Chapter 4. सामाजिक न्याय Class 11 Political Science-II CBSE notes in hindi न्यायपूर्ण बँटवारा - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 11 English Medium Political Science-II All Chapters:
4. सामाजिक न्याय
2. न्यायपूर्ण बँटवारा
न्याय के दो आयाम :
(i) न्याय का क़ानूनी पक्ष : न्याय का क़ानूनी पक्ष का अर्थ है कि न्याय कानून के द्वारा और कानून के अनुसार मिलना चाहिए | इसका अर्थ यह है कि कानून न्यायपूर्ण तरीके से लागु हो और उसी कानून के अनुसार सबकों न्याय मिले |
(ii) न्याय का सामाजिक पक्ष : न्याय के सामाजिक पक्ष को दो स्तरों में लिया जाता है, पहला स्तर है सिमित तथा दूसरा स्तर है व्यापक |
सिमित स्तर का अर्थ है व्यक्ति के व्यक्तिगत संबंधों में व्याप्त अन्याय के सुधार से है जबकि व्यापक स्तर से अर्थ है सामाजिक जीवन के पहलुओं जैसे - राजनितिक, सामाजिक तथा आर्थिक जीवन में व्याप्त व्यापक असंतुलनों को दूर करने से है |
न्यायपूर्ण बँटवारा : सामाजिक न्याय का वास्ता वस्तुओं एवं सेवाओं के न्यायोचित बँटवारे से भी है | चाहे यह राष्ट्रों के मध्य वितरण का मामला हो अथवा किसी समाज के भीतर विभिन्न समूहों और व्यक्तियों के मध्य का हो | अगर समाज में गंभीर समाजिक अथवा आर्थिक असमानताएँ हैं, तो यह आवश्यक होगा कि समाज के कुछ मुख्य संसाधनों का पुनर्वितरण हो जिससे वंचित नागरिकों को जीने के लिए समतल धरातल मिल सके |
न्यायपूर्ण बँटवारे अर्थ है कि समाज में वस्तुओं एवं सेवाओं का इस प्रकार बँटवारा हो ताकि समाज में सामाजिक न्याय एवं आर्थिक न्याय को बढ़ावा मिले और वंचितों को उनका अपना हक़ मिल सके |
अनुपातिक न्याय : अनुपातिक न्याय अर्थात समान व्यक्तियों के साथ समान और असमान व्यक्तियों के साथ असमान व्यवहार करना है | अरस्तु के अनुसार किसी व्यक्ति को कितने अधिकार और पुरस्कार दिए जाने चाहिए यह इस बात के अनुरूप हो कि उस व्यक्ति की क्या उपयोगिता है और समाज के प्रति उसका कितना योगदान है | उसका कहना था कि "बासुरी केवल उन्हीं व्यक्तियों में बाँटनी चाहिए जो इसे बजाना जानते हों | शासन भी उन्हीं को करना चाहिए जो शासन करने के योग्य हो |
प्लेटों ने कहा कि "लोगों को सभी सुख प्राप्त करने की तर्कहीन इच्छा त्याग देनी चाहिए |
न्याय इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं है कि समाज के विभिन्न वर्ग केवल उन्हीं कार्यों को करें जिन्हें वे सर्वाधिक उपयुक्त रूप में कर सकते हैं और दुसरे के मामले में हस्तक्षेप न करें |