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Chapter 6. संचार माध्यमों को समझना Class 7 Civics [LATEST] Solutions अध्याय - समीक्षा in Hindi - CBSE Study

Chapter 6. संचार माध्यमों को समझना Civics Class 7 exercise - [LATEST] Solutions अध्याय - समीक्षा cbse board school study materials like cbse notes in Hindi medium, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter 6. संचार माध्यमों को समझना Class 7 Civics [LATEST] Solutions अध्याय - समीक्षा in Hindi - CBSE Study

NCERT Solutions for Class 7 Civics are carefully prepared according to the latest CBSE syllabus and NCERT textbooks to help students understand every concept clearly. These solutions cover all important Chapter 6. संचार माध्यमों को समझना with detailed explanations and step-by-step answers for better exam preparation. Each अध्याय - समीक्षा is explained in simple language so that students can easily grasp the fundamentals and improve their academic performance. The study material is designed to support daily homework, revision practice, and final exam preparation for Class 7 students. With accurate answers, concept clarity, and structured content, these NCERT solutions help learners build confidence and score higher marks in their examinations. Whether you are revising a specific topic or preparing an entire chapter, this resource provides reliable and syllabus-based guidance for complete success in Civics.

Class 7 English Medium Civics All Chapters:

Chapter 6. संचार माध्यमों को समझना

1. अध्याय - समीक्षा

अध्याय - समीक्षा:


  • समूहिक रूप से रेडियो, TV, अखबार, इंटरनेट और संचार के अन्य साधनों के लिए प्रयोग, इसे मीडिया कहते हैं
  • मीडिया अँग्रेजी के Medium शब्द का बहुवचन है।
  • TV, रेडियो और अखबार – संचार माध्यमों के ऐसे रूप है जिनकी पहुँच लाखों लोगों तक है, देश व विदेश के जनसमूह तक है।
  • इसलिए इन्हें ‘जनसंचार माध्यम’ या ‘मास मीडिया’ कहते हैं।
  • जनसंचार माध्यमों के लिए प्रयोग में आनेवाली प्रोद्योगिकी निरंतर बदलती रहती है।
  • तकनीक तथा मशीनों को बदलकर अत्याधुनिक बनाने से संचार माध्यमों को अधिक लोगों तक पहुँचने में मदद मिलती है।
  • 1940 के दशक में electronic टाइपराइटर आ जाने से पत्रकारिता की दुनिया में एक बड़ा बदलाव आया।
  • “Televiser” आज के “Television” का आविष्कार “जॉन एल बैड” ने किया।
  • इन्होंने रॉयल इंस्टीट्यूट के समक्ष अपने आविष्कार का प्रदर्शन किया था।
  • TV में प्रदर्शित चित्र satellite और केबल के विस्तृत जाल के माध्यम से अत्यंत सुदूर क्षेत्रों तक आसानी से पहुँच सका।
  • जनसंचार द्वारा उपयोग में आनेवाली विभिन्न तकनीकें अत्यंत खर्चीली है।
  • TV Studio मे लाइटें, कैमरें, ध्वनि रिकॉर्ड करने के यंत्र, सम्प्रेषण के लिए satellite आदि है।
  • इन सबका मूल्य काफी ज्यादा है।
  • इसका माध्यम हमेशा बदलते रहते हैं।
  • इसलिए नवीनतम तकनीक जुटाने पर भी बहुत धन व्यय होता है।
  • परिणामतः अधिकांश TV चैनल व समाचार पत्र किसी बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान का भाग होते हैं।
  • ये विभिन्न वस्तुओं के विज्ञापन द्वारा जैसे करें, चॉकलेट, कपड़ा, मोबाइल फोन इत्यादि से धन कमाते हैं।
  • TV चैनल में 10 सेकंड के लिए भी विज्ञापन देने का मूल्य देना पड़ता है।
  • जो उसकी लोकप्रियता और समय के आधार पर 1000 रुपए से 100000 रुपए के बीच पड़ता है।
  • मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना जाता है। ये सरकार के कामों को बताती है।
  • संतुलित रिपोर्ट वह रिपोर्ट है जिसमें किसी भी विषय पर हर दृष्टिकोण से चर्चा की जाती है।
  • फिर पाठकों को स्वयं अपनी राय बनाने के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया जाता है।
  • स्वतंत्र संचार माध्यमों से तात्पर्य है “उनके द्वारा दिये हुये समाचारों को कोई भी नियंत्रित व प्रभावित न करें।
  • जब सरकार, समाचार और फिल्म के किसी अंश, दृश्य को जनसमुदाय तक पहुँचने से प्रतिबंधित करती है, इसे सेंसरशिप कहते हैं।
  • संचार माध्यम स्वतंत्र नहीं है। पहला कारण है – सरकार का उनपर नियंत्रण।
  • भारत के इतिहास में संचार माध्यमों के ऊपर आपातकाल 1975-77 में सेंसर लगाया गया।
  • संचार माध्यमों में शोध करनेवाले लोगों का कहना है कि ऐसा इसलिए संतुलित विवरण देने में असफल होते हैं।
  • क्योंकि संचार माध्यमों पर व्यापारिक प्रतिष्ठानों का नियंत्रण है।
  • कई बार विवरण के एक पक्ष पर ही ध्यान केन्द्रित करना इनके हित में होते हैं।
  • इसलिए संचार माध्यम स्वतंत्र नहीं है।
  • कुछ खास विषयों पर ध्यान केन्द्रित करके संचार माध्यम हमारे विचारों, भावनाओं और कार्यों को प्रभावित करता है।
  • और हमारा ध्यान उन मुद्दो कि ओर आकर्षित करते हैं।
  • संचार माध्यम हीं हमारा मसौदा या अजेंडा तैयार करता है।
  • इनका संबंध साधारण लोगों से हैं और गाँव-घर से संबन्धित बताते हैं।
  • सरकार व निजी संस्थाएँ ऐसी विज्ञापन भी बनाती है जिनसे समाज में किसी बड़े संदेश का प्रसारण हो सके। इसे सामाजिक विज्ञापन कहते हैं।

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