Chapter Chapter 1. व्यवसाय के आधार Class 11 Business Study CBSE notes in hindi उद्योगों का वर्गीकरण - CBSE Study
कक्षा 11 Business Study के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 1. व्यवसाय के आधार को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक उद्योगों का वर्गीकरण को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Business Study में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।
CBSE NOTES:
Class 11 English Medium Business Study All Chapters:
Chapter 1. व्यवसाय के आधार
2. उद्योगों का वर्गीकरण
उद्योगों का वर्गीकरण :
1. प्राथमिक उद्योग- प्राथमिक उद्योगों से अभिप्राय उन उद्योगों से है जों प्राकृतिक संसाधनों के उत्पादन तथा पशु-पक्षियों के प्रजनन एवं विकास से सम्बंधित है | जैसे - खनन उद्योग , कृषि , पशु प्रजनन फार्म आदि |
प्राथमिक उद्योगो के प्रकार :
(क) निष्कर्षण उद्योग : निष्कर्षण उद्योग वे उद्योग होते है जों प्राकृतिक संसाधनों को प्राकृतिक स्रोतों ( पहाड़ , भूमि ) से खोदकर या निष्काषित कर प्राप्त करतें है | ये उद्योग द्वितीयक तथा तृतीयक उद्योगों को कच्चा माल प्रदान करतें है | जैसे - खनन उद्याग ,खेती करना आदि |
(ख) जननिक उद्योग : जननिक उद्योग वे उद्योग होते है जो पशु- पक्षियों के प्रजजन और पालन-पोषण तथा वनस्पति उत्पादन से सम्बन्धित है | जैसे- पशु प्रजनन फार्म , मछली पालन , मुर्गी पालन आदि |
2. द्वितीयक उद्योग : द्वितीयक उद्योगो से अभिप्राय उन उद्योगों से है जिसमें प्राथमिक उद्योगों द्वारा प्राप्त उत्पादों को कच्चे माल के रूप में प्रयोग कर उसे और अधिक उपयोगी वस्तुओं में परिवर्तित किया जाता है | जैसे सीमेंट उद्योग , कपड़ा उद्योग , चीनी उद्योग आदि |
द्वितीयक उद्योगों का वर्गीकरण :
(क) विनिर्माण उद्योग : विनिर्माण उद्योग वे उद्योग होते है जो कच्चे माल को और अधिक उपयोगी वस्तुओं में परिवर्तित करते है |
विनिर्माण उद्योगों के प्रकार :-
- विश्लेषणात्मक उद्योग : विश्लेषणात्मक उद्योग वे उद्योग होते है जो एक ही उत्पाद को उनकी विशेषताओं के आधार पर पृथकीकरण कर नए उत्पादों को प्राप्त करतें है | जैसे - तेल शोधक कारखाने आदि |
- कृत्रिम उद्योग : कृत्रिम उद्योग वे उद्योग होते है जो विभिन्न पदार्थो को इक्कट्ठा कर उन्हें एक विशेष प्रक्रिया द्वारा नए उत्पादों में परिवर्तित करतें है | जैसे - सीमेंट उद्योग |
- प्रक्रियायी उद्योग : प्रक्रियायी उद्योग वे उद्योग होते है जिसमें एक ही उत्पाद को उत्पादित करने के लिए विभिन्न चरणों से एक निश्चित क्रम में गुजरतें है | जैसे - चीनी उद्योग , कागज उद्योग |
- सम्मलित उद्योग : सम्मलित उद्योग वे उद्योग होते है जिसमें एक नए उत्पाद को उत्पादित करने के लिए विभिन्न पुर्जो को जोड़ा जाता है | जैसे - टेलिविज़न , कार आदि |
(ख) निर्माण उद्योग : निर्माण उद्योग वे उद्योग होते हैं जों बांध , सड़क , पुल आदि के निर्माण से सम्बंधित हैं |
3. तृतीयक उद्योग : तृतीयक उद्योग वे उद्योग होते है जो प्राथमिक तथा द्वितीयक उद्योगों को सेवाएँ प्रदान करते है तथा व्यापारिक क्रियाओं को पूरा करने में सहायता करते है इसलिए इन्हें सेवा उद्योग भी कहा जाता हैं | जैसे - परिवहन , विज्ञापन , बीमा आदि |