Chapter 4. सामाजिक न्याय Class 11 Political Science-II CBSE notes in hindi राल्स का न्याय सिद्धांत - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 11 English Medium Political Science-II All Chapters:
4. सामाजिक न्याय
3. राल्स का न्याय सिद्धांत
राल्स का न्याय सिद्धांत : व्यक्ति स्वाभाविक रूप से अपने स्वयं के हितों से प्रेरित होते हैं | वे ऐसी सामाजिक एवं राजनितिक व्यवस्था को स्वीकार करेंगे जो उनके हितों के अनुकूल होगी | जब कोई व्यक्ति राज्य के गठन के विषय में अपनी स्थिति स्पष्ट करता है तो उसमें अपने हितों को देखता है | वह स्पष्ट करता है कि उसकी आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति कैसी होगी | वे धनी होंगे या निर्धन होंगे | इसलिए उन्हें एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था का चयन करना चाहिए जो न्यायपूर्ण हो एवं चयन के बाद उन्हें ऐसा न लगे कि किसी अलाभकारी स्थित का सामना करना पड़ेगा |
जॉन राल्स द्वारा प्रस्तुत न्याय के सिद्धांत निम्नलिखित है |
(1) व्यापक आधारभूत स्वतंत्रता का सिद्धांत : न्याय का यह प्रथम सिद्धांत है जो स्वतंत्रता से सम्बंधित है | इस सिद्धांत के अनुसार सभी आधारभूत स्वतंत्रताएँ जैसे आर्थिक स्वतंत्रता, निजी स्वतंत्रता, बौद्धिक स्वतंत्रता और राजनितिक स्वतंत्रता इत्यादि शामिल है जिस पर प्रत्येक व्यक्ति का सामान अधिकार है |
(2) अवसर की समानता का सिद्धांत : प्रत्येक व्यक्ति को इच्छित पद, आय और संपदा प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया जाना चाहिए |
(3) आय का पुनर्वितरण का सिद्धांत : बाजार अर्थव्यवस्था का स्वाभाविक परिणाम आय और संपदा का असमान वितरण है | अर्थात बाजार अर्थव्यवस्था में ऐसा देखा जाता है कि जो आमिर है वो और आमिर हो जाता है और जो गरीब है वो और भी गरीब हो जाता है | इसलिए जॉन राल्स की मान्यता है कि ऐसी स्थिति में आय और संपदा का पुनर्वितरण होना चाहिए ताकि उच्च आय वर्ग से निम्न आय वर्ग की ओर आय निरंतर बहाव होता रहे | अत: सिमित आय एवं संसाधनों से यदि कुछ लोग संपन्न हो जाते है तो कुछ लोग गरीब भी हो जाते है | अत: प्रतिस्पर्धी बाजार अर्थव्यवस्था से उत्पन्न असमानता को कम करने के लिए गरीबों की क्षतिपूर्ति करना आवश्यक है |
सामाजिक न्याय के तत्व :
(i) व्यक्ति की स्वतंत्रता तथा समाज का व्यापक कल्याण
(ii) निष्पक्षता की कसौटी
(iii) आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति
(iv) विशेष स्थितियों में जनता को आर्थिक सहायता प्रदान करना अर्थात सकारात्मक कार्यवाई
(v) संरक्षात्मक भेद-भाव : समाज का वह वर्ग
भारत में सामाजिक न्याय स्थापित करने के लिए किए गए उपाय :
(i) सदियों से शोषण के शिकार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जन जाति के लिए नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान |
(ii) गरीब, असहाय एवं बेरोजगारों के लिए भारत सरकार द्वारा चलाया गया अनेक कार्यक्रम जैसे अन्तयोदय योजना, काम के बदले अनाज, मनरेगा जैसी योजनायें से बहुत से लोग लाभान्वित हुए हैं |
(iii) केन्द्रीय तथा राज्य विधायिकाओं में अनुसूचित जाति एवं जन जाति के लिए सीटों का आरक्षण इत्यादि |
(iv) वर्त्तमान में इन वंचित समुदायों के लिए व्यवसाय में आर्थिक मदद, उद्योग के लिए कम मूल्य और छुट में जमीन मुहैया कराना, और सरकार का उदारवादी रवैया आदि सामाजिक न्याय का उदाहरण है |