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Chapter 10. भारत का संविधान:एक परिचय Class 7 Social Science Part-1 CBSE notes in hindi Details Notes - CBSE Study

Chapter 10. भारत का संविधान:एक परिचय Social Science Part-1 Class 7 cbse notes Details Notes in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter 10. भारत का संविधान:एक परिचय Class 7 Social Science Part-1 CBSE notes in hindi Details Notes - CBSE Study

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Class 7 English Medium Social Science Part-1 All Chapters:

10. भारत का संविधान:एक परिचय

2. Details Notes

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Quick Revision Notes — भारत का संविधान : एक परिचय

• संविधान किसी देश के मूल नियमों और सिद्धांतों का लिखित दस्तावेज होता है।

• भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।

भारत का संविधान — एक परिचय

परिचय

भारत का संविधान हमारे देश का सर्वोच्च कानून है। यह एक ऐसा लिखित दस्तावेज है जिसमें देश को चलाने के मूल नियम, सिद्धांत और आदर्श दिए गए हैं। संविधान यह निर्धारित करता है कि सरकार कैसे बनेगी, कैसे कार्य करेगी और नागरिकों के अधिकार तथा कर्तव्य क्या होंगे। :contentReference[oaicite:0]{index=0}

भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान माना जाता है। यह भारत के लोकतांत्रिक, न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज की आधारशिला है।

संविधान क्या है?

संविधान किसी देश के मूल सिद्धांतों और कानूनों का ऐसा दस्तावेज होता है जो शासन व्यवस्था की नींव रखता है।

संविधान सरकार की संरचना, शक्तियों और नागरिकों के अधिकारों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करता है। :contentReference[oaicite:1]{index=1}

संविधान के प्रमुख कार्य

  • सरकार की संरचना निर्धारित करना
  • सरकार के विभिन्न अंगों के कार्य तय करना
  • नागरिकों के अधिकार और कर्तव्य बताना
  • न्याय और समानता सुनिश्चित करना
  • देश के आदर्शों और लक्ष्यों को स्पष्ट करना

संविधान की आवश्यकता

जैसे किसी खेल को नियमों के अनुसार चलाया जाता है, उसी प्रकार किसी देश को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए संविधान आवश्यक होता है।

यदि संविधान न हो तो शासन व्यवस्था में भ्रम, अन्याय और अव्यवस्था फैल सकती है।

संविधान सरकार और नागरिकों दोनों के लिए मार्गदर्शक नियम-पुस्तिका का कार्य करता है। :contentReference[oaicite:2]{index=2}

सरकार के तीन अंग

संविधान सरकार के तीन प्रमुख अंगों का वर्णन करता है।

1. विधायिका

विधायिका कानून बनाने का कार्य करती है।

2. कार्यपालिका

कार्यपालिका कानूनों को लागू करने और प्रशासन चलाने का कार्य करती है।

3. न्यायपालिका

न्यायपालिका कानूनों की व्याख्या करती है और न्याय प्रदान करती है।

संविधान इन तीनों अंगों के बीच संतुलन और नियंत्रण बनाए रखता है। :contentReference[oaicite:3]{index=3}

भारतीय संविधान की विशेषताएँ

भारतीय संविधान केवल कानूनों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह भारत के आदर्शों, मूल्यों और आकांक्षाओं को भी व्यक्त करता है।

मुख्य विशेषताएँ

  • लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था
  • न्याय और समानता
  • मौलिक अधिकार
  • मौलिक कर्तव्य
  • धर्मनिरपेक्षता
  • संघीय शासन प्रणाली
  • स्वतंत्र न्यायपालिका

भारतीय संविधान का निर्माण

भारत की स्वतंत्रता से पहले ही यह विचार शुरू हो गया था कि स्वतंत्र भारत का शासन कैसे चलाया जाएगा।

इसी उद्देश्य से वर्ष 1946 में संविधान सभा का गठन किया गया। :contentReference[oaicite:4]{index=4}

संविधान सभा

  • प्रारंभ में 389 सदस्य थे
  • विभाजन के बाद 299 सदस्य रह गए
  • 15 महिलाएँ भी सदस्य थीं
  • विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों का प्रतिनिधित्व था

संविधान सभा ने लगभग तीन वर्षों तक कार्य किया।

संविधान सभा के प्रमुख व्यक्ति

  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद — अध्यक्ष
  • डॉ. भीमराव आंबेडकर — प्रारूप समिति के अध्यक्ष

डॉ. आंबेडकर को भारतीय संविधान का प्रमुख निर्माता माना जाता है। :contentReference[oaicite:5]{index=5}

संविधान कब लागू हुआ?

भारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 को तैयार हुआ।

इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया।

इसी कारण प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। :contentReference[oaicite:6]{index=6}

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रभाव

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन ने संविधान को गहराई से प्रभावित किया।

स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं ने समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे आदर्शों को संविधान में स्थान दिया।

स्वतंत्रता आंदोलन से प्राप्त आदर्श

  • समानता
  • न्याय
  • बंधुत्व
  • सांस्कृतिक संरक्षण
  • लोकतंत्र

संविधान निर्माताओं ने संविधान को इन आदर्शों को प्राप्त करने का माध्यम माना। :contentReference[oaicite:7]{index=7}

भारतीय सभ्यता और संस्कृति का प्रभाव

भारतीय संविधान पर भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का भी गहरा प्रभाव पड़ा।

भारत की विविधता में एकता, सहिष्णुता और प्रकृति के प्रति सम्मान जैसी परंपराएँ संविधान में दिखाई देती हैं।

महत्वपूर्ण भारतीय आदर्श

  • वसुधैव कुटुंबकम्
  • सर्वे भवन्तु सुखिनः
  • महिलाओं का सम्मान
  • ज्ञान और शिक्षा का महत्व

मौलिक कर्तव्यों में भी भारतीय संस्कृति की झलक मिलती है। :contentReference[oaicite:8]{index=8}

अन्य देशों के संविधानों से प्रेरणा

भारतीय संविधान निर्माताओं ने विश्व के अनेक लोकतांत्रिक देशों के संविधानों का अध्ययन किया।

प्रमुख प्रेरणाएँ

  • फ्रांस — स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व
  • आयरलैंड — नीति-निर्देशक तत्व
  • अमेरिका — स्वतंत्र न्यायपालिका
  • ब्रिटेन — संसदीय शासन प्रणाली

इन विचारों को भारतीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाया गया। :contentReference[oaicite:9]{index=9}

भारतीय संविधान में चित्रण

भारतीय संविधान केवल कानूनी दस्तावेज नहीं बल्कि एक कलात्मक रचना भी है।

प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने संविधान की मूल प्रति को सुंदर हस्तलिपि में लिखा था।

नंदलाल बोस और उनके सहयोगियों ने संविधान के पृष्ठों को भारतीय इतिहास और संस्कृति से जुड़े चित्रों से सजाया था। :contentReference[oaicite:10]{index=10}

मौलिक अधिकार

मौलिक अधिकार नागरिकों को स्वतंत्र और सम्मानपूर्ण जीवन जीने का अधिकार प्रदान करते हैं।

प्रमुख मौलिक अधिकार

  • समानता का अधिकार
  • स्वतंत्रता का अधिकार
  • शोषण के विरुद्ध अधिकार
  • शिक्षा का अधिकार

यदि किसी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन होता है तो वह न्यायालय जा सकता है। :contentReference[oaicite:11]{index=11}

मौलिक कर्तव्य

संविधान नागरिकों को कुछ कर्तव्यों का पालन करने की भी प्रेरणा देता है।

मुख्य मौलिक कर्तव्य

  • संविधान का सम्मान करना
  • राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करना
  • देश की रक्षा करना
  • पर्यावरण की रक्षा करना
  • सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना
  • बच्चों को शिक्षा दिलाना

मौलिक कर्तव्य 42वें संविधान संशोधन, 1976 द्वारा जोड़े गए थे। :contentReference[oaicite:12]{index=12}

राज्य के नीति-निर्देशक तत्व

राज्य के नीति-निर्देशक तत्व सरकार के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत हैं।

इनका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक न्याय स्थापित करना है।

प्रमुख नीति-निर्देशक तत्व

  • सामाजिक और आर्थिक न्याय
  • कल्याणकारी राज्य
  • समान नागरिक संहिता
  • पोषण और स्वास्थ्य का संवर्धन
  • पर्यावरण संरक्षण

इन तत्वों को अदालत में लागू नहीं कराया जा सकता, लेकिन सरकार को इनके अनुसार कार्य करना चाहिए। :contentReference[oaicite:13]{index=13}

संविधान एक जीवंत दस्तावेज

भारतीय संविधान को एक जीवंत दस्तावेज माना जाता है क्योंकि समय के अनुसार इसमें परिवर्तन किए जा सकते हैं।

संविधान में परिवर्तन को संविधान संशोधन कहा जाता है।

अब तक संविधान में अनेक संशोधन किए जा चुके हैं। :contentReference[oaicite:14]{index=14}

भारतीय संविधान की उद्देशिका

उद्देशिका संविधान का परिचय और उसके मूल आदर्शों का सार प्रस्तुत करती है।

उद्देशिका “हम भारत के लोग” शब्दों से प्रारंभ होती है। :contentReference[oaicite:15]{index=15}

उद्देशिका के प्रमुख शब्द

  • संप्रभु
  • समाजवादी
  • पंथनिरपेक्ष
  • लोकतांत्रिक
  • गणराज्य

उद्देशिका के प्रमुख आदर्श

  • न्याय
  • स्वतंत्रता
  • समानता
  • बंधुत्व

संप्रभु

संप्रभु का अर्थ है कि भारत किसी बाहरी शक्ति के नियंत्रण में नहीं है। भारत अपने निर्णय स्वयं लेता है।

समाजवादी

समाजवादी व्यवस्था सामाजिक और आर्थिक समानता पर बल देती है।

पंथनिरपेक्ष

भारत का कोई राजकीय धर्म नहीं है। सभी धर्मों को समान सम्मान दिया जाता है।

लोकतांत्रिक

लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है और अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है।

गणराज्य

गणराज्य में राष्ट्राध्यक्ष जनता द्वारा चुना जाता है और पद वंशानुगत नहीं होता।

न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व

ये भारतीय संविधान के मूल आदर्श हैं जो नागरिकों के सम्मानपूर्ण और समान जीवन को सुनिश्चित करते हैं।

निष्कर्ष

भारतीय संविधान हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है। यह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है, सरकार की शक्तियों को सीमित करता है और न्याय, स्वतंत्रता, समानता तथा बंधुत्व जैसे मूल्यों को बढ़ावा देता है।

भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं बल्कि भारत के आदर्शों, संघर्षों और आकांक्षाओं का जीवंत प्रतीक है। :contentReference[oaicite:16]{index=16}

• संविधान सरकार की संरचना और कार्यों को निर्धारित करता है।

• संविधान नागरिकों के अधिकार और कर्तव्यों को स्पष्ट करता है।

• संविधान सरकार के विभिन्न अंगों के बीच संतुलन बनाए रखता है।

• विधायिका कानून बनाने का कार्य करती है।

• कार्यपालिका कानून लागू करने का कार्य करती है।

• न्यायपालिका कानून की व्याख्या और न्याय प्रदान करती है।

• भारतीय संविधान समानता, न्याय और स्वतंत्रता के आदर्शों पर आधारित है।

• संविधान देश के दीर्घकालिक लक्ष्यों और आकांक्षाओं को दर्शाता है।

• संविधान सभा का गठन वर्ष 1946 में किया गया था।

• संविधान सभा में प्रारंभ में 389 सदस्य थे।

• विभाजन के बाद संविधान सभा में 299 सदस्य रह गए थे।

• संविधान सभा में 15 महिलाएँ भी शामिल थीं।

• डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे।

• प्रारूप समिति संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति थी।

• डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे।

• भारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 को तैयार हुआ।

• संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।

• 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।

• भारतीय स्वतंत्रता संग्राम ने संविधान को गहराई से प्रभावित किया।

• समानता, न्याय और बंधुत्व संविधान के प्रमुख आदर्श हैं।

• भारतीय संस्कृति और सभ्यता की विरासत संविधान में दिखाई देती है।

• “वसुधैव कुटुंबकम” भारतीय विचारधारा का महत्वपूर्ण सिद्धांत है।

• “सर्वे भवन्तु सुखिनः” सभी के कल्याण का संदेश देता है।

• भारतीय संविधान ने अन्य देशों के संविधानों से भी प्रेरणा ली।

• स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व फ्रांस से प्रेरित आदर्श हैं।

• नीति-निर्देशक तत्व आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं।

• स्वतंत्र न्यायपालिका की अवधारणा अमेरिका से प्रेरित है।

• संविधान एक जीवंत दस्तावेज माना जाता है।

• संविधान संशोधन समय के अनुसार परिवर्तन की अनुमति देता है।

• 42वाँ संविधान संशोधन 1976 में किया गया था।

• “समाजवादी” और “पंथनिरपेक्ष” शब्द 42वें संशोधन से जोड़े गए।

• मौलिक अधिकार नागरिकों को महत्वपूर्ण स्वतंत्रताएँ प्रदान करते हैं।

• समानता का अधिकार सभी को कानून के समक्ष समान मानता है।

• स्वतंत्रता का अधिकार विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है।

• शिक्षा का अधिकार बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार देता है।

• मौलिक कर्तव्य नागरिकों की जिम्मेदारियाँ बताते हैं।

• राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना नागरिक का कर्तव्य है।

• पर्यावरण संरक्षण नागरिकों का महत्वपूर्ण कर्तव्य है।

• नीति-निर्देशक तत्व सरकार के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत हैं।

• अनुच्छेद 38 सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय पर बल देता है।

• अनुच्छेद 47 पोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के संवर्धन पर बल देता है।

• उद्देशिका संविधान के मूल आदर्शों और मूल्यों को दर्शाती है।

• “हम भारत के लोग” उद्देशिका के प्रारंभिक शब्द हैं।

• संप्रभु का अर्थ है कि भारत किसी बाहरी शक्ति के अधीन नहीं है।

• समाजवादी सामाजिक और आर्थिक समानता पर बल देता है।

• पंथनिरपेक्ष का अर्थ है कि राज्य सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करता है।

• लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता सर्वोच्च होती है।

• गणराज्य में राष्ट्राध्यक्ष निर्वाचित होता है।

• न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व उद्देशिका के प्रमुख आदर्श हैं।

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