Chapter Chapter 3. बधुत्व, जाति तथा वर्ग Class 12 History Part-1 CBSE notes in hindi चीनी बौद्ध भिक्षु की भारत यात्रा - CBSE Study
कक्षा 12 History Part-1 के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 3. बधुत्व, जाति तथा वर्ग को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक चीनी बौद्ध भिक्षु की भारत यात्रा को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन History Part-1 में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।
CBSE NOTES:
Class 12 English Medium History Part-1 All Chapters:
Chapter 3. बधुत्व, जाति तथा वर्ग
4. चीनी बौद्ध भिक्षु की भारत यात्रा
चीनी बौद्ध भिक्षु की भारत यात्रा : लगभग पाँचवी शताब्दी ईसवी चीनी बौद्ध भिक्षु फा-शिएन भारत आया था | उसने अपनी यात्रा वृतांत में वर्णन किया है कि अस्पृश्यों को सड़क पर चलते हुए करताल बजाकर अपने होने की सूचना देनी पड़ती थी जिससे अन्य जन उन्हें देखने के दोष से बच जाएँ। एक और चीनी तीर्थयात्री (श्वैन-त्सांग लगभग सातवीं शताब्दी ईसवी) कहता है कि वधिक और सफाई करने वालों को नगर से बाहर रहना पड़ता था।
स्त्रीधन : स्त्री को विवाह के समय जो उपहार मिलते थे, उनपर उसी का अधिकार होता था | उसे स्त्रीधन कहा जाता था | इसे उसकी संतान विरासत के रूप के प्राप्त कर सकती थी | इस इसके पति का कोई अधिकार नहीं होता था |
सामाजिक अभिनायक और उनका समाज में स्थान :
भारतीय उपमहाद्वीप में दास, भूमिहीन खेतिहर मजदूर, शिकारी, मछुआरे, पशुपालक, किसान, ग्राममुखिया, शिल्पकार, वणिक और राजा सभी का यहाँ विभिन्न हिस्सों में सामाजिक अभिनायक के रूप में उदभव हुआ |
समाज में उनका स्थान : समाज में उनका स्थान इस बात पर निर्भर करता था कि आर्थिक संसाधनों पर उनका कितना नियंत्रण है |
पैतृक संसाधनों पर नियंत्रण : मनुस्मृति के अनुसार पैतृक जायदाद का माता-पिता की मृत्यु के बाद सभी पुत्रों में समान रूप से बँटवारा किया जाना चाहिए किन्तु ज्येष्ठ पुत्र विशेष भाग का अधिकारी था। स्त्रिायाँ इस पैतृक संसाधन में हिस्सेदारी की माँग नहीं कर सकती थीं।
मनुस्मृति के अनुसार धन अर्जित करने के तरीके :
(1) विरासत (2) खोज (3) खरीद (4) विजय प्राप्त करके (5) निवेश (6) कार्य द्वारा (7) सज्जनों द्वारा दी गई भेंट स्वीकार करके |