Chapter 3. भारत की जलवायु Class 7 Social Science Part-1 CBSE notes in hindi Quick Revising Notes - CBSE Study
कक्षा 7 Social Science Part-1 के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण 3. भारत की जलवायु को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक Quick Revising Notes को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Social Science Part-1 में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।
CBSE NOTES:
Class 7 English Medium Social Science Part-1 All Chapters:
3. भारत की जलवायु
1. Quick Revising Notes
Quick Revision Notes — भारत की जलवायु
• मौसम किसी स्थान की दैनिक वायुमंडलीय दशाओं को कहते हैं।
• जलवायु किसी क्षेत्र के लंबे समय तक रहने वाले मौसम के प्रतिरूप को कहते हैं।
• ऋतुएँ पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर परिक्रमण के कारण बनती हैं।
• भारत में प्रमुख ऋतुएँ — वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर।
• मौसम समय-समय पर बदलता रहता है जबकि जलवायु लंबे समय तक स्थिर रहती है।
• भारत में विभिन्न प्रकार की जलवायु पाई जाती है।
• हिमालय क्षेत्र में अल्पाइन जलवायु पाई जाती है।
• उत्तरी मैदानों में उपोष्णकटिबंधीय जलवायु मिलती है।
• थार मरुस्थल की जलवायु शुष्क और गर्म होती है।
• पश्चिमी तटीय क्षेत्र में भारी वर्षा होती है।
• दक्कन पठार की जलवायु अर्ध-शुष्क है।
• जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक — अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र से दूरी, पवनें और स्थलाकृति।
• भूमध्य रेखा के पास के क्षेत्र अधिक गर्म होते हैं।
• ऊँचाई बढ़ने पर तापमान कम हो जाता है।
• समुद्र तापमान को नियंत्रित करता है।
• तटीय क्षेत्रों में तापमान का अंतर कम होता है।
• पवनें गर्म या ठंडी वायु राशियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती हैं।
• समुद्री पवनें नमी लाकर वर्षा कराती हैं।
• स्थलाकृति भी जलवायु को प्रभावित करती है।
• हिमालय भारत को मध्य एशिया की ठंडी हवाओं से बचाता है।
• सूक्ष्म जलवायु छोटे क्षेत्र की स्थानीय जलवायु होती है।
• नगरीय ऊष्मा द्वीप शहरों में अधिक तापमान की स्थिति को कहते हैं।
• मानसून भारत की जलवायु का मुख्य आधार है।
• मानसून शब्द अरबी भाषा के “मौसिम” शब्द से बना है।
• ग्रीष्म ऋतु में स्थल भाग जल्दी गर्म होता है जिससे निम्न दबाव बनता है।
• समुद्र से आने वाली पवनें नमी लाकर वर्षा करती हैं।
• दक्षिण-पश्चिम मानसून जून में भारत में प्रवेश करता है।
• पश्चिमी घाट मानसूनी वर्षा को प्रभावित करते हैं।
• शीत ऋतु में पवनों की दिशा बदल जाती है।
• उत्तर-पूर्व मानसून दक्षिण-पूर्व भारत में वर्षा कराता है।
• मौसिनराम विश्व का सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान है।
• जलवायु का प्रभाव संस्कृति और त्योहारों पर पड़ता है।
• कृषि मानसून पर बहुत अधिक निर्भर करती है।
• मानसून की असफलता से सूखा और आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
• जलवायु संबंधी आपदाएँ — चक्रवात, बाढ़, भूस्खलन और दावानल।
• चक्रवात निम्न दबाव क्षेत्र के कारण बनते हैं।
• चक्रवात की आँख उसका शांत केंद्र होता है।
• बाढ़ अत्यधिक वर्षा या जल निकासी बाधित होने से आती है।
• हिमनदीय विस्फोट पहाड़ी क्षेत्रों में विनाशकारी बाढ़ ला सकता है।
• भूस्खलन मिट्टी और चट्टानों के अचानक खिसकने को कहते हैं।
• वनों की कटाई भूस्खलन की संभावना बढ़ाती है।
• दावानल जंगलों में फैलने वाली अनियंत्रित आग है।
• भारत मौसम विज्ञान विभाग मौसम की जानकारी और चेतावनी जारी करता है।
• जलवायु परिवर्तन मानव जीवन और पर्यावरण दोनों को प्रभावित करता है।