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2. संसाधन के रूप में लोग Class 9 Economics [LATEST] Solutions अभ्यास (NCERT) in Hindi - CBSE Study

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2. संसाधन के रूप में लोग Class 9 Economics [LATEST] Solutions अभ्यास (NCERT) in Hindi - CBSE Study

NCERT Solutions for Class 9 Economics are carefully prepared according to the latest CBSE syllabus and NCERT textbooks to help students understand every concept clearly. These solutions cover all important 2. संसाधन के रूप में लोग with detailed explanations and step-by-step answers for better exam preparation. Each अभ्यास (NCERT) is explained in simple language so that students can easily grasp the fundamentals and improve their academic performance. The study material is designed to support daily homework, revision practice, and final exam preparation for Class 9 students. With accurate answers, concept clarity, and structured content, these NCERT solutions help learners build confidence and score higher marks in their examinations. Whether you are revising a specific topic or preparing an entire chapter, this resource provides reliable and syllabus-based guidance for complete success in Economics.

Class 9 English Medium Economics All Chapters:

2. संसाधन के रूप में लोग

2. अभ्यास (NCERT)

Chapter 2. संसाधन के रूप में लोग


अभ्यास : प्रश्नोत्तर

प्रश्न1:  'संसाधन के रूप में लोग' से आप क्या समझते हैं ? 

उत्तर1: संसाधन के रूप मे लोग से अभिप्राय देश के कार्यशील लोग है जिनमे निपुण्ता तथा योग्यता है । संसाधन के रूप मे लोग सकल राष्ट्रीय उत्पाद मे योगदान देते है। संसाधन के रूप मे लोग एक बड़ी जनसंख्या का सकरात्मक पक्ष है जिसका प्रायः अवहेलना की जाती है । 

प्रश्न2:  मानव संसाधन भूमि और भौतिक पूँजी जैसे अन्य संसाधनों से कैसे भिन्न  है ? 

उत्तर2:  मानव संसाधन सभी पूंजियों जैसे भूमि और भौतिक पूंजियों की जननी है | मानव पूँजी सबसे अच्छी पूँजी हैॅ क्योंकि यह पूँजी लोगों की भौतिक क्षमता, निपुणता, ज्ञान, आदि जो उसे और अधिक उत्पादन में सहायता करते है, यह पूँजी श्रम, भुमी, भौतिक पूँजी से भी श्रेष्ठ है । इस पूँजी के बिना अन्य पूँजियाँ व्यर्थ है। 

प्रश्न3:  मानव पूँजी निर्माण में शिक्षा की क्या भूमिका है ? 

उत्तर3: मानव पूंजी निर्माण मे शिक्षा का निम्नलिखित  भूमिका है :-

1. शिक्षा से सामान्य गण और सूझ बूझ मे वृद्धि होती है । 
2. शिक्षा से व्यक्तित्व निर्माण होता है ।
3. शिक्षा मनुष्य को विवकेशील तथा तर्कशील बनाती है ।
4. शिक्षा से मनुष्य के व्यवहार मे नम्रता आती है ।
5. शिक्षा से आय , लाभ , अर्जन की शक्ति मे वृद्धि होती है ।

प्रश्न4:  मानव पूँजी निर्माण में स्वास्थ्य की  क्या भूमिका है ? 

उत्तर4: मानव पूंजी निर्माण मे स्वास्थ्य का क्या भूमिका निम्नलिखित  है ।

1. अस्वस्थ्य लोग किसी संगठन के लिए बोझ बन जाते है । 
2. स्वास्थ्य अपना कल्याण करने का एक अपरिहार्य अधार है। 
3. स्वस्थ्य व्यक्ति ही सही सेवा प्रदान कर सकता हैं । 
4. स्वास्थ्य एक ऐसी दशा है जिसका सही होना देश के प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक है । क्योंकि स्वस्थ्य व्यक्ति लंबे समय तक सेवाएँ देता रहता है। 

प्रश्न5:  किसी व्यक्ति के कामयाब जीवन में स्वास्थ्य की क्या भूमिका है ?

उत्तर5: एक स्वस्थ्य शरीर में ही एक स्वस्थ्य मन बसता है | किसी व्यक्ति के कामयाब जीवन में उसके स्वास्थ्य की बहुत बड़ी भूमिका होती है | अस्वस्थ्य व्यक्ति घर, परिवार, समाज और देश के लिए एक प्रकार से बोझ ही होता है | किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य उसे अपनी क्षमता को प्राप्त
करने और बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है। अस्वस्थ लोग किसी संगठन के लिए बोझ बन जाते हैं। वास्तव में, स्वास्थ्य अपना कल्याण करने का एक अपरिहार्य आधार है। इसलिए जनसंख्या की स्वास्थ्य स्थिति को सुधारना किसी भी देश की प्राथमिकता होती है।

प्रश्न6:  प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों में किस तरह की विभिन्न आर्थिक क्रियाएँ संचालित की जाती हैं ? 

उत्तर6: प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों को अर्थव्यस्था का क्षेत्रक कहा जाता है | in क्षेत्रकों में निम्न आर्थिक क्रियाएँ संचालित की जाती है | 

(i) प्राथमिक क्षेत्रक : प्राथमिक क्षेत्रक प्राथमिक उत्पाद का क्षेत्रक है जैसे- कृषि, खनन आदि | 

(ii) द्वितीयक क्षेत्रक: द्वितीय क्षेत्रक विनिर्माण का क्षेत्रक है जिसमें प्राथमिक उत्पादों से दुसरे स्तर के उत्पाद बनायें जाते है | जैसे- लोहा इस्पात उद्योग, ऑटोमोबाइल्स और फ़ूड उत्पाद आदि | 

(iii) तृतीय क्षेत्रक : तृतीय क्षेत्रक को सेवा का क्षेत्रक कहा जाता है | जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, होटल, संचार, बैंकिंग बीमा और अन्य सेवाएं आदि | यह सबसे बड़ा क्षेत्रक है | 

प्रश्न7:  आर्थिक और गैर-आर्थिक क्रियाओं में क्या अंतर है ?

उत्तर7: आर्थिक और गैर-आर्थिक क्रियाओं में निम्नलिखित अंतर है :- 

प्रश्न8:  महिलाएँ क्यों निम्न वेतन वाले कार्यों  ने नियोजित होती हैं ?

उतर: अधिकांश महिलाएँ असंगठित क्षेत्र में कार्य करती है | अधिकांश महिलाओं के पास बहुत कम शिक्षा और निम्न कौशल स्तर हैं। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को कम पारिश्रमिक दिया जाता है। अधिकतर महिलाएँ वहाँ काम करती हैं, जहाँ नौकरी की सुरक्षा नहीं होती तथा कानूनी
सुरक्षा का अभाव है। कई बार निम्न कौशल स्तर के कारण महिलाएँ कम वेतन पर ही काम करने को राजी हो जाती है | असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाली महिलाओं को प्रसूति अवकाश, शिशु देखभाल और अन्य सामाजिक सुरक्षा तंत्र जैसी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होतीं। शिक्षित नहीं होने के कारण इनका शोषण भी होता है | 

प्रश्न9:  बेरोजगारी शब्द की आप कैसे व्याख्या करेंगे ?

उत्तर9: बेरोजगारी उस समय विद्यमान कही जाती है जब प्रचलित मजदूरी की दर पर काम करने के इच्छुक लोग रोजगार नही पा सकते । 

 

प्रश्न10: प्रछन्न और मौसमी बेरोजगारी में क्या अंतर है ? 

उत्तर10:  प्रच्छन्न बेरोजगारी वह बेरोजगारी है जहाँ उन्हे काम तो मिलता है परन्तु उन्हे प्रच्छन्न रूप से काम पर रखा जाता हैं उनकी आवश्यकता ना के बरागर होती है। ऐसा प्रायः कृषिगत कार्य मे होता है । यदि इस व्यक्ति को हटा दिया जाए तो खेती की उत्पादकता मे कोई कमी नही आती ।
             इसके विपरीत मौसमी बेरोजगारी तब होती है जब लोग वर्ष के कुछ महीनो मे रोजगार  प्राप्त नही कर पाते । कृषि पर आश्रित लोग प्रायः इस तरह की समस्या से जूझते है । वर्ष मे कुछ वयस्त मौसम होते है जब बुआई कटाई निराई आदि होती है । कुछ विशेष महीनो मे कृषि पर आधारित लोगो को काम नही मिल पाता । अंतः साल के कुछ महीनो मे वे बेकार रहते है । इसे ही मौसमी बेरोजगारी कहते है ।

प्रश्न11: शिक्षित बेरोजगारी भारत के लिए एक विशेष समस्या क्यों हैं ?

उत्तर11: भारत में हर वर्ष 5 लाख युवक रोजगार की तलाश में निकलते है, जबकि भारत में रोजगार के अवसर निम्न है जिससे प्रतिवर्ष लाखों शिक्षित बेरोजगारों की संख्या में निरंतर वृद्धि होती चली जा रही है । अतः शिक्षित बेरोजगारी की संख्या में बेतहासा वृद्धि भारत के लिए एक समस्या है। आजकल पढ़े-लिखे लोगों किसी रोजगार की योग्यता रखते हुए भी बरोजगार घूम रहे है | उन्हें काम की तलाश है परन्तु की योग्यता की तुलना में काम नहीं है | 

 

प्रश्न12: आप के विचार से भारत किस क्षेत्रक में रोजगार के सर्वाधिक अवसर सृजित कर सकता है ?

उत्तर12: सेवा क्षेत्रक में जिसे तृतीय क्षेत्रक के नाम से जाना जाता है | 

प्रश्न 13: क्या आप शिक्षा प्रणाली में शिक्षित बेरोजगारों की समस्या दूर करने के लिए कुछ उपाय सुझा सकते हैं ?

उत्तर12: शिक्षा प्रणाली में शिक्षित बेरोजगारों की समस्या को दूर करने के निम्नलिखित उपाय इस प्रकार है-
(i) कौशल विकास पर ज़ोर दिया जाना चाहिए। उत्पादन की तकनीक में परिवर्तन होने से वर्तमान में कुशल श्रमिकों की मांग बढ़ती ही जा रही है।
(ii) तकनीकी शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
(iii) व्यावसायिक शिक्षा शुरू की जानी चाहिए। शिक्षित बेरोजगारों की समस्या को व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करके काम किया जा सकता है।
(iv) उपयुक्त ट्रेनिंग और विकसित कौशल के माध्यम से श्रमिकों की उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
(v) शिक्षित बेरोज़गार श्रमिकों में वृद्धि करते है। अर्थव्यवस्था के विकास के लिए द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक में तीव्र विकास होना चाहिए। तीव्र गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था रोजगार के सुनहरे अवसर प्रदान करती है।

प्रश्न14: क्या आप कुछ ऐसे गांवों की कल्पना कर सकते हैं जहाँ पहले रोजगार का कोई अवसर नहीं था, लेकिन बाद में बहुतायत में हो गया ?

उत्तर14: हां, मेरे सामने ऐसे ही गांव की कल्पना है जिससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं। पहाड़ी क्षेत्र में कुछ गांव थे जहां रोजगार के अवसर बहुत कम थे। वहां एक किसान ने अपने बेटे को उधार लेकर पढ़ाया तथा उसे उद्यान विषय में स्नातकोत्तर बनाया। वह लड़का जब गांव वापस लौटा तो उसने अपनी पूरी जमीन में नई तकनीक से सेब का बगीचा विकसित किया है जिससे उसके परिवार की आय बहुत अधिक बढ़ गई।  इससे प्रोत्साहित होकर उस क्षेत्र के और गांव वालों ने भी बगीची लगाए तथा फ़सल में काफी वृद्धि हुई जिससे कई लोगों को सेब तोड़ने, उनकी ढुलाई करने, पैकिंग करने के रूप में रोजगार के अवसर प्राप्त हुए।कुछ लोगों ने ऋण लेकर परिवहन के साधन में खरीदे  जो शीघ्र ही सेब की ढुलाई करके अच्छा लाभ कमा कर ऋण मुक्त हो गए।

एक परिवार ने गत्ता फैक्ट्री ही शुरू कर दी जिसमें भी कई लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ तथा इस गत्ते से बने खाली डिब्बे उसी क्षेत्र में सस्ते दाम में उपलब्ध होने लगे। आज वह पहाड़ी क्षेत्र काफी विकसित है।

प्रश्न15: किस पूँजी को आप सबसे अच्छा मानते हैं - भूमि, श्रम, भौतिक पूँजी और मानव पूँजी? क्यों ? 

उत्तर15: मानव पूँजी सबसे अच्छी पूँजी हैॅ क्योंकि यह पूँजी लोगों की भौतिक क्षमता, निपुणता, ज्ञान, आदि जो उसे और अधिक उत्पादन में सहायता करते है, यह पूँजी श्रम, भुमी, भौतिक पूँजी से भी श्रेष्ठ है । इस पूँजी के बिना अन्य पूँजियाँ व्यर्थ है। मानव पूँजी जब चाहे श्रम, भूमि और भौतिक पूंजियाँ अर्जित कर सकता है | 

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