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Chapter 5. अधिकार परिचय Class 11 Political Science-II CBSE notes in hindi अधिकार की परिभाषा : - CBSE Study

Chapter 5. अधिकार परिचय Political Science-II Class 11 cbse notes अधिकार की परिभाषा : in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter 5. अधिकार परिचय Class 11 Political Science-II CBSE notes in hindi अधिकार की परिभाषा : - CBSE Study

कक्षा 11 Political Science-II के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण 5. अधिकार परिचय को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक अधिकार की परिभाषा : को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Political Science-II में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 11 English Medium Political Science-II All Chapters:

5. अधिकार परिचय

1. अधिकार की परिभाषा :

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अधिकार : 


किसी व्यक्ति के पास किसी विशिष्ट कार्य को करने अथवा किसी विशेष पद को ग्रहण करने कि क्षमता या योग्यता अथवा शक्ति है तो उसे उस व्यक्ति का विशिष्ट अधिकार कहते हैं | 

किसी व्यक्ति या व्यक्ति समूह द्वारा की गयी माँग जिसे सार्वजानिक कल्याण को ध्यान में रखते हुए समाज द्वारा स्वीकृति प्रदान की जाती है वह उस व्यक्ति या उस समूह का अधिकार कहलाता है | 

अधिकारों का प्रकार : 

अधिकार को तीन भागों में बाँटा गया है | 

(1) प्राकृतिक अधिकार 

(2) नैतिक अधिकार 

(3) क़ानूनी अधिकार 

अधिकारों की विशेषताएँ : 

(i) अधिकार असीमित नहीं होते हैं |

(ii) अधिकार समाज में ही संभव हो सकते हैं | 

(iii) अधिकार व्यक्ति का दावा है |

(iv) अधिकार किसी व्यक्ति का विशिष्ट कार्य करने की शक्ति है |

(v) अधिकार समाज द्वारा मान्य होता है |

(vi) अधिकार सर्वव्यापी होते हैं |

(vii) अधिकार राज्य द्वारा प्रदत एवं सुरक्षित होता है |

(viii) अधिकार के साथ कर्तव्य जुड़े होते हैं |

नागरिकों का देश के प्रति कर्तव्य : 

(i) नागरिक का प्रथम कर्तव्य अपने देश के प्रति वफ़ादारी है |

(ii) नागरिक का दूसरा कर्तव्य  कानून का पालन करना है | 

(iii) नागरिक का यह भी कर्तव्य है कि वह सार्वजानिक संपति की रक्षा करे | 

(iv) नागरिक का यह भी कर्तव्य है कि वह ईमानदारी से सरकारी करों का  भुगतान करे | 

1. प्राकृतिक अधिकार : वह अधिकार जो किसी व्यक्ति को प्राकृतिक रूप से प्राप्त है, प्राकृतिक अधिकार कहलाता है |

इसके अंतर्गत निम्नलिखित अधिकार शामिल हैं |

(क) स्वतंत्रता का अधिकार 

(ख) संपति का अधिकार 

(ग) जीवन जीने का अधिकार 

2. नैतिक अधिकार : वह अधिकार जो व्यक्ति के भावनाओं पर आधारित होते हैं, नैतिक अधिकार कहलाता है | इन अधिकारों को क़ानूनी मान्यता प्राप्त नहीं होता है | जैसे - एक गुरु का अपने शिष्य पर अधिकार, एक बाप पर अपने बेटे पर अधिकार इत्यादि परन्तु ऐसे अधिकार को क़ानूनी मान्यता नहीं मिली है | 

3. क़ानूनी अधिकार : वह अधिकार जो राज्य की मान्यता प्राप्त होती है और राज्य के कानून इन्हें लागु करते है क़ानूनी अधिकार कहलाते हैं | 

कानून से प्राप्त अधिकार निम्नलिखित हैं | 

(क) मौलिक अधिकार 

(ख) सामाजिक अधिकार 

(ग) राजनितिक अधिकार 

(घ) आर्थिक अधिकार 

अधिकार की आवश्यकता :

प्रत्येक व्यक्ति को अधिकार की आवश्यकता होती है क्योंकि 

(i) व्यक्ति के पूर्ण विकास के लिए अधिकार की आवश्यकता होती है | 

(ii) सामाजिक जीवन में अधिकार जीवन का महत्वपूर्ण पक्ष है |

(iii) अधिकार व्यक्ति के जीवन को सुरक्षा और सुदृढ़ता प्रदान करते हैं और उसे शोषण से बचाते है |

(iv) अधिकारों के बिना व्यक्ति न तो अपना आर्थिक प्रगति कर सकता है और न तो समाज प्रगति कर सकता है | 

कर्तव्य : सामाजिक जीवन कर्तव्य के बिना ठीक-ठाक नहीं चल सकता | सफल लोकतंत्र के लिए नागरिकों को अपने कर्तव्य के प्रति सचेत रहना चाहिए | 

"समाज ने हमें बहुत कुछ दिया है जिसके हम ऋणी है इसलिए कर्तव्य एक प्रकार का समाज के प्रति हमारा ऋण है जो हमें अधिकारों के बदले चुकाना पड़ता है | समाज के प्रति जो हमारी जिम्मेवारी है उसे ही कर्तव्य कहते है |  

कर्तव्य दो प्रकार का होता है |

(1) नैतिक कर्तव्य : वह कर्तव्य जो किसी के द्वारा लादा नहीं जाता अपितु व्यक्ति के भावनाओं से उत्पन्न कर्तव्य होता है जिसे एक व्यक्ति जिम्मेवारी के रूप में निर्वाह करता है |  

     (i) चरित्र : प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने चरित्र का निर्माण करे और समाज में नैतिक विकास के लिए सदाचारी बने | 

     (ii) सेवा : प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने माता-पिता, गुरुजन, अपने से बड़ों, का आदर एवं सम्मान करे उनकी सेवा करे | गरीब, असहाय, अनाथ एवं दिन-दुखियों जितना संभव हो मदद करे और सेवा करे | 

(2) क़ानूनी कर्तव्य : कानून  द्वारा प्रदत कर्तव्य को क़ानूनी कर्तव्य कहते है | यह देशभक्ति और देश सेवा से जुड़ा होता है | लोकतंत्र में अपने मताधिकार के प्रयोग द्वारा सही सरकार की चुनाव करे यह भी उसका क़ानूनी कर्तव्य है |  

     (i) देश भक्ति : प्रत्येक नागरिक के लिए प्रथम कर्तव्य यह है कि वह अपने देश के प्रति वफादार हो और देशभक्ति उसकी देश सेवा के जुडी होती है जो कि एक राज्य के नागरिक का कर्तव्य है | 

     (ii) मताधिकार का प्रयोग : प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि उचित और लोकतान्त्रिक सरकार के चुनाव करने के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग करे ताकि गलत और अलोकतांत्रिक सरकार शासन में नहीं आ सके | 

     (iii) आय कर चुकाना : लोकतंत्र में सरकारें जनता द्वारा चुकाए गए करों से ही चलता है | अत: प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह ईमानदारी से अपने आय पर कर चुकाए | 

 

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