Chapter 5. अधिकार परिचय Class 11 Political Science-II CBSE notes in hindi अधिकार और दावें में अंतर - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 11 English Medium Political Science-II All Chapters:
5. अधिकार परिचय
2. अधिकार और दावें में अंतर
अधिकारों को शक्तिशाली बनाने के तरीके :-
(1)- लोकतंत्र
(2) संविधान द्वारा मान्यता
(3) स्वतंत्र न्यायपालिका
(4) कानून का शासन
(5) शक्तियों का विकेंद्रीकरण
(6) स्वतंत्र प्रेस
(7) सतत जागरूकता
अधिकारों पर प्रतिबंध के आधार :-
(1) सामाजिक हित
(2) अन्य व्यक्तियों के हित के लिए
(3)राज्य की सुरक्षा विकास तथा स्वतन्त्रता के लिए
कर्तव्य (जिम्मेदारी) :- कर्तव्य अंग्रेजी के duty शब्द से डेब्ट बना है जिसका अर्थ है ऋण राज्य नागरिको को अधिकार के रूप में अनेक देता है ये अधिकार नागरिक पर एक प्रकार से ऋण है इसको चुकाने के लिए नागरिक कर्तव्यों का पालन करते है | मनुष्य के अधिकारों को दूसरे मनुष्य के द्वारा मान्यता देना कर्तव्य है
अधिकार और दावे में अंतर
अधिकार :-
(1) प्रत्येक राज्य द्वारा अपने लोगो को कुछ अधिकार दिये जाते है अधिकार ऐसे सामाजिक व्यवस्था का नाम है जिनके बिना व्यक्ति पूर्ण रूप से विकास नहीं कर सकता |
(2) अधिकार राज्य द्वारा सुरक्षित होते है |
(3) अधिकार को लागू करने के लिये संविधान में आवश्यक व्यवस्था की जाती है |
(4) संविधान में अंकित अधिकारों को राज्य कि क़ानूनी मान्यता प्राप्त होती होती है |
(5) राज्य उन अधिकारो को लागू करता है एंवं उन अधिकारों कि अवहेलना करने वाले के विरुद्ध आवश्यक क़ानूनी कार्यवाही भी करता है |
दावे :-
(1) दावे वास्तव में व्यक्ति कि मांगे होती है जो मांगे नैतिक या समाजिक पक्ष में उचित हो जिनको समाज स्वीकार करता हो |
(2) दावें राज्य द्वारा सुरक्षित नहीं होते हैं |
(3) व्यक्ति कि प्रत्येक मांगे दावे नहीं हो सकती |
(4) केवल उस मांग को अधिकार का दर्जा दिया जाता है मांग राज्य द्वारा स्वीकार एव लागू कि जाती है |
(5) दावें को क़ानूनी चुनौती दी जा सकती है |