Chapter 2. मौसम को समझना Class 7 Social Science Part-1 CBSE notes in hindi Details Notes - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 7 English Medium Social Science Part-1 All Chapters:
2. मौसम को समझना
2. Details Notes
अध्याय 2 — मौसम को समझना
परिचय
मौसम हमारे दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण भाग है। मौसम में होने वाले परिवर्तन हमारे पहनावे, भोजन, यात्रा, खेती और जीवन-शैली को प्रभावित करते हैं। कभी मौसम गर्म होता है, कभी ठंडा, कभी वर्षा होती है और कभी तेज हवाएँ चलती हैं। मौसम का अध्ययन हमें प्राकृतिक घटनाओं को समझने और उनसे बचाव करने में सहायता करता है।
मौसम क्या है?
किसी स्थान विशेष पर किसी निश्चित समय में वायुमंडल की दशाओं को मौसम कहते हैं। मौसम समय-समय पर बदलता रहता है।
वायुमंडल
पृथ्वी के चारों ओर गैसों की जो परत पाई जाती है उसे वायुमंडल कहते हैं। पृथ्वी के सबसे निकट वाली परत को क्षोभमंडल कहा जाता है। सभी मौसम संबंधी घटनाएँ इसी परत में घटित होती हैं।
मौसम के प्रमुख तत्व
1. तापमान
वायु कितनी गर्म या ठंडी है, इसे तापमान कहते हैं। तापमान मौसम का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है।
- तापमान मापने के लिए तापमापी (थर्मामीटर) का उपयोग किया जाता है।
- सेल्सियस और फॉरेनहाइट तापमान मापने के प्रमुख पैमाने हैं।
- डिजिटल तापमापी अधिक सटीक माने जाते हैं।
2. वर्षण
जल के वे सभी रूप जो आकाश से पृथ्वी पर गिरते हैं, वर्षण कहलाते हैं।
- वर्षा
- हिमपात
- ओले
- सहिमवृष्टि
वर्षा मापने वाले उपकरण को वर्षामापी (Rain Gauge) कहते हैं।
3. वायुमंडलीय दबाव
वायु द्वारा पृथ्वी की सतह पर डाला गया दबाव वायुमंडलीय दबाव कहलाता है।
- समुद्र तल पर दबाव अधिक होता है।
- ऊँचाई बढ़ने पर वायुदाब कम हो जाता है।
- कम दबाव वाले क्षेत्र में तूफान या चक्रवात बन सकते हैं।
वायुदाब मापने के उपकरण को बैरोमीटर कहते हैं।
4. पवन
उच्च दबाव क्षेत्र से निम्न दबाव क्षेत्र की ओर बहने वाली वायु को पवन कहते हैं।
- पवन की दिशा और गति मौसम को प्रभावित करती है।
- पवन की दिशा मापने के लिए वात दिक्सूचक यंत्र का उपयोग होता है।
- पवन की गति मापने के लिए एनीमोमीटर का उपयोग किया जाता है।
5. आर्द्रता
वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता कहते हैं।
- समुद्र के पास आर्द्रता अधिक होती है।
- आर्द्र मौसम में कपड़े देर से सूखते हैं।
- शुष्क मौसम में कपड़े जल्दी सूख जाते हैं।
आर्द्रता मापने वाले उपकरण को हाइग्रोमीटर कहते हैं।
प्राकृतिक संकेतों द्वारा मौसम का अनुमान
प्राचीन समय से लोग प्रकृति के संकेतों को देखकर मौसम का अनुमान लगाते रहे हैं।
- चींटियों का अंडे ऊपर ले जाना वर्षा का संकेत है।
- मेढ़कों की तेज आवाज वर्षा आने का संकेत मानी जाती है।
- पक्षियों का नीचे उड़ना भी मौसम परिवर्तन का संकेत है।
मौसम विज्ञान
मौसम और उसके परिवर्तनों का वैज्ञानिक अध्ययन मौसम विज्ञान कहलाता है। मौसम वैज्ञानिक विभिन्न उपकरणों द्वारा आँकड़े एकत्र करते हैं और मौसम का पूर्वानुमान लगाते हैं।
मौसम केंद्र
मौसम केंद्र वह स्थान है जहाँ मौसम मापने के सभी उपकरण लगाए जाते हैं। यहाँ तापमान, वर्षा, पवन, आर्द्रता और वायुदाब का रिकॉर्ड रखा जाता है।
स्वचालित मौसम केंद्र
स्वचालित मौसम केंद्र आधुनिक तकनीक से संचालित होते हैं। ये बिना मानव सहायता के मौसम संबंधी आँकड़े रिकॉर्ड करते हैं।
- कृषि में उपयोग
- विमानन में उपयोग
- नौकायन में उपयोग
- आपदा प्रबंधन में उपयोग
मौसम का पूर्वानुमान
मौसम वैज्ञानिक आँकड़ों का अध्ययन करके भविष्य के मौसम का अनुमान लगाते हैं।
पूर्वानुमान के लाभ
- तूफान और चक्रवात से बचाव
- किसानों को खेती की जानकारी
- मछुआरों को समुद्र संबंधी चेतावनी
- यात्रा की योजना बनाने में सहायता
- प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा
भारत मौसम विज्ञान विभाग
भारत मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना 1875 में की गई थी। यह विभाग पूरे देश में मौसम की जानकारी और चेतावनी जारी करता है।
मौसम और जलवायु में अंतर
| मौसम | जलवायु |
|---|---|
| कम समय की वायुमंडलीय दशाएँ | लंबे समय की औसत मौसम दशाएँ |
| प्रतिदिन बदलता है | धीरे-धीरे बदलती है |
| स्थानीय प्रभाव अधिक | क्षेत्रीय प्रभाव अधिक |
महत्वपूर्ण उपकरण और उनके कार्य
| उपकरण | कार्य |
|---|---|
| थर्मामीटर | तापमान मापना |
| रेन गेज | वर्षा मापना |
| बैरोमीटर | वायुदाब मापना |
| एनीमोमीटर | पवन की गति मापना |
| हाइग्रोमीटर | आर्द्रता मापना |
निष्कर्ष
मौसम हमारे जीवन को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। तापमान, पवन, वर्षा, आर्द्रता और वायुदाब मिलकर मौसम का निर्माण करते हैं। मौसम का सही अध्ययन और पूर्वानुमान हमें प्राकृतिक आपदाओं से बचाने और जीवन को सुरक्षित बनाने में सहायता करता है।