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Chapter Chapter 2. सजीव जगत में विविधता Class 6 Science Curiosity CBSE notes in hindi CBSE Full Notes - CBSE Study

Chapter Chapter 2. सजीव जगत में विविधता Science Curiosity Class 6 cbse notes CBSE Full Notes in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter Chapter 2. सजीव जगत में विविधता Class 6 Science Curiosity CBSE notes in hindi CBSE Full Notes - CBSE Study

कक्षा 6 Science Curiosity के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 2. सजीव जगत में विविधता को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक CBSE Full Notes को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Science Curiosity में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 6 English Medium Science Curiosity All Chapters:

Chapter 2. सजीव जगत में विविधता

2. CBSE Full Notes

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Chapter 2. सजीव जगत में विविधता

इस अध्याय में आपने अपने आसपास पाए जाने वाले पौधों एवं जंतुओं की विविधता, उनके वर्गीकरण तथा उनकी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया। पृथ्वी पर पाए जाने वाले प्रत्येक जीव की अपनी विशेष पहचान होती है। इन्हीं विशेषताओं के आधार पर वैज्ञानिक जीवों को विभिन्न समूहों में वर्गीकृत करते हैं। इस अध्याय में पौधों के प्रकार, पत्तियों के शिरा-विन्यास, जड़ों के प्रकार तथा बीजपत्रों के आधार पर पौधों के वर्गीकरण को विस्तार से समझाया गया है।

Detailed Notes (विस्तृत अध्ययन नोट्स)

यह अध्याय विद्यार्थियों को प्रकृति का अवलोकन करना, जीवों की समानताओं एवं भिन्नताओं को पहचानना तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उनका अध्ययन करना सिखाता है। वर्गीकरण के माध्यम से लाखों प्रकार के जीवों का अध्ययन सरल एवं व्यवस्थित हो जाता है।

सजीव जगत में विविधता (Diversity in Living World)

हमारे आसपास अनेक प्रकार के पौधे, पशु, पक्षी, कीट तथा अन्य जीव पाए जाते हैं। सभी जीव आकार, रंग, भोजन, रहने के स्थान, चलने-फिरने के तरीके तथा अन्य विशेषताओं में एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। इन्हीं भिन्नताओं के कारण पृथ्वी पर जैव विविधता दिखाई देती है।

उदाहरण के लिए, कुछ पौधे छोटे होते हैं जबकि कुछ बहुत बड़े होते हैं। कुछ पक्षी उड़ सकते हैं, जबकि कुछ केवल चल सकते हैं। मछलियाँ जल में रहती हैं, जबकि ऊँट मरुस्थल में रहने के लिए अनुकूलित होते हैं।

जैव विविधता (Biodiversity)

किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले सभी प्रकार के पौधों, जंतुओं तथा सूक्ष्मजीवों की विविधता को जैव विविधता कहते हैं। प्रत्येक जीव प्रकृति में अपना महत्वपूर्ण कार्य करता है। यदि किसी एक जीव की संख्या बहुत कम हो जाए या वह समाप्त हो जाए, तो इसका प्रभाव पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है।

जैव विविधता का महत्व

  • पर्यावरण का संतुलन बनाए रखती है।
  • खाद्य श्रृंखला को बनाए रखती है।
  • प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करती है।
  • मानव जीवन के लिए भोजन, औषधि एवं अन्य संसाधन उपलब्ध कराती है।

जीवों का वर्गीकरण (Classification of Living Organisms)

पृथ्वी पर लाखों प्रकार के जीव पाए जाते हैं। यदि इन सभी का अलग-अलग अध्ययन किया जाए, तो यह अत्यंत कठिन होगा। इसलिए वैज्ञानिक समान विशेषताओं वाले जीवों को एक ही समूह में रखते हैं। इस प्रक्रिया को वर्गीकरण कहते हैं।

वर्गीकरण के लाभ

  • जीवों की पहचान आसान होती है।
  • अध्ययन व्यवस्थित एवं सरल हो जाता है।
  • समानताओं एवं भिन्नताओं को समझना आसान होता है।
  • नए जीवों की पहचान करने में सहायता मिलती है।

पौधों का वर्गीकरण

पौधों को उनकी ऊँचाई, तने की प्रकृति तथा शाखाओं के आधार पर पाँच प्रमुख समूहों में बाँटा जाता है।

1. शाक (Herbs)

शाक छोटे आकार के पौधे होते हैं। इनके तने हरे, मुलायम तथा कोमल होते हैं।

उदाहरण: पालक, धनिया, टमाटर, गेहूँ, धान।

2. झाड़ी (Shrubs)

झाड़ियाँ मध्यम ऊँचाई के पौधे होते हैं। इनके तने कठोर होते हैं तथा शाखाएँ भूमि के निकट से निकलती हैं।

उदाहरण: गुलाब, तुलसी, मेहंदी।

3. वृक्ष (Trees)

वृक्ष बड़े एवं ऊँचे पौधे होते हैं। इनका तना मोटा, कठोर तथा लकड़ी जैसा होता है। शाखाएँ भूमि से कुछ ऊँचाई पर निकलती हैं।

उदाहरण: आम, नीम, बरगद, पीपल।

4. आरोही लता (Climbers)

इन पौधों के तने कमजोर होते हैं। ये स्वयं सीधे खड़े नहीं रह सकते, इसलिए सहारे के साथ ऊपर चढ़ते हैं।

उदाहरण: अंगूर, मटर, मनी प्लांट।

5. विसर्पी लता (Creepers)

इन पौधों के तने अत्यंत कमजोर होते हैं। ये भूमि पर फैलकर बढ़ते हैं।

उदाहरण: कद्दू, तरबूज, खरबूजा।

पत्तियों का शिरा-विन्यास (Leaf Venation)

पत्तियों में दिखाई देने वाली महीन रेखाओं को शिराएँ कहते हैं। इन शिराओं की व्यवस्था को शिरा-विन्यास कहते हैं।

जालिकारूपी शिरा-विन्यास

इस प्रकार की पत्तियों में शिराएँ जाल जैसी दिखाई देती हैं।

उदाहरण: आम, गुलाब, गेंदा, सरसों।

समांतर शिरा-विन्यास

इस प्रकार की पत्तियों में शिराएँ एक-दूसरे के समानांतर होती हैं।

उदाहरण: गेहूँ, धान, मक्का, केला।

जड़ों के प्रकार

जड़ पौधे का वह भाग है जो उसे मिट्टी में मजबूती से पकड़कर रखता है तथा जल एवं खनिजों का अवशोषण करता है।

मूसला जड़ (Tap Root)

इसमें एक मुख्य जड़ होती है, जिससे छोटी-छोटी पार्श्व जड़ें निकलती हैं।

उदाहरण: सरसों, मूली, गाजर, चना।

रेशेदार जड़ (Fibrous Root)

इसमें अनेक समान आकार की पतली जड़ें होती हैं तथा कोई मुख्य जड़ नहीं होती।

उदाहरण: गेहूँ, धान, मक्का, घास।

बीजपत्रों के आधार पर पौधों का वर्गीकरण

बीज के भीतर उपस्थित भोजन संग्रह करने वाले भाग को बीजपत्र (Cotyledon) कहते हैं। बीजपत्रों की संख्या के आधार पर पौधों को दो समूहों में बाँटा जाता है।

एकबीजपत्री पौधे (Monocot Plants)

  • एक बीजपत्र होता है।
  • समांतर शिरा-विन्यास पाया जाता है।
  • रेशेदार जड़ होती है।
  • उदाहरण: गेहूँ, धान, मक्का।

द्विबीजपत्री पौधे (Dicot Plants)

  • दो बीजपत्र होते हैं।
  • जालिकारूपी शिरा-विन्यास पाया जाता है।
  • मूसला जड़ होती है।
  • उदाहरण: चना, मटर, सरसों, आम।

जालिकारूपी शिरा-विन्यास एवं मूसला जड़ का संबंध

सामान्यतः जिन पौधों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास पाया जाता है, उनमें मूसला जड़ होती है। ऐसे पौधे प्रायः द्विबीजपत्री होते हैं।

समांतर शिरा-विन्यास एवं रेशेदार जड़ का संबंध

सामान्यतः जिन पौधों में समांतर शिरा-विन्यास पाया जाता है, उनमें रेशेदार जड़ होती है। ऐसे पौधे प्रायः एकबीजपत्री होते हैं।

प्रकृति संरक्षण का महत्व

प्रत्येक जीव प्रकृति के संतुलन के लिए आवश्यक है। इसलिए पौधों एवं जंतुओं को अनावश्यक नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए। जैव विविधता का संरक्षण करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

याद रखने योग्य बातें

  • जैव विविधता पृथ्वी की सबसे बड़ी प्राकृतिक संपदा है।
  • वर्गीकरण अध्ययन को सरल बनाता है।
  • शाक, झाड़ी, वृक्ष, आरोही लता एवं विसर्पी लता पौधों के प्रमुख समूह हैं।
  • जालिकारूपी शिरा-विन्यास → मूसला जड़ → द्विबीजपत्री।
  • समांतर शिरा-विन्यास → रेशेदार जड़ → एकबीजपत्री।
  • प्रत्येक जीव पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है।

Chapter Summary (अध्याय सारांश)

इस अध्याय में जीव-जगत की विविधता, जैव विविधता का महत्व, जीवों के वर्गीकरण की आवश्यकता, पौधों के प्रमुख प्रकार, पत्तियों के शिरा-विन्यास, जड़ों के प्रकार तथा एकबीजपत्री एवं द्विबीजपत्री पौधों की विशेषताओं का अध्ययन किया गया। इन सभी अवधारणाओं की सहायता से विद्यार्थियों को जीवों की पहचान, तुलना तथा वैज्ञानिक वर्गीकरण को समझने में सुविधा होती है।

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