Chapter Chapter 9. पर्यावरण और धारणीय विकास Class 12 Economics-II CBSE notes in hindi धारणीय विकास का अर्थ एवं कार्य - CBSE Study
कक्षा 12 Economics-II के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 9. पर्यावरण और धारणीय विकास को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक धारणीय विकास का अर्थ एवं कार्य को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Economics-II में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।
CBSE NOTES:
Class 12 English Medium Economics-II All Chapters:
Chapter 9. पर्यावरण और धारणीय विकास
1. धारणीय विकास का अर्थ एवं कार्य
धारणीय विकास : ऐसा विकास पर्यावरण को बिना नुकसान पहुँचाए हो और आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदुषणरहित हो जो भावी पीढ़ी के लिए स्वच्छ एवं अधिक संसाधन उपलब्ध कर सके तो इसे धारणीय विकास कहते हैं |
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन द्वारा धारणीय विकास की परिभाषा :
"ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं पूर्ति भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति में बिना समझौता किए पूरा करे |"
ब्रूटलैंड कमीशन द्वारा धारणीय विकास की परिभाषा : "हमारा नैतिक दायित्व है कि वर्त्तमान पीढ़ी को आगामी पीढ़ी द्वारा एक बेहतर पर्यावरण उतराधिकार के रूप में सौपा जाना चाहिए | कम से कम हमें आगामी पीढ़ी के जीवन के लिए अच्छी गुणवता वाली परिसंपतियों का भंडार छोड़ना चाहिए, जो कि हमें अपने पिछली पीढ़ी से विरासत के रूप में प्राप्त हुआ है |"
धारणीय विकास एवं आर्थिक विकास में अन्तर :
धारणीय विकास :
(i) धारणीय विकास में प्रति व्यक्ति वास्तविक आय में दीर्घकालीन वृद्धि होती है |
(ii) इससे वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के आर्थिक कल्याण में वृद्धि होती है |
(iii) यह पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदुषण से बचाव पर विशेष बल देती है |
(iv) इसमें प्राकृतिक पूँजी का उचित प्रयोग होता है जिससे भावी पीढ़ियों के हितों की रक्षा की जा सके |
आर्थिक विकास :
(i) इसमें प्रति व्यक्ति आय में दीर्घकालिक वृद्धि होती है |
(ii) इसमें वर्त्तमान पीढ़ियों के आर्थिक कल्याण में वृद्धि होती है |
(iii) यह पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदुषण को महत्व नहीं देती है |
(iv) इसमें प्राकृतिक पूँजी का शोषण होता है |
धारणीय विकास के लिए अनिवार्य शर्ते :
(i) मानव जनसँख्या को पर्यावरण की धारण क्षमता के स्तर तक सिमित करना |
(ii) प्रौद्योगिकी प्रगति आगत-कुशल होना चाहिए न कि आगत का उपभोग करने वाली |
(iii) नवीकरणीय संसाधनों की प्राप्ति धारणीय आधार पर की जानी चाहिए |
(iv) गैर-नवीकरणीय संसाधनों के रिक्तिकरण की दर नवीकरणीय प्रतिस्थापकों की संवृद्धि की दर से अधिक नहीं होनी चाहिए |
(v) प्रदुषण से उत्पन्न अक्षमताओं का सुधार किया जाना चाहिए |
धारणीय विकास की प्राप्ति के उपाय :
(i) अधिक से अधिक उर्जा के गैर-परंपरागत स्रोतों का उपयोग |
(ii) बायोमास ईंधन के उपयोग के बजाय गैसों का प्रयोग |
(iii) वन विनाश पर रोक |
(iv) अधिक से अधिक जलीय विद्युत संयंत्रों की स्थापना |
(v) पारंपरिक व्यवहारों का उपयोग ताकि पर्यावरण की अनुकूलता बनी रहे |
(vi) कृषि के लिए जैविक कम्पोस्ट का उपयोग और जैविक कृषि को बढ़ावा |