9. क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण Class 7 History [LATEST] Solutions अध्याय - समीक्षा in Hindi - CBSE Study
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Class 7 English Medium History All Chapters:
9. क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण
1. अध्याय - समीक्षा
अध्याय - समीक्षा:
- महोदरपुरम का चेर राज्य प्रायद्वीप के दक्षिण-पश्चिमी भाग में, जो आज के केरल राज्य का एक हिस्सा है, नौवीं शताब्दी में स्थापित किया गया।
- मलयालम भाषा इस इलाके में बोली जाती थी।
- केरल का मंदिर रंगमंच संस्कृति महाकाव्यों पर आधारित था।
- मलयालम की पहली साहित्यिक कृत (बारहवीं सदी में) संस्कृति की ऋणी है।
- चौदहवीं शताब्दी का ग्रंथ लीला तिलकम (व्याकरण तथा काव्यशास्त्र विषयक) मणि प्रवालम शैली में लिखा गया था।
- इसका शाब्दिक अर्थ दुनिया का मालिक जो विष्णु का पर्यायवाची है।
- जगन्नाथ की काष्ठ प्रतिमा स्थानीय जनजातीय लोगो द्वारा बनाई जाती है।
- बारहवीं शताब्दी में गंग वंश के राजा अनंतवर्मन ने पूरी में जगन्नाथ के लिए एक मंदिर बनवाने का निश्चय किया।
- 1230 में राजा अनंगभीम तृतीय ने अपना राज्य जगन्नाथ को अर्पित कर स्वयं को जगन्नाथ का ' प्रतिनियुक्त घोषित किया।
- राजपूतों की कहानियाँ काव्यों और गीतों में सुरक्षित है जो चारण-भाटो द्वारा गाई जाती है।
- कत्थक मूल रूप से उत्तर भारत के मंदिरो में कथा यानी कहानी सुनाने वाली एक जाति थी।
- पंद्रहवीं से सोलहवीं शताब्दी में भक्ति आंदोलन के प्रसार के साथ कत्थक ने नृत्य शैली का रूप धारण कर लिया।
- 1850 से 1875 के दौरान यह नृत्य शैली के रूप में पंजाब, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, बिहार तथा मध्य प्रदेश के निकटवर्ती इलाकों में फैला।
- उन्नीसवीं तथा बीसवीं शताब्दी में ब्रिटिश प्रशासको द्वारा न पसंद परन्तु गणिकाओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता रहा|
- प्राचीनतम लघुचित्र, तालपत्रों अथवा लकड़ी की तख्तियों पर चित्रित किये गए थे।
- सर्वाधिक सुन्दर चित्र पश्चिम भारत में जैन ग्रंथो को सचित्र बनाने के लिए प्रयोग किए गए।
- मुग़ल बादशाह , अकबर , जहाँगीर , शाहजहाँ ने इतिहास और काव्यों की पांडुलिपियाँ चित्रित करने वालो को संरक्षण प्रदान किया हुआ था।
- पीरों की पूजा पद्धतिया बहुत ही लोक प्रिय हो गई और उनकी मजारें बंगाल में सर्वत्र पाई जाती है।
- मंदिर आमतौर वर्गाकार चबूतरे पर बनाए जाते थे। उनके भीतरी भाग में कोई सजावट नहीं होती थी, लेकिन अनेक मंदिरों की बाहरी दीवारें चित्रकारियों , सजावटी टाइलों अथवा मिटटी की पत्तियों से सजी होती थी।
- पश्चिम बंगाल के बाकुरा जिले में विष्णुपुर के मंदिरों में अत्यंत उत्क्रष्ट कोटि की सजावट की गई।
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