Chapter 12. पृथ्वी से परे Class 6 Science Curiosity [LATEST] Solutions Chapter Review (अध्याय-समीक्षा) in Hindi - CBSE Study
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Class 6 English Medium Science Curiosity All Chapters:
Chapter 12. पृथ्वी से परे
1. Chapter Review (अध्याय-समीक्षा)
Chapter 12. पृथ्वी से परे
यह अध्याय हमें पृथ्वी से परे फैले विशाल अंतरिक्ष की रोचक दुनिया से परिचित कराता है। इसमें तारे, तारा-मंडल, रात्रि-आकाश का अवलोकन, ध्रुव तारा, सूर्य, ग्रह तथा सौर परिवार के बारे में सरल एवं वैज्ञानिक जानकारी दी गई है। अध्याय में यह भी बताया गया है कि प्राचीन समय में लोग तारों और तारा-मंडलों का उपयोग दिशा ज्ञात करने के लिए करते थे तथा आज भी रात्रि-आकाश का अध्ययन वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। :contentReference[oaicite:0]{index=0}
Chapter Review (अध्याय समीक्षा)
अध्याय का परिचय
रात्रि के समय आकाश में असंख्य तारे दिखाई देते हैं। कुछ तारे चमकीले होते हैं जबकि कुछ धुंधले दिखाई देते हैं। तारों के समूह अनेक प्रकार की आकृतियाँ बनाते प्रतीत होते हैं, जिन्हें तारा-मंडल (Constellations) कहा जाता है। इस अध्याय में तारा-मंडलों की पहचान, ध्रुव तारे की सहायता से दिशा ज्ञात करना, रात्रि-आकाश का अवलोकन तथा हमारे सौर परिवार का विस्तृत अध्ययन कराया गया है। :contentReference[oaicite:1]{index=1}
मुख्य बिंदु (Key Points)
- तारे स्वयं का प्रकाश उत्सर्जित करते हैं।
- तारों के समूह मिलकर तारा-मंडल बनाते हैं।
- ध्रुव तारा उत्तर दिशा की पहचान करने में सहायता करता है।
- रात्रि-आकाश का अध्ययन खुले एवं अंधेरे स्थान से करना चाहिए।
- सूर्य हमारे सबसे निकट का तारा है।
- पृथ्वी सहित आठ ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
- सौर परिवार में ग्रह, उपग्रह, क्षुद्रग्रह तथा अन्य खगोलीय पिंड भी सम्मिलित हैं।
तारे (Stars)
तारे अत्यंत गर्म गैसों के विशाल गोले होते हैं जो स्वयं प्रकाश और ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। रात्रि में दिखाई देने वाले सभी चमकीले बिंदु ग्रह नहीं होते, अधिकांश तारे होते हैं। सूर्य भी एक तारा है, परंतु पृथ्वी के सबसे निकट होने के कारण अन्य तारों की अपेक्षा बहुत बड़ा और अधिक चमकीला दिखाई देता है। :contentReference[oaicite:2]{index=2}
तारा-मंडल (Constellations)
रात्रि-आकाश में कुछ तारे मिलकर विशेष आकृतियाँ बनाते हुए दिखाई देते हैं। इन्हें तारा-मंडल कहते हैं। विभिन्न सभ्यताओं ने इन आकृतियों को अपनी-अपनी कल्पनाओं और कहानियों के आधार पर नाम दिए। आधुनिक विज्ञान के अनुसार पूरे आकाश को 88 तारा-मंडलों में विभाजित किया गया है। :contentReference[oaicite:3]{index=3}
महत्वपूर्ण तारा-मंडल
- ओरायन (Orion)
- वृष (Taurus)
- कैनिस मेजर (Canis Major)
- सप्तर्षि (Big Dipper)
- लिटिल डिपर (Little Dipper)
ध्रुव तारा (Pole Star)
ध्रुव तारा उत्तर दिशा में लगभग स्थिर दिखाई देता है। इसकी सहायता से उत्तरी गोलार्ध में दिशा ज्ञात की जा सकती है। सप्तर्षि की सहायता से ध्रुव तारे की पहचान करना अपेक्षाकृत सरल होता है। :contentReference[oaicite:4]{index=4}
रात्रि-आकाश का अवलोकन
रात्रि-आकाश देखने के लिए ऐसा स्थान चुनना चाहिए जहाँ कृत्रिम प्रकाश कम हो तथा आकाश साफ दिखाई देता हो। प्रकाश प्रदूषण, धुआँ और ऊँची इमारतें तारों के अवलोकन में बाधा बनती हैं। मोबाइल ऐप तथा आकाश मानचित्र की सहायता से विभिन्न तारा-मंडलों की पहचान की जा सकती है। :contentReference[oaicite:5]{index=5}
प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution)
रात्रि के समय अत्यधिक कृत्रिम प्रकाश को प्रकाश प्रदूषण कहते हैं। इससे तारों को स्पष्ट रूप से देखना कठिन हो जाता है। वैज्ञानिक अंधेरे आकाश वाले क्षेत्रों में वेधशालाएँ स्थापित करते हैं ताकि खगोलीय पिंडों का बेहतर अध्ययन किया जा सके। :contentReference[oaicite:6]{index=6}
सूर्य (The Sun)
सूर्य हमारे सौर परिवार का केंद्र तथा सबसे निकट का तारा है। यह पृथ्वी को प्रकाश एवं ऊष्मा प्रदान करता है। सूर्य से पृथ्वी की औसत दूरी लगभग 15 करोड़ किलोमीटर (1 AU) है। सूर्य के कारण ही पृथ्वी पर जीवन संभव है। :contentReference[oaicite:7]{index=7}
ग्रह (Planets)
ग्रह ऐसे खगोलीय पिंड हैं जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं। वे स्वयं प्रकाश उत्पन्न नहीं करते बल्कि सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करते हैं। पृथ्वी भी एक ग्रह है। सभी ग्रह अपने अक्ष पर घूर्णन भी करते हैं। :contentReference[oaicite:8]{index=8}
सौर परिवार (Solar System)
सौर परिवार में सूर्य केंद्र में स्थित है तथा उसके चारों ओर आठ ग्रह परिक्रमा करते हैं। इनके अतिरिक्त उपग्रह, क्षुद्रग्रह, धूमकेतु तथा अन्य छोटे खगोलीय पिंड भी सौर परिवार का भाग हैं। :contentReference[oaicite:9]{index=9}
सूर्य से दूरी के क्रम में ग्रह
- बुध
- शुक्र
- पृथ्वी
- मंगल
- बृहस्पति
- शनि
- यूरेनस
- वरुण
आंतरिक एवं बाह्य ग्रह
बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल आंतरिक ग्रह कहलाते हैं। ये अपेक्षाकृत छोटे तथा चट्टानी ग्रह हैं। बृहस्पति, शनि, यूरेनस और वरुण बाह्य ग्रह हैं जो आकार में बड़े तथा मुख्यतः गैस एवं बर्फ से बने हैं। शनि अपने सुंदर वलयों (Rings) के लिए प्रसिद्ध है। :contentReference[oaicite:10]{index=10}
ग्रहों की विशेषताएँ
- शुक्र को भोर का तारा तथा संध्या का तारा कहा जाता है, यद्यपि यह तारा नहीं है।
- मंगल लाल ग्रह कहलाता है।
- पृथ्वी को नीला ग्रह कहा जाता है।
- बृहस्पति सौर परिवार का सबसे बड़ा ग्रह है।
- शनि अपने वलयों के कारण प्रसिद्ध है।
महत्वपूर्ण शब्दावली
- तारा
- तारा-मंडल
- ध्रुव तारा
- प्रकाश प्रदूषण
- परिक्रमण
- घूर्णन
- सौर परिवार
- खगोलीय मात्रक (AU)
- ग्रह
- क्षुद्रग्रह
याद रखने योग्य तथ्य
- सूर्य हमारे सबसे निकट का तारा है।
- तारे स्वयं प्रकाश उत्पन्न करते हैं।
- ग्रह स्वयं प्रकाश नहीं देते।
- ध्रुव तारा उत्तर दिशा बताता है।
- सप्तर्षि की सहायता से ध्रुव तारे की पहचान की जा सकती है।
- सौर परिवार में आठ ग्रह हैं।
- पृथ्वी सूर्य की एक परिक्रमा लगभग 365 दिनों में पूरी करती है।
- पृथ्वी अपने अक्ष पर लगभग 24 घंटे में एक घूर्णन पूरा करती है।
- शुक्र सबसे अधिक चमकीला ग्रह है।
- मंगल लाल ग्रह कहलाता है।
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