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Chapter 4. नवारंभ:नगर एवं राज्य Class 7 Social Science Part-1 CBSE notes in hindi Quick Revising Notes - CBSE Study

Chapter 4. नवारंभ:नगर एवं राज्य Social Science Part-1 Class 7 cbse notes Quick Revising Notes in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter 4. नवारंभ:नगर एवं राज्य Class 7 Social Science Part-1 CBSE notes in hindi Quick Revising Notes - CBSE Study

कक्षा 7 Social Science Part-1 के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण 4. नवारंभ:नगर एवं राज्य को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक Quick Revising Notes को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Social Science Part-1 में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 7 English Medium Social Science Part-1 All Chapters:

4. नवारंभ:नगर एवं राज्य

1. Quick Revising Notes

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Quick Revision Notes — नवारंभ : नगर एवं राज्य

• द्वितीय नगरीकरण भारत में नगरों के पुनः विकास की प्रक्रिया थी।

• हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद लंबे समय तक नगरीय जीवन कमजोर रहा।

• प्रथम सहस्राब्दी ईसा पूर्व में नए नगरों का विकास प्रारंभ हुआ।

• गंगा के मैदान द्वितीय नगरीकरण का प्रमुख केंद्र बने।

• पुरातात्विक उत्खनन से प्राचीन नगरों के प्रमाण मिले हैं।

• बौद्ध और जैन साहित्य में नए नगरों का वर्णन मिलता है।

• जनपद ऐसे क्षेत्र थे जहाँ कोई जन या समुदाय निवास करता था।

• प्रत्येक जनपद का अपना शासक होता था।

• व्यापारिक मार्गों के विकास से जनपद समृद्ध हुए।

• महाजनपद बड़े और शक्तिशाली राज्य थे।

• 16 महाजनपद प्राचीन भारत में प्रसिद्ध थे।

• मगध सबसे शक्तिशाली महाजनपदों में से एक था।

• कोसल, वत्स और अवंति भी महत्वपूर्ण महाजनपद थे।

• महाजनपदों की राजधानियाँ मजबूत किलों से घिरी होती थीं।

• परिखा सुरक्षा के लिए बनाई गई गहरी खाई होती थी।

• सभा और समिति प्रारंभिक शासन संस्थाएँ थीं।

• राजा मंत्रियों और सभा से परामर्श लेकर निर्णय लेता था।

• कुछ महाजनपदों में गणतांत्रिक शासन प्रणाली थी।

• वज्जि और मल्ल प्रारंभिक गणराज्य माने जाते हैं।

• गणराज्य में राजा का चयन सभा द्वारा किया जाता था।

• इस काल में बौद्ध और जैन धर्म का विकास हुआ।

• लौह धातु के प्रयोग से कृषि और युद्ध में प्रगति हुई।

• लोहे के औजारों से खेती का विस्तार हुआ।

• लोहे के हथियार कांस्य की तुलना में अधिक प्रभावशाली थे।

• इस समय भारत में सिक्कों का प्रयोग शुरू हुआ।

• प्रारंभिक सिक्के चाँदी के बने होते थे।

• आहत सिक्के प्रतीकों को अंकित करके बनाए जाते थे।

• व्यापार के विस्तार से मुद्रा का महत्व बढ़ा।

• समाज विभिन्न वर्गों और समूहों में विभाजित होने लगा।

• जाति विशेष व्यवसाय से जुड़ा सामाजिक समूह था।

• कौशल पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होते थे।

• वर्ण व्यवस्था में चार प्रमुख वर्ण थे।

• ब्राह्मण ज्ञान और धार्मिक कार्यों से जुड़े थे।

• क्षत्रिय रक्षा और शासन का कार्य करते थे।

• वैश्यों का कार्य व्यापार और कृषि था।

• शूद्र सेवा और शिल्प कार्यों में लगे रहते थे।

• प्रारंभिक समाज में व्यवसाय बदलना संभव था।

• समय के साथ वर्ण-जाति व्यवस्था कठोर होती गई।

• उत्तरापथ महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग था।

• दक्षिणापथ उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ता था।

• शिशुपालगढ़ पूर्वी भारत का प्रमुख नगर था।

• दक्षिण भारत में चोल, चेर और पांड्य राज्यों का उदय हुआ।

• दक्षिण भारत मसालों और बहुमूल्य वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध था।

• लगभग 300 ईसा पूर्व तक पूरा उपमहाद्वीप व्यापार से जुड़ चुका था।

• महाजनपदों के बाद नए साम्राज्यों का उदय हुआ।

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