Chapter क्रियाशील ऊतक Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi जंतु ऊतक (Animal Tissues) - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:
क्रियाशील ऊतक
5. जंतु ऊतक (Animal Tissues)
अध्याय 3. ऊतक: संरचना और कार्य (Tissues in Action)
पौधों की तरह जंतुओं (Animals) में भी समान कार्य करने वाली कोशिकाएँ मिलकर ऊतक (Tissue) बनाती हैं। जंतु ऊतक शरीर की सुरक्षा, विभिन्न अंगों को जोड़ने, गति कराने तथा पूरे शरीर में नियंत्रण एवं समन्वय बनाए रखने का कार्य करते हैं। प्रत्येक ऊतक की संरचना उसके विशेष कार्य के अनुरूप होती है।
जंतु ऊतक (Animal Tissues)
जंतु ऊतक क्या हैं?
जंतु ऊतक (Animal Tissues) समान संरचना एवं समान कार्य करने वाली कोशिकाओं का समूह हैं, जो शरीर के विभिन्न कार्यों को कुशलतापूर्वक सम्पन्न करते हैं।
- जंतु ऊतक विशेष कार्यों के लिए अनुकूलित होते हैं।
- ये शरीर की सुरक्षा, गति, परिवहन एवं नियंत्रण में सहायता करते हैं।
- जंतु शरीर में चार प्रमुख प्रकार के ऊतक पाए जाते हैं।
जंतु ऊतकों के प्रमुख प्रकार
| ऊतक | मुख्य कार्य |
|---|---|
| उपकला ऊतक (Epithelial Tissue) | सुरक्षा, अवशोषण एवं स्राव। |
| संयोजी ऊतक (Connective Tissue) | विभिन्न ऊतकों एवं अंगों को जोड़ना तथा सहारा देना। |
| मांसपेशीय ऊतक (Muscular Tissue) | शरीर एवं अंगों की गति कराना। |
| तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue) | संदेशों का संचार तथा नियंत्रण एवं समन्वय। |
उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)
उपकला ऊतक शरीर की बाहरी सतह (त्वचा) तथा आंतरिक अंगों की भीतरी परत (Lining) बनाता है। इसकी कोशिकाएँ आपस में सघन रूप से जुड़ी रहती हैं, जिससे यह शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है। इसके साथ ही यह अवशोषण (Absorption), स्राव (Secretion) तथा पदार्थों के आदान-प्रदान में भी सहायता करता है।
- शरीर की बाहरी सुरक्षा करता है।
- रोगाणुओं के प्रवेश को रोकता है।
- जल की हानि कम करता है।
- अवशोषण एवं स्राव में सहायता करता है।
- फेफड़ों, आँत, रक्त वाहिकाओं तथा मुख की भीतरी परत बनाता है।
संयोजी ऊतक (Connective Tissue)
संयोजी ऊतक शरीर के विभिन्न ऊतकों एवं अंगों को जोड़ने, सहारा देने तथा उनकी रक्षा करने का कार्य करता है। रक्त (Blood), अस्थि (Bone), उपास्थि (Cartilage), कण्डरा (Tendon) तथा स्नायुबंधन (Ligament) इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
| संयोजी ऊतक | मुख्य कार्य |
|---|---|
| रक्त (Blood) | ऑक्सीजन, पोषक तत्व एवं हार्मोन का परिवहन। |
| अस्थि (Bone) | शरीर को सहारा एवं सुरक्षा प्रदान करना। |
| उपास्थि (Cartilage) | लचीलापन एवं घर्षण कम करना। |
| कण्डरा (Tendon) | मांसपेशियों को अस्थियों से जोड़ना। |
| स्नायुबंधन (Ligament) | दो अस्थियों को आपस में जोड़ना। |
उपकला एवं संयोजी ऊतक में अंतर
| उपकला ऊतक | संयोजी ऊतक |
|---|---|
| सुरक्षात्मक आवरण बनाता है। | अंगों एवं ऊतकों को जोड़ता है। |
| कोशिकाएँ सघन रूप से जुड़ी होती हैं। | कोशिकाओं के बीच मैट्रिक्स (Matrix) पाया जाता है। |
| अवशोषण एवं स्राव करता है। | सहारा, सुरक्षा एवं परिवहन करता है। |
Our Concept Builder
किसी भवन में बाहरी दीवारें सुरक्षा देती हैं, जबकि सीमेंट, लोहे की सरिया और बीम पूरी इमारत को मजबूती देकर जोड़कर रखते हैं। इसी प्रकार शरीर में उपकला ऊतक (Epithelial Tissue) सुरक्षा प्रदान करता है, जबकि संयोजी ऊतक (Connective Tissue) विभिन्न अंगों और ऊतकों को जोड़कर सहारा देता है।
Exam Booster
- जंतु शरीर में चार प्रमुख प्रकार के ऊतक पाए जाते हैं।
- उपकला ऊतक शरीर का बाहरी एवं आंतरिक आवरण बनाता है।
- संयोजी ऊतक शरीर के विभिन्न भागों को जोड़ने एवं सहारा देने का कार्य करता है।
- रक्त, अस्थि, उपास्थि, कण्डरा एवं स्नायुबंधन संयोजी ऊतक के उदाहरण हैं।
- उपकला एवं संयोजी ऊतक का अंतर CBSE परीक्षा में महत्वपूर्ण है।