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Chapter 11. प्रकृति की अमूल्य संपदा Class 6 Science Curiosity [LATEST] Solutions Chapter Review (अध्याय-समीक्षा) in Hindi - CBSE Study

Chapter 11. प्रकृति की अमूल्य संपदा Science Curiosity Class 6 exercise - [LATEST] Solutions Chapter Review (अध्याय-समीक्षा) cbse board school study materials like cbse notes in Hindi medium, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter 11. प्रकृति की अमूल्य संपदा Class 6 Science Curiosity [LATEST] Solutions Chapter Review (अध्याय-समीक्षा) in Hindi - CBSE Study

NCERT Solutions for Class 6 Science Curiosity are carefully prepared according to the latest CBSE syllabus and NCERT textbooks to help students understand every concept clearly. These solutions cover all important Chapter 11. प्रकृति की अमूल्य संपदा with detailed explanations and step-by-step answers for better exam preparation. Each Chapter Review (अध्याय-समीक्षा) is explained in simple language so that students can easily grasp the fundamentals and improve their academic performance. The study material is designed to support daily homework, revision practice, and final exam preparation for Class 6 students. With accurate answers, concept clarity, and structured content, these NCERT solutions help learners build confidence and score higher marks in their examinations. Whether you are revising a specific topic or preparing an entire chapter, this resource provides reliable and syllabus-based guidance for complete success in Science Curiosity.

Class 6 English Medium Science Curiosity All Chapters:

Chapter 11. प्रकृति की अमूल्य संपदा

1. Chapter Review (अध्याय-समीक्षा)

Chapter 11. प्रकृति की अमूल्य संपदा

प्रकृति हमें जीवन के लिए आवश्यक सभी संसाधन प्रदान करती है। शुद्ध वायु, स्वच्छ जल, सूर्य का प्रकाश, उपजाऊ मिट्टी, वन, चट्टानें तथा खनिज सभी प्रकृति की अमूल्य संपदाएँ हैं। मनुष्य सहित पृथ्वी पर रहने वाला प्रत्येक जीव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। यदि इनका संरक्षण न किया जाए, तो जीवन का संतुलन बिगड़ सकता है। इस अध्याय में प्राकृतिक संसाधनों के महत्व, उनके उपयोग, संरक्षण तथा सतत विकास के सिद्धांतों का अध्ययन किया गया है। :contentReference[oaicite:0]{index=0}

Chapter Review (अध्याय पुनरावलोकन)

अध्याय का परिचय

जब भूमि और सूर्य अपनी दादी (अज्जी) के गाँव जाते हैं, तब वे प्रकृति के विभिन्न उपहारों का महत्व समझते हैं। अज्जी उन्हें बताती हैं कि वायु, जल, सूर्य, वन, मिट्टी और खनिज केवल संसाधन नहीं बल्कि पृथ्वी पर जीवन का आधार हैं। इन संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। इस अध्याय में इन्हीं प्राकृतिक संपदाओं का वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय दृष्टिकोण से अध्ययन किया गया है। :contentReference[oaicite:1]{index=1}

सीखने के उद्देश्य (Learning Objectives)

  • प्राकृतिक संसाधनों की पहचान करना।
  • वायु के संघटन एवं महत्व को समझना।
  • जल के स्रोत, उपयोग एवं संरक्षण के उपाय जानना।
  • सूर्य को ऊर्जा के मुख्य स्रोत के रूप में समझना।
  • वनों के महत्व एवं संरक्षण की आवश्यकता जानना।
  • मिट्टी, चट्टानों एवं खनिजों की उपयोगिता को समझना।
  • प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग का महत्व समझना।

Detailed Notes (विस्तृत अध्ययन)

1. प्रकृति की अमूल्य संपदा

प्रकृति द्वारा प्रदान किए गए वे सभी संसाधन, जो जीवन को संभव बनाते हैं, प्राकृतिक संपदा कहलाते हैं। इनमें वायु, जल, सूर्य का प्रकाश, मिट्टी, वन, चट्टानें, खनिज, नदियाँ तथा जैव विविधता शामिल हैं। मनुष्य, पशु-पक्षी तथा पौधे सभी इन संसाधनों पर निर्भर रहते हैं। इनका संतुलित उपयोग भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक है। :contentReference[oaicite:2]{index=2}

2. वायु (Air)

वायु पृथ्वी के चारों ओर उपस्थित गैसों का मिश्रण है। सभी जीवों को श्वसन के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। पौधे कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करके प्रकाश संश्लेषण करते हैं तथा ऑक्सीजन छोड़ते हैं।

वायु का संघटन

  • नाइट्रोजन – लगभग 78%
  • ऑक्सीजन – लगभग 21%
  • आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड एवं अन्य गैसें – लगभग 1%

चलती हुई वायु को पवन कहते हैं। पवन का उपयोग पवनचक्की चलाने तथा विद्युत उत्पादन में किया जाता है। पवन ऊर्जा स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत है। :contentReference[oaicite:3]{index=3}

3. जल (Water)

जल पृथ्वी पर जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण संसाधनों में से एक है। इसका उपयोग पीने, खाना बनाने, खेती, उद्योग तथा दैनिक कार्यों में किया जाता है।

जल के प्रमुख स्रोत

  • वर्षा
  • नदियाँ
  • झीलें
  • तालाब
  • कुएँ
  • भूजल
  • हिमनद

पृथ्वी पर अधिकांश जल समुद्रों में है, जो खारा होता है। उपयोग के लिए हमें मीठे जल की आवश्यकता होती है, जिसकी मात्रा सीमित है। इसलिए जल का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। :contentReference[oaicite:4]{index=4}

4. जल संरक्षण (Water Conservation)

जल का विवेकपूर्ण उपयोग करना जल संरक्षण कहलाता है। जल की बर्बादी रोकना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

जल बचाने के उपाय

  • अनावश्यक रूप से नल खुला न छोड़ें।
  • रिसाव वाले नलों की मरम्मत करें।
  • वर्षा जल संचयन अपनाएँ।
  • जल का पुनर्चक्रण करें।
  • जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाएँ।

5. वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting)

वर्षा के जल को एकत्रित कर भविष्य के उपयोग के लिए सुरक्षित रखने की प्रक्रिया वर्षा जल संचयन कहलाती है। इससे भूजल स्तर बढ़ता है तथा जल संकट कम होता है। राजस्थान और गुजरात में प्राचीन काल से बावड़ियों तथा वावों द्वारा जल संचयन किया जाता रहा है। :contentReference[oaicite:5]{index=5}

6. सूर्य – ऊर्जा का मुख्य स्रोत

सूर्य पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। पौधे सूर्य के प्रकाश की सहायता से भोजन बनाते हैं। यही ऊर्जा खाद्य श्रृंखला के माध्यम से सभी जीवों तक पहुँचती है।

सौर ऊर्जा के उपयोग

  • सौर पैनल द्वारा विद्युत उत्पादन
  • सौर कुकर में भोजन बनाना
  • सौर जल ऊष्मक द्वारा पानी गर्म करना
  • कपड़े सुखाना
  • कृषि एवं पौधों की वृद्धि

यदि सूर्य न हो, तो पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होगा। :contentReference[oaicite:6]{index=6}

7. वन (Forest)

वन ऐसे विशाल क्षेत्र होते हैं जहाँ बड़ी संख्या में पेड़-पौधे पाए जाते हैं। वन अनेक जीवों का प्राकृतिक आवास हैं तथा जैव विविधता को बनाए रखते हैं।

वनों के लाभ

  • ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
  • वर्षा में सहायता करते हैं।
  • मिट्टी का कटाव रोकते हैं।
  • वन्य जीवों को आश्रय देते हैं।
  • लकड़ी, औषधियाँ, फल एवं गोंद उपलब्ध कराते हैं।
  • जलवायु संतुलित रखते हैं।

वनों की अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण असंतुलित होता है। इसलिए वनों का संरक्षण एवं वृक्षारोपण आवश्यक है। चिपको आंदोलन तथा वन महोत्सव जैसे अभियान इसी उद्देश्य को बढ़ावा देते हैं। :contentReference[oaicite:7]{index=7}

8. मृदा (Soil)

मृदा पृथ्वी की ऊपरी उपजाऊ परत है जिसमें पौधे उगते हैं। मृदा का निर्माण चट्टानों के लंबे समय तक अपक्षय से होता है।

मृदा के मुख्य घटक

  • खनिज कण
  • ह्यूमस (जैविक पदार्थ)
  • जल
  • वायु
  • सूक्ष्मजीव

उपजाऊ मृदा कृषि का आधार है। केंचुए मिट्टी को भुरभुरा बनाकर उसकी उर्वरता बढ़ाते हैं। :contentReference[oaicite:8]{index=8}

9. चट्टानें एवं खनिज (Rocks and Minerals)

चट्टानें पृथ्वी की कठोर बाहरी परत का निर्माण करती हैं। इन्हीं से विभिन्न प्रकार के खनिज प्राप्त होते हैं। खनिज उद्योग, भवन निर्माण, मशीनों तथा दैनिक जीवन में उपयोग किए जाते हैं।

मुख्य उपयोग

  • भवन निर्माण
  • सड़क निर्माण
  • धातुओं का निर्माण
  • सीमेंट उद्योग
  • आभूषण निर्माण

10. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण

प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार करना तथा उन्हें नष्ट होने से बचाना ही संरक्षण कहलाता है।

संरक्षण के उपाय

  • वृक्षारोपण करें।
  • जल बचाएँ।
  • ऊर्जा की बचत करें।
  • प्लास्टिक का कम उपयोग करें।
  • प्रदूषण रोकें।
  • 3R सिद्धांत अपनाएँ – Reduce, Reuse, Recycle.

Important Terms (महत्वपूर्ण शब्दावली)

  • प्राकृतिक संसाधन
  • वायु
  • पवन
  • जल संरक्षण
  • वर्षा जल संचयन
  • सौर ऊर्जा
  • वन
  • मृदा
  • चट्टान
  • खनिज
  • जैव विविधता
  • पवन ऊर्जा

Mind Map (Text Form)

प्राकृतिक संपदा → वायु → जल → सूर्य → वन → मृदा → चट्टानें → खनिज → संरक्षण → सतत विकास

Chapter Summary (अध्याय सारांश)

  • प्राकृतिक संसाधन पृथ्वी पर जीवन का आधार हैं।
  • वायु गैसों का मिश्रण है जिसमें ऑक्सीजन जीवन के लिए आवश्यक है।
  • मीठा जल सीमित है, इसलिए उसका संरक्षण आवश्यक है।
  • सूर्य पृथ्वी पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।
  • वन पर्यावरण संतुलन एवं जैव विविधता बनाए रखते हैं।
  • मृदा कृषि का आधार है तथा चट्टानों से बनती है।
  • खनिज उद्योगों एवं निर्माण कार्यों में उपयोगी हैं।
  • प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सतत विकास के लिए आवश्यक है।

Key Points to Remember

  • वायु में 78% नाइट्रोजन तथा 21% ऑक्सीजन होती है।
  • जल जीवन के लिए अनिवार्य है।
  • सूर्य ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।
  • वन पृथ्वी के फेफड़े कहलाते हैं।
  • वर्षा जल संचयन जल संरक्षण का प्रभावी उपाय है।
  • मृदा का निर्माण चट्टानों के अपक्षय से होता है।
  • वनों की कटाई पर्यावरण के लिए हानिकारक है।
  • प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए।

Exam Tips

  • वायु के संघटन के प्रतिशत याद रखें।
  • जल संरक्षण के पाँच उपाय अवश्य याद करें।
  • सौर ऊर्जा के उपयोग लिखने का अभ्यास करें।
  • वनों के लाभ एवं संरक्षण के कारण याद रखें।
  • मृदा निर्माण एवं उसके घटकों को समझकर पढ़ें।

Common Mistakes

  • समुद्री जल और मीठे जल में भ्रम करना।
  • पवन एवं वायु को समान समझना।
  • वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण को एक ही मान लेना।
  • वनों का महत्व केवल लकड़ी तक सीमित समझना।
  • सौर ऊर्जा के अप्रत्यक्ष महत्व को भूल जाना।

Frequently Asked Questions (FAQs)

प्रश्न 1. प्राकृतिक संसाधन क्या हैं?

उत्तर: प्रकृति द्वारा प्राप्त वे सभी पदार्थ एवं ऊर्जा स्रोत जो जीवन के लिए आवश्यक हैं, प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं।

प्रश्न 2. सूर्य को ऊर्जा का मुख्य स्रोत क्यों कहा जाता है?

उत्तर: क्योंकि पौधे सूर्य के प्रकाश से भोजन बनाते हैं और यही ऊर्जा सभी जीवों तक पहुँचती है।

प्रश्न 3. वर्षा जल संचयन क्या है?

उत्तर: वर्षा के जल को एकत्रित एवं संग्रहित करके भविष्य में उपयोग करना वर्षा जल संचयन कहलाता है।

प्रश्न 4. वन क्यों आवश्यक हैं?

उत्तर: वन ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, जैव विविधता बनाए रखते हैं, मिट्टी का कटाव रोकते हैं तथा जलवायु संतुलित रखते हैं।

प्रश्न 5. मृदा कैसे बनती है?

उत्तर: चट्टानों के हजारों वर्षों तक अपक्षय होने से मृदा का निर्माण होता है।

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