Chapter 14. उर्जा के स्रोत Class 10 Science CBSE notes in hindi वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत अथवा गैर-परं - CBSE Study
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14. उर्जा के स्रोत
4. वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत अथवा गैर-परं
वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत अथवा गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत:
वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत अथवा गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत का तात्पर्य ऊर्जा के उन स्रोतों से है जिसे हम पहले कभी प्रयोग नहीं किया परन्तु वर्त्तमान में उसे नई प्रौद्योगिकी द्वारा उर्जा के एक वैकल्पिक स्रोत के रूप देख रहे है या अब प्रयोग कर रहे हैं |
1. सौर ऊर्जा (Solar Energy) : सूर्य से प्राप्त ऊर्जा को सौर उर्जा कहते हैं | ये दृश्य प्रकाश, अवरक्त किरणों (infrared rays), पराबैगनी किरणों (ultra voilet rays) के रूप में होती हैं |
सौर स्थिरांक : पृथ्वी के वायुमंडल की परिरेखा पर सूर्य की किरणों के लंबवत स्थित खुले क्षेत्र के प्रति क्षेत्रफल पर प्रति सेकेंड पहुँचने वाली सौर ऊर्जा को सौर-स्थिरांक कहते हैं | इसका मान 1.4 kJ/sm2 होता है |
सौर ऊर्जा से चलने वाली युक्तियाँ : इन युक्तियों में सूर्य से प्राप्त ऊष्मा का उपयोग उष्मक के रूप में किया जाता है जो ऊष्मा को एकत्र कर कार्य करती है |
1. सौर ऊर्जा को ऊष्मा के रूप में :
(i) सौर कुकर
(ii) सौर जल तापक (सौर गीजर )
(iii) सौर जल पम्प
2. सौर ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा : इन युक्तियों में सौर उर्जा को विद्युत में रूपांतरित कर उपयोग में लाया जाता है |
(i) सौर सेल
(i) सौर कुकर : यह वह युक्ति है जिसमें सूर्य की किरणों को फोफसित करने के लिए दर्पणों का उपयोग एक बॉक्स के ऊपर लगाकर किया जाता है जो एक बढ़िया उष्मक की भांति कार्य करता है | इसमें काँच की शीट की एक ढक्कन होता है जो इसके अंदर प्रवेश करने वाली ऊष्मा को बाहर नहीं निकलने देता है | यह भोजन पकाने के लिए उपयोग में लाया जाता है |
सौर कुकर का सिद्धांत : सौर कुकर मुख्यत: दो सिद्धांतों पर कार्य करता है |
(i) काला रंग ऊष्मा को अधिक सोंखता है :
इस सिद्धांत के आधार पर ही सौर कुकर को चारो तरफ से काला रंग से रंग जाता है ताकि ये अपने ऊपर पड़ने वाले ऊष्मा को अधिक से अधिक सोंख सके |
(ii) ग्रीन हाउस प्रभाव : इस सिद्धांत के अनुसार सौर कुकर में एक काँच की शीट ढक्कन के ऊपर लगाया जाता है ताकि उसके अंदर प्रवेश करने वाला विकिरण (ऊष्मा) बाहर न आ सके और अंदर ऊष्मा लगातार बनी रहे |
सौर कुकर के लाभ :
(i) भारत में सौर ऊर्जा लगभग सभी जगहों पर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है |
(ii) यह पर्यावरण हितैषी है |
(iii) इन कुकर के उपयोग से एक साथ एक से अधिक खाना बनाया जा सकता है |
सौर कुकर की हानियाँ :
(i) यह सभी प्रकार के भोजन बनाने के लिए उपयुक्त नहीं है |
(ii) इसका प्रयोग केवल तेज धुप वाले दिनों में ही किया जा सकता है |
(iii) ध्रुवीय क्षेत्रों में तथा उन क्षेत्रों में जहाँ सूर्य बहुत कम दिखाई देता है उपयोग सिमित है |
2. सौर सेल (solar cell) : ये सौर उर्जा से चलने वाली एक युक्ति है जो सौर ऊर्जा को विद्युत उर्जा में रूपांतरित करते हैं |
सौर सैल को बनाने में प्रयुक्त पदार्थ :
सौर सेलों को बनाने के लिए सिलिकॉन का उपयोग किया जाता है | जो प्रकृति में प्रचुर
मात्रा में उपलब्ध हैं, परंतु सौर सेलों को बनाने में उपयोग होने वाले विशिष्ट श्रेणी के सिलिकॉन की उपलब्धता सीमित है।
- धुप में रखे जाने पर किसी प्ररूपी सौर सेल से 0.5-1.0 V तक वोल्टता विकसित होती है तथा लगभग 0.7 W विद्युत उत्पन्न कर सकते हैं।
सौर पैनल : जब बहुत अधिक संख्या में सौर सेलों को संयोजित करते हैं तो यह व्यवस्था सौर पैनल कहलाती है |
सौर सेलों को एक दुसरे से जोड़कर सौर पैनल बनाया जाता है | इसे जोड़ने के लिए चाँदी (सिल्वर) का उपयोग किया जाता है |
सौर सेलों का उपयोग :
(i) सौर ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा प्राप्त करने के लिए किया जाता है |
(ii) सौर सेलों का उपयोग बहुत से वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए किया जाता है।
(iii) ट्रैफिक सिग्नलों, परिकलन यन्त्र (calculator) तथा बहुत से खिलौनों में सौर सेल लगे होते हैं |
(iv) मानव-निर्मित उपग्रहों में सौर सेल का उपयोग होता हैं |
(v) रेडियो तथा वायरलेस सिस्टम, सुदूर क्षेत्रों के टी. वी. रिले केन्द्रों में सौर सेल पैनल का उपयोग होता है |
सौर सेलों के लाभ :
(i) इसमें कोई गतिमान पुर्जा नहीं होता है तथा इनका रखरखाव सस्ता है |
(ii) ये बिना किसी फोकसन युक्ति के काफी संतोषजनक कार्य करते हैं |
(iii) इन्हें सुदूर तथा अगम्य स्थानों में स्थापित किया जा सकता है |
(ii) यह ऊर्जा का नवीकरणीय स्रोत है |
(iii) इससे प्रदुषण नहीं होता है ये पर्यावरण हितैसी हैं |
सौर सेल कि सीमाएँ :
(i) सौर सेलों के उत्पादन की समस्त प्रक्रिया बहुत महँगी हैं |
(ii) सौर सेलों को बनाने में उपयोग होने वाले विशिष्ट श्रेणी के सिलिकॉन की उपलब्धता सीमित है।
(iii) सौर पैनल बनाने में सिल्वर (चाँदी) का उपयोग होता है जिसके कारण लागत में और वृद्धि हो जाती है।
(iv) मँहगा होने के कारण सौर सेलों का घरेलू उपयोग अभी तक सीमित है।