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Chapter 1. भोजन : यह कहाँ से आता है Class 6 Science CBSE notes in hindi खाद्य संघटक और स्रोत - CBSE Study

Chapter 1. भोजन : यह कहाँ से आता है Science Class 6 cbse notes खाद्य संघटक और स्रोत in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter 1. भोजन : यह कहाँ से आता है Class 6 Science CBSE notes in hindi खाद्य संघटक और स्रोत - CBSE Study

कक्षा 6 Science के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण 1. भोजन : यह कहाँ से आता है को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक खाद्य संघटक और स्रोत को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Science में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 6 English Medium Science All Chapters:

1. भोजन : यह कहाँ से आता है

1. खाद्य संघटक और स्रोत

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संघटक : भोजन बनाने के लिए हमें कई चीजों की आवश्यकता होती है | जैसे- कच्ची सब्जियाँ, नमक, मसाला, तेल और पानी आदि | इन्हें ही संघटक कहते हैं |

खाद्य पदार्थों के स्रोत : जिन-जिन चीजों से हम अपना भोजन प्राप्त करते हैं उन्हें ही खाद्य पदार्थों का स्रोत कहते है | 

हम खाद्य पदार्थ दो स्रोतों से प्राप्त करते हैं |

(i) पौधों से प्राप्त खाद्य पदार्थ : गेंहूँ, दाल, चावल, मक्का, सब्जी और वनस्पति तेल इत्यादि | 

(ii) जन्तुओ से प्राप्त खाद्य पदार्थ : उदाहरण - अंडा, मांस, दूध, दही, मछली और पनीर इत्यादि | 

कच्ची सामग्री : खाद्य पदार्थों को बनाने के लिए जिन संघटकों का हम प्रयोग करते है, उन्हें कच्ची सामग्री कहते है | जैसे - नमक, दाल, सब्जी, पानी और मसाला इत्यादि | 

पौधों के खाने योग्य भाग : कुछ पौधों के दो या दो से अधिक भागों को खाया जाता है, इन्हें ही खाने योग्य भाग (edible part) कहा जाता है | जैसे - जड़, तना, फल, फुल, पत्ता इत्यादि ये सब खाने योग्य भाग होते हैं | 

पौधे के भाग :

जैसे-

(i) आलु का तना खाया जाता है |

(ii) मुली का जड़ और पत्ता दोनों खाया जाता है |

(iii) लौकी का फल खाया जाता है |

(iv) पालक का पत्ता खाया जाता है |

अंकुरण : बीज से शिशु पौधे का उगना अंकुरण कहलाता है | 

(i) मुंग का अंकुरण 

(ii) चने का अंकुरण 

अंकुर (sprout) : अंकुरित बीजों से एक सफ़ेद रंग की धागे जैसी संरचना निकलती है जिसे अंकुर कहते हैं | 

मकरंद (नेक्टर) : मधुमख्खियों द्वारा इक्कठा की गयी फूलों के मीठे रस को मकरंद (नेक्टर) कहते है जो बाद में शहद बन जाता है | 

मधुमक्खियाँ मकरंद (नेक्टर) का भण्डारण करती है क्योंकि : 

फुल और उनका मकरंद, वर्ष के केवल कुछ समय में ही उपलब्ध् होते हैं। अतः
मधुमक्खियाँ इस मकरंद का भंडारण कर लेती हैं ताकि पूरे वर्ष इसका उपयोग किया जा सके।

भंडारित शहद को मधुमक्खियाँ भोजन के रूप में प्रयोग करती हैं | 

खाद्य पदार्थों के ग्रहण करने के आधार पर जंतुओं के प्रकार: 

1. शाकाहारी

2. मांसाहारी

3. सर्वाहारी

शाकाहारी : वे जंतु जो केवल पादप या पादप-उत्पाद खाते हैं वे शाकाहारी कहलाते हैं | जैसे - गाय, हिरण, भैस और खरगोस आदि | 

मांसाहारी : वे जंतु जो केवल जंतु या जंतु-उत्पादों को ही खाते है उन्हें मांसाहारी कहते है | जैसे शेर, बाघ आदि | 

सर्वाहारी : वे जंतु जो पादप और जंतु दोनों को खाते है वे सर्वाहारी कहलाते हैं | जैसे मनुष्य, कौवा आदि |

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