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Chapter Chapter 8. आधारिक संरचना Class 12 Economics-II CBSE notes in hindi आधारित संरचना की अवधारणा - CBSE Study

Chapter Chapter 8. आधारिक संरचना Economics-II Class 12 cbse notes आधारित संरचना की अवधारणा in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter Chapter 8. आधारिक संरचना Class 12 Economics-II CBSE notes in hindi आधारित संरचना की अवधारणा - CBSE Study

कक्षा 12 Economics-II के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 8. आधारिक संरचना को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक आधारित संरचना की अवधारणा को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Economics-II में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 12 English Medium Economics-II All Chapters:

Chapter 8. आधारिक संरचना

1. आधारित संरचना की अवधारणा

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आधारित संरचना : 

किसी अर्थव्यवस्था की उत्पादन गतिविधियों की वह सहयोगी व्यवस्था जो आर्थिक और सामाजिक परिवर्तनों के मूल तत्व को प्रकट करती है और सहायता का कार्य करती है |

अन्य शब्दों में, 

किसी अर्थव्यवस्था कि उत्पादन गतिविधियों में सहायक वे सभी सेवाएँ एवं सुविधाएँ जो विकास में सहयोगी होती हैं, आधारित संरचना कहलाती है | जैसे - सड़क, परिवहन, संचार, भवन, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की व्यवस्था, उर्जा या बिजली इत्यादि |  

आधारित संरचना के प्रकार/श्रेणी :

(i) आर्थिक आधारित संरचना : वे सभी तत्व जो आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ है और उनके वृद्धि में सहायक है आर्थिक आधारित संरचना कहलाती हैं | जैसे - ऊर्जा, परिवहन और संचार आदि |  

(ii) सामाजिक आधारित संरचना : आधारित संरचना के वे सभी तत्व जो सामाजिक गतिविधियों के विस्तार एवं विकास में सहायक है तथा सहयोगी भूमिका अदा करती हैं | सामाजिक आधारित संरचना कहलाती हैं | जैसे - स्वास्थ्य एवं शिक्षा के लिए स्कूल एवं हॉस्पिटल और आवास इत्यादि | 

आर्थिक आधारित संरचना एवं सामाजिक आधारित संरचना में अंतर : 

आर्थिक आधारित संरचना : 

(i) आर्थिक आधारित संरचना के अंतर्गत ऊर्जा, परिवहन, दूरसंचार इत्यादि को सम्मिलित किया जाता है |

(ii) यह प्रत्यक्ष रूप से उत्पादन एवं लोगों की विकास में सहायक होते हैं |

(iii) इनके उपयोग से उत्पादकता में वृद्धि होती है जिसके कारण उत्पादन लागत कम  हो जाता है |

(iv) ये भौतिक पूँजी के भंडार होते हैं | 

सामाजिक आधारित संरचना :

(i) इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, एवं आवास आदि सुविधाओं को शामिल किया है |

(ii) यह अप्रत्यक्ष रूप से उत्पादन में सहायक है |

(iii) इसमें मानव संसाधन की गुणवता एवं कौशल में सुधार होता है |

(iv) इससे मानव पूँजी का निर्माण होता है | 

आधारित संरचना के प्रभाव : 

(i) आधारित संरचना आर्थिक विकास को प्रेरित करती है |

(ii) आधारित संरचना उत्पादकता को प्रभावित करती है |

(iii) आधारित संरचना उत्पादन के स्रोतों में संयोजन का अकरी करती है |

(iv) आधारित संरचना कार्य करने की दक्षता को बढाता है |

(v) आधारित संरचना निवेश को प्रेरित करती है | 

(vi) आधारित संरचना आउटसौर्सिंग के लिए सुविधा प्रदान करती है एवं आधारित संरचना के केंद्र के रूप में कार्य करता है | 

(vii) जहाँ आधारित संरचना मजबूत है वहाँ FDI को बढ़ावा मिलता है |

ऊर्जा का महत्त्व : 

किसी भी देश की विकास के लिए ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्थान है | इसका प्रत्येक क्षेत्र में आर्थिक क्रियाओं का संचालन और विकास के लिए ऊर्जा बहुत ही आवश्यक है | 

(i) उत्पादन क्रिया जैसे उद्योग, व्यवसाय आदि में ऊर्जा के बिना कल्पना किया भी नहीं सकता है | 

(ii) कृषि में ऊर्जा का उपयोग अब बड़े पैमाने पर हो रहा है | इसमें कई मशीनें जैसे ट्रेक्टर, थ्रेसर आदि को चलाने के लिए और सिंचाई के लिए आजकल ऊर्जा की जरुररत होती है | 

(iii) अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्र जिसमें सेवा क्षेत्र शामिल है का विकास उर्जा पर निर्भर करता है | उदाहरण के लिए परिवहन, बैंकिंग बीमा आदि | 

(iv) सुचना एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र तो सौ फीसदी ऊर्जा पर ही निर्भर है | विकास की कल्पना ऊर्जा के बिना संभव नहीं है | 

ऊर्जा के प्रकार : 

(i) व्यावसायिक ऊर्जा 

(ii) गैर-व्यावसायिक ऊर्जा 

(i) व्यावसायिक ऊर्जा : वह ऊर्जा जिसके लिए उपभोक्ता को कीमत अदा करनी पड़ती है तथा व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए कारखानों, खेतों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में प्रयोग किया जाता है | उदाहरण कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और विद्युत आदि | 

(ii) गैर व्यावसायिक ऊर्जा : ऊर्जा के वे सभी स्रोत जिनके लिए उपभोक्ता को कोई कीमत अदा नहीं करनी पड़ती है | गैर-व्यावसायिक ऊर्जा कहलाता है | गैर व्यावसायिक ऊर्जा का उपयोग मुख्यत: धरेलू तथा उपभोग के उद्देश्य के लिए किया जाता है | इसमें लकड़ी, गोबर, आदि शामिल है | 

भारत में ऊर्जा का वितरण : 

भारत में कुल ऊर्जा का आधे से अधिक भाग लगभग (65 प्रतिशत ) की आपूर्ति व्यावसायिक ऊर्जा होती है जबकि शेष 35 प्रतिशत ऊर्जा की आपूर्ति गैर व्यावसायिक ऊर्जा से होती है | व्यावसायिक ऊर्जा में कोयले का प्रमुख स्थान है जो कुल व्यावसायिक ऊर्जा का 55 % है | जल विद्युत को छोड़कर सभी व्यावसायिक ऊर्जा के स्रोत समाप्त हो जाते है | गैर व्यावसायिक ऊर्जा नवीकरणीय है इसका पुन: नवीकरण किया जा सकता है | 

व्यावसायिक ऊर्जा एवं गैर व्यावसायिक ऊर्जा में अंतर :

व्यावसायिक ऊर्जा : 

(i) व्यावसायिक ऊर्जा का उपयोग उत्पादन क्रियाओं जैसे उद्योग कृषि एवं व्यावसायिक क्रियाओं में किया जाता है | 

(ii) व्यावसायिक उर्जा में कोयला, पेट्रोलियम, विद्युत आदि शामिल है |

(iii) व्यावसायिक ऊर्जा की कीमत चुकानी पड़ती है |

गैर-व्यावसायिक ऊर्जा :

(i) गैर-व्यावसायिक ऊर्जा का उपयोग घरेलु उपभोग के लिए किया जाता है | 

(ii) इसमें लकड़ी एवं गोबर आदि शामिल है |

(iii) इसकी कोई कीमत नहीं चुकानी पड़ती है |

उर्जा के परंपरागत स्रोत : ऊर्जा के वे स्रोत जिनका मनुष्य लंबे समय से उपयोग करता आ रहा है | ऊर्जा के परंपरागत स्रोत कहलाते हैं | कोयला, पेट्रोलियम, बिजली इत्यादि |

ऊर्जा के गैर परम्परागत स्रोत : ऊर्जा के वे स्रोत जिनका उपयोग करना मनुष्यों ने हाल ही में सिखा है अथवा हाल के समयों से उपयोग कर रहे हैं | ऊर्जा के गैर परम्परागत स्रोत कहलाते हैं |

उदाहरण : सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, और बायोमास इत्यादि |

ऊर्जा के परंपरागत और गैर-परंपरागत स्रोतों में अंतर :

ऊर्जा के परंपरागत स्रोत :

(i) इनका प्रयोग बहुत लंबे समय से हो रहा है |

(ii) ये समाप्त होने वाले होते है और भंडारण सिमित होता है |

(iii) इन स्रोतों से ऊर्जा का निर्माण बड़े पैमाने पर किया जा सकता है |

(iv) ये पर्यावरण को नुकसान पहुँचाते हैं |

(v)  उदाहरण : कोयला, पेट्रोलियम, बिजली इत्यादि | 

ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोत :

(i) इनका प्रयोग हाल ही के समयों से हो रहा है |

(ii) ये समाप्त नहीं होते हैं और इनका असिमित भंडार है |

(iii) इन स्रोतों का प्रयोग छोटे पैमाने पर ऊर्जा निर्माण में किया जा सकता है |

(iv) ये पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाते  हैं |

(v) उदाहरण : सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, और बायोमास इत्यादि |

ऊर्जा के परंपरागत स्रोत के  अंतर्गत निम्नलिखित स्रोत हैं : 

(i) कोयला : भारत में प्राथमिक स्रोत के रूप में कोयला ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है कोयला उत्पादन में चीन और अमेरिका के बाद भारत का तीसरा स्थान है | भारत में उत्पादित कुल ऊर्जा का 65 - 67 प्रतिशत आपूर्ति कोयले से होती है | इससे ताप विद्युत स्टेशन चलाए जाते हैं तथा सीमेंट उद्योग, स्टील प्लांट और ईंट भटठे के उद्योग उपयोग होता है | 

(ii) पेट्रोलियम : पेट्रोलियम का भारत में एक महत्वपूर्ण स्थान है और इसकी मांग कि तुलना में भारत में उत्पादन बहुत कम है | इसलिए पेट्रोलियम की माँग को पूरा करने के लिए भारत इसकी आयात करता है | 

(iii) प्राकृतिक गैस : आजकल प्राकृतिक गैस का उपयोग काफी बढ़ गया है | यह घरेलु ईंधन का एक महत्वपूर्ण साधन है | CNG जैसे प्राकृतिक गैस का उपयोग अब वाहनों में भी होने लगा है | प्राकृतिक गैस का प्रमुख भंडार मुंबई, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश में पाए जाते है | 

(iv) विद्युत ऊर्जा 

(a) तापीय विद्युत : भारत में जितने भी तापीय विद्युत संयंत्र है इनकी निर्भरता कोयले तथा तेल पर है | जिसमें कोयले से विद्युत उत्पादन तेल कि तुलना में सबसे अधिक है | 

(b) जल विद्युत ऊर्जा (Hydro-electrocity) : जल विद्युत ऊर्जा की भूमिका भारत में बहुत ही महत्त्वपूर्ण है | इसका उत्पादन तेज प्रवाह वाली नदियों पर डैम बनाकर किया जाता है | इस परियोजना को बहुउदेशीय नदी घाटी परियोजना कहते हैं | भारत में ऊर्जा उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 20 % है | 

(c) परमाणु ऊर्जा : भारत परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में काफी विकास किया है | परन्तु इस पर निर्भरता अभी बहुत ही कम है | देश में कई परमाणु उर्जा संयंत्र स्थापित किया जा चूका है | जैसे नरोरा परमाणु संयंत्र (ऊतरप्रदेश), तारापुर स्टेशन मुंबई, कलपकम स्टेशन तमिलनाडु | 

 

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