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Chapter Chapter 2. भारत में राष्ट्रवाद Class 10 History CBSE notes in hindi गांधीजी का आगमन और प्रारम्भिक राष्ट्रीय आंदोलन - CBSE Study

Chapter Chapter 2. भारत में राष्ट्रवाद History Class 10 cbse notes गांधीजी का आगमन और प्रारम्भिक राष्ट्रीय आंदोलन in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter Chapter 2. भारत में राष्ट्रवाद Class 10 History CBSE notes in hindi गांधीजी का आगमन और प्रारम्भिक राष्ट्रीय आंदोलन - CBSE Study

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Class 10 English Medium History All Chapters:

Chapter 2. भारत में राष्ट्रवाद

2. गांधीजी का आगमन और प्रारम्भिक राष्ट्रीय आंदोलन

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Chapter 2. भारत में राष्ट्रवाद

भारत में राष्ट्रवाद का विकास ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष, जन-जागरण और महात्मा गांधी के नेतृत्व में चलाए गए आंदोलनों के माध्यम से हुआ। इस भाग में गांधीजी के भारत आगमन, प्रारम्भिक सत्याग्रहों तथा सत्याग्रह की अवधारणा का अध्ययन करेंगे।

Part 1A – गांधीजी का आगमन और प्रारम्भिक राष्ट्रीय आंदोलन

महात्मा गांधी के भारत आगमन के बाद राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा मिली। उन्होंने सत्य और अहिंसा के आधार पर जनता को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ा।

भारत में राष्ट्रवाद की पृष्ठभूमि

20वीं शताब्दी के प्रारम्भ तक भारत में राष्ट्रीय चेतना तेजी से विकसित हो रही थी।

  1. ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों से जनता असंतुष्ट थी।
  2. शिक्षा के प्रसार से राष्ट्रीय चेतना का विकास हुआ।
  3. समाचार-पत्रों और साहित्य ने राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया।
  4. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस राष्ट्रीय आंदोलन का प्रमुख मंच बनी।
  5. जनता में स्वशासन (Self Rule) की मांग बढ़ने लगी।

महात्मा गांधी का भारत आगमन

महात्मा गांधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे और भारतीय राजनीति में सक्रिय हुए।

  1. गांधीजी जनवरी 1915 में भारत आए।
  2. उन्होंने गोपाल कृष्ण गोखले को अपना राजनीतिक गुरु माना।
  3. देश की वास्तविक स्थिति जानने के लिए उन्होंने व्यापक यात्राएँ कीं।
  4. उन्होंने जनता की समस्याओं को निकट से समझा।
  5. उन्होंने संघर्ष के लिए सत्य और अहिंसा का मार्ग अपनाया।

सत्याग्रह की अवधारणा

सत्याग्रह गांधीजी द्वारा विकसित एक अहिंसक संघर्ष की पद्धति थी।

  1. सत्याग्रह का अर्थ है सत्य के लिए आग्रह करना।
  2. इसका आधार सत्य, अहिंसा और आत्मबल था।
  3. इसमें हिंसा का पूर्णतः विरोध किया गया।
  4. अन्यायपूर्ण कानूनों का शांतिपूर्ण विरोध किया जाता था।
  5. सत्याग्रह ने स्वतंत्रता आंदोलन को जन-आंदोलन बना दिया।

चम्पारण सत्याग्रह (1917)

चम्पारण सत्याग्रह गांधीजी का भारत में पहला सफल सत्याग्रह था।

  1. यह आंदोलन बिहार के चम्पारण जिले में हुआ।
  2. किसानों को जबरन नील की खेती करने के लिए बाध्य किया जाता था।
  3. गांधीजी ने किसानों की समस्याओं का अध्ययन किया।
  4. ब्रिटिश सरकार को किसानों की मांगें स्वीकार करनी पड़ीं।
  5. इस आंदोलन से गांधीजी को राष्ट्रीय पहचान मिली।

खेड़ा सत्याग्रह (1918)

खेड़ा सत्याग्रह किसानों के कर संबंधी अधिकारों के लिए चलाया गया आंदोलन था।

  1. यह आंदोलन गुजरात के खेड़ा जिले में हुआ।
  2. फसल खराब होने के बावजूद सरकार कर वसूल रही थी।
  3. गांधीजी ने किसानों से कर न देने का आग्रह किया।
  4. सरकार ने अंततः कर वसूली में राहत दी।
  5. इस आंदोलन ने किसानों का आत्मविश्वास बढ़ाया।

अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918)

यह आंदोलन मजदूरों के उचित वेतन की मांग को लेकर किया गया था।

  1. यह आंदोलन गुजरात के अहमदाबाद में हुआ।
  2. मजदूर वेतन वृद्धि की मांग कर रहे थे।
  3. गांधीजी ने शांतिपूर्ण हड़ताल का समर्थन किया।
  4. उन्होंने आमरण अनशन भी किया।
  5. मिल मालिकों ने मजदूरों की मांग स्वीकार कर ली।

गांधीजी के प्रारम्भिक आंदोलनों का महत्व

इन आंदोलनों ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा प्रदान की।

  1. किसानों और मजदूरों का राष्ट्रीय आंदोलन पर विश्वास बढ़ा।
  2. गांधीजी राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित हुए।
  3. सत्याग्रह की प्रभावशीलता सिद्ध हुई।
  4. जनता में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध साहस बढ़ा।
  5. आगे के राष्ट्रीय आंदोलनों की मजबूत नींव तैयार हुई।

Chapter 2. भारत में राष्ट्रवाद

प्रथम विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी नीतियाँ अपनाईं, जिससे पूरे देश में असंतोष फैल गया। रॉलेट एक्ट, जलियाँवाला बाग हत्याकांड और खिलाफत आंदोलन जैसी घटनाओं ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को एक नया मोड़ दिया तथा महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन की शुरुआत हुई।

Part 1B – रॉलेट एक्ट से असहयोग आंदोलन तक

इस भाग में रॉलेट एक्ट, जलियाँवाला बाग हत्याकांड, खिलाफत आंदोलन तथा असहयोग आंदोलन का अध्ययन करेंगे।

रॉलेट एक्ट (1919)

1919 में ब्रिटिश सरकार ने रॉलेट एक्ट लागू कर नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगा दिए।

  1. रॉलेट एक्ट को काला कानून (Black Act) कहा गया।
  2. बिना मुकदमा चलाए किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता था।
  3. प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नियंत्रण लगाया गया।
  4. देशभर में इस कानून का विरोध किया गया।
  5. महात्मा गांधी ने इसके विरुद्ध सत्याग्रह शुरू किया।

जलियाँवाला बाग हत्याकांड (1919)

13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में निहत्थी जनता पर गोलियाँ चलाई गईं।

  1. यह घटना बैसाखी के दिन हुई।
  2. सभा में हजारों लोग उपस्थित थे।
  3. जनरल रेजिनाल्ड डायर ने बिना चेतावनी गोली चलाने का आदेश दिया।
  4. सैकड़ों लोग मारे गए तथा अनेक घायल हुए।
  5. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया।
  6. ब्रिटिश शासन के प्रति जनता का विश्वास समाप्त हो गया।

खिलाफत आंदोलन

खिलाफत आंदोलन तुर्की के खलीफा के समर्थन में भारतीय मुसलमानों द्वारा चलाया गया आंदोलन था।

  1. इस आंदोलन का नेतृत्व अली बंधुओं ने किया।
  2. महात्मा गांधी ने इस आंदोलन का समर्थन किया।
  3. हिन्दू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा मिला।
  4. खिलाफत और असहयोग आंदोलन साथ-साथ चलाए गए।
  5. इससे राष्ट्रीय आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिला।

असहयोग आंदोलन (1920–1922)

महात्मा गांधी ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध असहयोग आंदोलन प्रारम्भ किया।

  1. आंदोलन की शुरुआत सितंबर 1920 में हुई।
  2. उद्देश्य ब्रिटिश शासन के साथ सहयोग समाप्त करना था।
  3. यह आंदोलन सत्य और अहिंसा पर आधारित था।
  4. देशभर में विद्यार्थियों, वकीलों, किसानों और व्यापारियों ने भाग लिया।
  5. यह पहला राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन था।

असहयोग आंदोलन के कार्यक्रम

इस आंदोलन के अंतर्गत ब्रिटिश शासन का शांतिपूर्ण बहिष्कार किया गया।

  1. सरकारी विद्यालयों और महाविद्यालयों का बहिष्कार।
  2. सरकारी नौकरियों से त्यागपत्र देना।
  3. विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार।
  4. विदेशी कपड़ों की होली जलाना।
  5. स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग बढ़ाना।
  6. खादी और चरखे को अपनाना।
  7. सरकारी उपाधियों और सम्मान लौटाना।

असहयोग आंदोलन में विभिन्न वर्गों की भागीदारी

इस आंदोलन में समाज के विभिन्न वर्गों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

किसान

  1. किसानों ने करों का विरोध किया।
  2. उन्होंने स्थानीय आंदोलनों में भाग लिया।
  3. राष्ट्रीय आंदोलन को गाँवों तक पहुँचाया।

मजदूर

  1. मजदूरों ने हड़तालें कीं।
  2. उन्होंने ब्रिटिश नीतियों का विरोध किया।
  3. राष्ट्रीय आंदोलन को समर्थन दिया।

विद्यार्थी और शिक्षक

  1. सरकारी शिक्षण संस्थानों का बहिष्कार किया।
  2. राष्ट्रीय विद्यालयों में प्रवेश लिया।
  3. स्वदेशी शिक्षा को बढ़ावा दिया।

व्यापारी वर्ग

  1. विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया।
  2. स्वदेशी उद्योगों को प्रोत्साहन दिया।
  3. राष्ट्रीय आंदोलन के लिए आर्थिक सहयोग दिया।

चौरी-चौरा घटना (1922)

चौरी-चौरा की हिंसक घटना के कारण असहयोग आंदोलन समाप्त कर दिया गया।

  1. यह घटना 5 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के चौरी-चौरा में हुई।
  2. उग्र भीड़ ने पुलिस थाने में आग लगा दी।
  3. कई पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो गई।
  4. महात्मा गांधी ने हिंसा का विरोध किया।
  5. उन्होंने असहयोग आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया।
  6. उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता का संघर्ष अहिंसा के आधार पर ही चलेगा।
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