2. यूरोप में समाजवाद एवं रुसी क्रांति Class 9 History [LATEST] Solutions महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर in Hindi - CBSE Study
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Class 9 English Medium History All Chapters:
2. यूरोप में समाजवाद एवं रुसी क्रांति
4. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
Class 9 History Chapter 2 – यूरोप में समाजवाद और रूसी क्रांति
Long Answer Questions
प्रश्न: रैडिकल समूह की विचारधाराएँ क्या थीं?
उत्तर:
- वे ऐसी सरकार चाहते थे जो बहुसंख्यक जनता के समर्थन पर आधारित हो।
- वे महिला मताधिकार के समर्थक थे।
- वे बड़े जमींदारों और उद्योगपतियों के विशेषाधिकारों के विरोधी थे।
- वे निजी संपत्ति के विरोधी नहीं थे, लेकिन संपत्ति के केंद्रीकरण के खिलाफ थे।
प्रश्न: रूस में रूढ़िवादी किस प्रकार के बदलाव चाहते थे?
उत्तर:
- वे रैडिकल और उदारवादियों दोनों के विरोधी थे।
- वे धीरे-धीरे बदलाव चाहते थे।
- वे अतीत और परंपराओं का सम्मान बनाए रखना चाहते थे।
प्रश्न: रूस में समाजवादियों की प्रमुख विचारधाराएँ क्या थीं?
उत्तर:
- वे निजी संपत्ति के विरोधी थे।
- वे मानते थे कि निजी संपत्ति सभी समस्याओं की जड़ है।
- वे सामूहिक खेती और सहकारी उद्यम के पक्षधर थे।
- वे चाहते थे कि सरकार सामूहिक खेती को बढ़ावा दे।
- वे पूंजीवादी उद्यम के स्थान पर सामूहिक उद्यम का समर्थन करते थे।
प्रश्न: रूस में उदारवादी विचारधारा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
- सभी धर्मों को समान सम्मान और स्थान मिलना चाहिए।
- वे व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा के समर्थक थे।
- वे चाहते थे कि सरकार नागरिक अधिकारों का हनन न करे।
- वे प्रतिनिधि लोकतांत्रिक सरकार के पक्ष में थे।
प्रश्न: इंग्लैंड और जर्मनी के मजदूरों ने अपने जीवन और कार्यस्थिति में सुधार लाने के लिए क्या प्रयास किए?
उत्तर:
- उन्होंने मजदूर संगठनों का निर्माण किया।
- सदस्यों की सहायता के लिए कोष बनाए।
- काम के घंटे कम करने और मताधिकार के लिए आंदोलन किया।
प्रश्न: 1914 तक यूरोप में समाजवादी सरकार बनाने में क्यों सफल नहीं हो पाए?
उत्तर: समाजवादियों ने चुनावों में प्रतिनिधित्व प्राप्त किया और कानून बनाने में भूमिका निभाई, लेकिन सरकारों में रूढ़िवादियों, उदारवादियों और रैडिकलों का प्रभुत्व बना रहा, इसलिए वे सत्ता में नहीं आ सके।
प्रश्न: 20वीं शताब्दी के आरंभ में रूस में कारीगरों और मिल मजदूरों की स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
- मजदूरों को लंबे समय तक काम करना पड़ता था।
- नौकरी से निकाले जाने पर मजदूर हड़ताल करते थे।
- मजदूरों के रहने के लिए डॉर्मिटरी जैसी व्यवस्था थी।
- वे सामाजिक रूप से विभाजित थे।
- आर्थिक संकट में एक-दूसरे की मदद के लिए संगठन बनाते थे।
प्रश्न: रूसी किसान यूरोप के अन्य किसानों से किस प्रकार भिन्न थे?
उत्तर:
- रूस में किसान अपनी जमीन सामूहिक रूप से कम्यून को सौंपते थे।
- कम्यून परिवारों की आवश्यकता के अनुसार जमीन बाँटता था।
- रूसी किसान जमींदारों की जमीन छीनकर किसानों में बाँटने के पक्ष में थे।
प्रश्न: विश्व में लोकतंत्र स्थापित करने वाली तीन प्रमुख घटनाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
- 1688 की इंग्लैंड की शानदार क्रांति।
- 1776 में अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा।
- 1789 की फ्रांसीसी क्रांति।
प्रश्न: लेनिन और बोल्शेविकों की प्रमुख माँगें क्या थीं?
उत्तर:
- युद्ध को तुरंत समाप्त किया जाए।
- सारी जमीन किसानों को दे दी जाए।
- बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जाए।
प्रश्न: 1917 की रूसी क्रांति में लेनिन और बोल्शेविकों की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
- लेनिन ने बोल्शेविक पार्टी का नेतृत्व किया और क्रांति का मार्गदर्शन किया।
- उन्होंने “शांति, रोटी और भूमि” का नारा दिया।
- रूस को प्रथम विश्व युद्ध से अलग किया गया।
- किसानों को जमीन दी गई और समाजवादी नीतियाँ लागू की गईं।
- सोवियतों को सत्ता सौंपकर समाजवादी शासन की स्थापना की गई।
प्रश्न: 20वीं शताब्दी के आरंभ में रूस में कारीगरों एवं मिल मजदूरों की दशा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
- नौकरी से निकाले जाने पर मजदूर एकजुट होकर हड़ताल करते थे।
- काम के घंटे निर्धारित करने के लिए सरकारी विभाग फैक्ट्रियों पर नजर रखते थे।
- मजदूरों के रहने के लिए डॉर्मिटरी जैसी व्यवस्था होती थी।
- सामाजिक स्तर पर मजदूर विभाजित थे।
- आर्थिक संकट में एक-दूसरे की सहायता के लिए संगठन बनाए गए थे।
प्रश्न: रूसी किसान यूरोप के अन्य किसानों से किस प्रकार भिन्न थे?
उत्तर:
- रूसी किसान समय-समय पर अपनी जमीन कम्यून को सौंप देते थे और आवश्यकता के अनुसार भूमि बाँटी जाती थी।
- फ्रांसीसी क्रांति के समय ब्रिटनी के किसान नबाबों का सम्मान करते थे और उनके लिए लड़ाइयाँ भी लड़ते थे।
- इसके विपरीत रूसी किसान नबाबों की जमीन छीनकर किसानों में बाँटने के पक्ष में थे।
प्रश्न: विश्व में लोकतंत्र स्थापित करने वाली तीन प्रमुख घटनाओं का नाम बताइए।
उत्तर:
- 1688 ई. की इंग्लैंड की शानदार क्रांति।
- 1776 ई. में अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा।
- 1789 ई. की फ्रांसीसी क्रांति।
प्रश्न: खुनी रविवार से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: 1905 में रूस में एक शांतिपूर्ण जुलूस पर जार की सेना ने गोली चला दी जिसमें लगभग एक हजार मजदूर मारे गए और हजारों घायल हुए। इस घटना को खुनी रविवार कहा जाता है।
प्रश्न: सोवियत शब्द का अर्थ क्या है?
उत्तर: सोवियत मजदूरों और किसानों के प्रतिनिधियों की परिषद को कहा जाता था। यह शब्द पहली बार 1905 की रूसी क्रांति के दौरान प्रयोग किया गया।
प्रश्न: बोल्शेविक कौन थे? उनकी तीन प्रमुख माँगें क्या थीं?
उत्तर: बोल्शेविक रूस की एक राजनीतिक पार्टी थी जिसका नेता लेनिन था। उनकी प्रमुख माँगें थीं:
- युद्ध को तुरंत समाप्त किया जाए।
- सारी जमीन किसानों को सौंप दी जाए।
- बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जाए।
प्रश्न: 1917 की रूसी क्रांति में लेनिन और बोल्शेविकों की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
- लेनिन ने बोल्शेविक पार्टी का नेतृत्व किया और क्रांति को दिशा दी।
- उन्होंने “शांति, रोटी और भूमि” का नारा दिया।
- रूस को प्रथम विश्व युद्ध से अलग कर लिया गया।
- किसानों को जमीन दी गई और समाजवादी नीतियाँ लागू की गईं।
- सोवियतों को सत्ता देकर समाजवादी शासन की स्थापना की गई।
प्रश्न: रैडिकल समूह की क्या विचारधाराएँ थीं?
उत्तर:
- वे बहुमत के समर्थन पर आधारित सरकार चाहते थे।
- वे महिला मताधिकार के समर्थक थे।
- वे बड़े जमींदारों और उद्योगपतियों के विशेषाधिकारों के विरोधी थे।
- वे संपत्ति के अत्यधिक केंद्रीकरण के खिलाफ थे।
प्रश्न: रूढ़िवादी रूस में किस प्रकार के बदलाव चाहते थे?
उत्तर:
- वे रैडिकल और उदारवादी दोनों के विरोधी थे।
- वे धीमी गति से परिवर्तन चाहते थे।
- वे अतीत और परंपराओं का सम्मान बनाए रखना चाहते थे।
प्रश्न: रूस में समाजवादियों की प्रमुख विचारधाराएँ क्या थीं?
उत्तर:
- वे निजी संपत्ति के विरोधी थे।
- वे निजी संपत्ति को सामाजिक समस्याओं की जड़ मानते थे।
- वे सामूहिक उद्यम और सहकारी खेती के समर्थक थे।
- वे सरकार द्वारा सामूहिक खेती को बढ़ावा देने के पक्षधर थे।
- वे पूंजीवादी उद्यम के स्थान पर सामूहिक उद्यम चाहते थे।
प्रश्न: रूस में उदारवादी विचारधारा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
- सभी धर्मों को समान सम्मान और स्थान मिलना चाहिए।
- वे व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा के पक्षधर थे।
- वे चाहते थे कि सरकार नागरिक अधिकारों का हनन न करे।
- वे प्रतिनिधि लोकतांत्रिक सरकार के समर्थक थे।
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