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Chapter Chapter 2. भारत में राष्ट्रवाद Class 10 History CBSE notes in hindi भारत छोड़ो आंदोलन और राष्ट्रीय एकता - CBSE Study

Chapter Chapter 2. भारत में राष्ट्रवाद History Class 10 cbse notes भारत छोड़ो आंदोलन और राष्ट्रीय एकता in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter Chapter 2. भारत में राष्ट्रवाद Class 10 History CBSE notes in hindi भारत छोड़ो आंदोलन और राष्ट्रीय एकता - CBSE Study

कक्षा 10 History के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 2. भारत में राष्ट्रवाद को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक भारत छोड़ो आंदोलन और राष्ट्रीय एकता को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन History में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 10 English Medium History All Chapters:

Chapter 2. भारत में राष्ट्रवाद

4. भारत छोड़ो आंदोलन और राष्ट्रीय एकता

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Chapter 2. भारत में राष्ट्रवाद

सविनय अवज्ञा आंदोलन के बाद भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष एक नए चरण में प्रवेश कर गया। इस अवधि में विभिन्न सामाजिक वर्गों की भागीदारी, भारत छोड़ो आंदोलन तथा राष्ट्रीय एकता ने स्वतंत्रता प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त किया।

Part 3 – भारत छोड़ो आंदोलन और राष्ट्रीय एकता

इस भाग में विभिन्न सामाजिक वर्गों की भूमिका, भारत छोड़ो आंदोलन तथा भारतीय राष्ट्रवाद के प्रभाव का अध्ययन करेंगे।

राष्ट्रीय आंदोलन में उद्योगपतियों की भूमिका

भारतीय उद्योगपतियों ने राष्ट्रीय आंदोलन को आर्थिक और नैतिक समर्थन प्रदान किया।

  1. स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा दिया।
  2. विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का समर्थन किया।
  3. राष्ट्रीय नेताओं को आर्थिक सहायता प्रदान की।
  4. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों का विरोध किया।
  5. भारतीय उद्योगों के विकास की मांग की।

राष्ट्रीय आंदोलन में मजदूरों की भूमिका

मजदूर वर्ग ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भाग लिया।

  1. अनेक स्थानों पर हड़तालें की गईं।
  2. ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रदर्शन किए गए।
  3. राष्ट्रीय आंदोलनों को समर्थन दिया।
  4. स्वतंत्रता की मांग को मजबूत बनाया।

राष्ट्रीय आंदोलन में किसान वर्ग की भूमिका

किसानों ने विभिन्न आंदोलनों के माध्यम से राष्ट्रीय संघर्ष को व्यापक बनाया।

  1. कई क्षेत्रों में लगान का विरोध किया।
  2. राष्ट्रीय आंदोलनों में सक्रिय भाग लिया।
  3. गांधीजी के नेतृत्व का समर्थन किया।
  4. ग्रामीण क्षेत्रों में राष्ट्रवाद का प्रसार किया।

राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं की भूमिका

महिलाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  1. धरनों और जुलूसों में भाग लिया।
  2. विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया।
  3. खादी के प्रचार में योगदान दिया।
  4. अनेक महिलाओं ने जेल यात्राएँ कीं।
  5. राष्ट्रीय आंदोलन को जन-आंदोलन बनाने में सहयोग दिया।

राष्ट्रीय आंदोलन में सम्पन्न किसान (Rich Peasants)

सम्पन्न किसानों ने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आंदोलन का समर्थन किया।

  1. लगान में कमी की मांग की।
  2. ब्रिटिश कर नीतियों का विरोध किया।
  3. कुछ क्षेत्रों में आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की।
  4. आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार उनका समर्थन बदलता रहा।

राष्ट्रीय आंदोलन में गरीब किसान (Poor Peasants)

गरीब किसानों की समस्याएँ सम्पन्न किसानों से अलग थीं।

  1. वे लगान और ऋण के बोझ से परेशान थे।
  2. जमींदारी प्रथा का विरोध करते थे।
  3. राष्ट्रीय आंदोलन से सामाजिक और आर्थिक सुधारों की अपेक्षा रखते थे।
  4. हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी समान नहीं थी।

राष्ट्रीय आंदोलन में व्यावसायिक वर्ग (Business Class)

व्यापारियों ने स्वदेशी आंदोलन और राष्ट्रीय संघर्ष को समर्थन दिया।

  1. स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा दिया।
  2. विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का समर्थन किया।
  3. राष्ट्रीय संगठनों को आर्थिक सहयोग दिया।
  4. भारतीय उद्योगों के संरक्षण की मांग की।

भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement)

1942 में महात्मा गांधी ने अंग्रेजों को भारत छोड़ने का आह्वान किया।

  1. यह आंदोलन 8 अगस्त 1942 को प्रारम्भ हुआ।
  2. अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने प्रस्ताव पारित किया।
  3. महात्मा गांधी ने "करो या मरो" का नारा दिया।
  4. देशभर में व्यापक प्रदर्शन और हड़तालें हुईं।
  5. ब्रिटिश सरकार ने अनेक नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।
  6. आंदोलन ने स्वतंत्रता संघर्ष को निर्णायक दिशा दी।

भारत छोड़ो आंदोलन का महत्व

भारत छोड़ो आंदोलन स्वतंत्रता संघर्ष का अंतिम बड़ा जन-आंदोलन था।

  1. स्वतंत्रता की मांग पूरे देश की आवाज बन गई।
  2. ब्रिटिश शासन की नींव कमजोर हुई।
  3. जनता की भागीदारी अभूतपूर्व रही।
  4. स्वतंत्रता प्राप्ति का मार्ग और अधिक स्पष्ट हुआ।
  5. 1947 में भारत की स्वतंत्रता का आधार मजबूत हुआ।

भारत में राष्ट्रवाद का प्रभाव

राष्ट्रीय आंदोलन ने भारतीय समाज और राजनीति में व्यापक परिवर्तन किए।

  1. राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत हुई।
  2. स्वतंत्रता आंदोलन जन-आंदोलन बन गया।
  3. सत्य और अहिंसा को विश्व स्तर पर पहचान मिली।
  4. विभिन्न धर्मों, वर्गों और क्षेत्रों के लोग एक मंच पर आए।
  5. 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।

अध्याय के प्रमुख तथ्य (Quick Facts)

  1. 1915 – महात्मा गांधी भारत लौटे।
  2. 1917 – चम्पारण सत्याग्रह।
  3. 1918 – खेड़ा सत्याग्रह एवं अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन।
  4. 1919 – रॉलेट एक्ट एवं जलियाँवाला बाग हत्याकांड।
  5. 1920 – असहयोग आंदोलन।
  6. 1930 – दांडी यात्रा एवं सविनय अवज्ञा आंदोलन।
  7. 1931 – गांधी-इरविन समझौता।
  8. 1942 – भारत छोड़ो आंदोलन।
  9. "करो या मरो" – भारत छोड़ो आंदोलन का नारा।
  10. सत्याग्रह का आधार – सत्य और अहिंसा
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