कम मात्रा में हों तथा उन्हें आसानी से पहचाना जा सके, तब हाथ से चुनकर अलग किया जाता है।
- ठोस-ठोस मिश्रणों के लिए उपयुक्त।
- घटक स्पष्ट दिखाई देते हैं।
- उदाहरण – चावल या दाल से कंकड़ निकालना।
फटकना (Winnowing)
हल्के एवं भारी कणों के भार में अंतर का उपयोग करके मिश्रण को अलग करने की विधि फटकना (Winnowing) कहलाती है।
- हल्के कण हवा के साथ उड़ जाते हैं।
- भारी कण नीचे गिर जाते हैं।
- उदाहरण – अनाज से भूसी अलग करना।
चलनी द्वारा पृथक्करण (Sieving)
जब मिश्रण के घटकों के कणों का आकार अलग-अलग हो, तब चलनी (Sieve) का उपयोग किया जाता है।
- कणों के आकार के अंतर पर आधारित विधि।
- बड़े कण चलनी पर रह जाते हैं।
- छोटे कण नीचे निकल जाते हैं।
- उदाहरण – आटे को छानना।
निस्यंदन (Filtration)
निस्यंदन (Filtration) का उपयोग किसी अघुलनशील ठोस (Insoluble Solid) को द्रव से अलग करने के लिए किया जाता है। इसमें फिल्टर पेपर (Filter Paper) या छन्नी का प्रयोग किया जाता है।
| घटक | अर्थ |
|---|---|
| अवशेष (Residue) | फिल्टर पेपर पर बचा ठोस पदार्थ। |
| निस्यंद (Filtrate) | फिल्टर पेपर से होकर निकलने वाला द्रव। |
वाष्पीकरण (Evaporation)
वाष्पीकरण (Evaporation) द्वारा किसी विलयन से विलायक को वाष्पित करके विलेय प्राप्त किया जाता है।
- विलायक वाष्प बनकर उड़ जाता है।
- विलेय पात्र में शेष रह जाता है।
- उदाहरण – समुद्री जल से नमक प्राप्त करना।
विभिन्न पृथक्करण विधियों की तुलना
| विधि | आधार | उदाहरण |
|---|---|---|
| हाथ से चुनना | दिखाई देने वाले कण | दाल से कंकड़ निकालना |
| फटकना | भार का अंतर | भूसी अलग करना |
| चलनी | कणों के आकार का अंतर | आटा छानना |
| निस्यंदन | अघुलनशील ठोस एवं द्रव | रेत और जल अलग करना |
| वाष्पीकरण | वाष्पशीलता का अंतर | नमक प्राप्त करना |
Our Concept Builder
यदि आपके पास रेत, नमक और जल का मिश्रण हो, तो पहले निस्यंदन (Filtration) द्वारा रेत को अलग किया जा सकता है। इसके बाद बचे हुए नमक के घोल को गर्म करके वाष्पीकरण (Evaporation) करने पर जल उड़ जाएगा और नमक प्राप्त हो जाएगा। इससे स्पष्ट होता है कि अलग-अलग मिश्रणों के लिए अलग-अलग पृथक्करण विधियाँ अपनाई जाती हैं।
Exam Booster
- पृथक्करण विधि का चयन घटकों के भौतिक गुणों पर निर्भर करता है।
- निस्यंदन द्वारा अघुलनशील ठोस को द्रव से अलग किया जाता है।
- वाष्पीकरण द्वारा विलयन से विलेय प्राप्त किया जाता है।
- फटकना भार के अंतर तथा चलनी कणों के आकार के अंतर पर आधारित है।
- अवशेष (Residue) एवं निस्यंद (Filtrate) की परिभाषाएँ परीक्षा में महत्वपूर्ण हैं।