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Chapter 3. समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व Class 12 Political Science-I [LATEST] Solutions अध्याय-समीक्षा in Hindi - CBSE Study

Chapter 3. समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व Political Science-I Class 12 exercise - [LATEST] Solutions अध्याय-समीक्षा cbse board school study materials like cbse notes in Hindi medium, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter 3. समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व Class 12 Political Science-I [LATEST] Solutions अध्याय-समीक्षा in Hindi - CBSE Study

NCERT Solutions for Class 12 Political Science-I are carefully prepared according to the latest CBSE syllabus and NCERT textbooks to help students understand every concept clearly. These solutions cover all important Chapter 3. समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व with detailed explanations and step-by-step answers for better exam preparation. Each अध्याय-समीक्षा is explained in simple language so that students can easily grasp the fundamentals and improve their academic performance. The study material is designed to support daily homework, revision practice, and final exam preparation for Class 12 students. With accurate answers, concept clarity, and structured content, these NCERT solutions help learners build confidence and score higher marks in their examinations. Whether you are revising a specific topic or preparing an entire chapter, this resource provides reliable and syllabus-based guidance for complete success in Political Science-I.

Class 12 English Medium Political Science-I All Chapters:

Chapter 3. समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व

1. अध्याय-समीक्षा

अध्याय समीक्षा


 

  • शीतयुद्ध का अंत हो गया तथा अमरीका विश्व की सबसे बड़ी शक्ति के रूप में उभरा, अमरीका प्रभुत्व एक धुर्वीय विश्व का युद आरंभ हुआ |
  • नयी विश्व व्यवस्था की शुरुआत हुई, संयुक्त राष्ट्र संघ द्रारा इराक के विरूद्र बल प्रयोग की अनुमति दिए जाने की अमरीका राष्ट्रपति जार्ज बुश ने नई विश्व व्यवस्था की संज्ञा दी |
  • दुसरो के व्यवहार को प्रभावित या नियंत्रण करने की क्षमता जिससे के हम उनसे मनचाहा काम कर सके - वचर्स्व या आधिपत्त्य कहलाता है |
  • इतिहास हमे बत्ताता है कि विश्व में किसी भी देश का वर्चश्व स्थाई नहीं रह सकता |
  • विश्व राजनीति में विभिन्न देश या देशों के समूह ताकत पाने और कायम रखने की लगातार कोशिश करते है |
  • यह ताकत सैन्य प्रभुत्व, आथिर्क शक्ति, राजनितिक रुतबे और साँस्कृतिक विकास के रूप में होती है |
  • अमेरिका वर्चस्व की शुरुआत सोवियत रूप के 1991 के विघटन के बाद हुई |
  • लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका विश्व के सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरा था |
  • अमेरिका द्वारा जापान के विरुद्ध परमाणु बम का प्रयोग |
  • युद के दौरान अमरीका का निर्यात बढ़ा व विश्व की सबसे बड़ी आथिर्क शक्ति बन गया |
  • विश्व पर वचर्स्व का प्रभाव : इराक ने कुवैत पर हमला किया संयुक्त राष्ट्रसंघ ने कुवैत को मुक्त करने का फैशला लिया |
  • UN ने इसे ऑपरेशन डेजर्ट स्टार्म सैनिक अभियान का नाम दिया |
  • संयुक्त राष्ट्रसंघ की आड़ में यह अमेरिका अभियान था इसकी सेना के प्रमुख जनरल नार्मन श्वार्जकांव थे |
  • 34 देशों की सेना में 75 प्रतिशत सैनिक अमेरिका के थे | इराक की हार हुई इसके अतिरिक्त समुद्री मार्ग, उदारीकरण, सी.बी,टी, विश्व बैंक, अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, आथिर्क प्रतिबंधो द्वारा प्रभाव डालना आदि |
  • प्रथम खाड़ी युद्ध के द्वारा अमेरिका अपनी शक्ति का प्रदशर्न किया इसे कम्यूटर युद्ध की संज्ञा दी तथा ''वीडियो गेम वार'' भी कहा जाता है |
  • 1992-2000 चुनावे में बिल क्लिंटन अमेरिका के राष्ट्रपति निवार्चित हुई उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय मामलों में दिलचस्पी नहीं दिखाई |
  •  1999 में युगोस्लाविया पर सैन्य कार्यवाही की गई जबकि वहाँ अलबानियाई लोगो ने आन्दोलन किया इसको दबाने के लिए नाटो सेनाओ ने को सोवो पर अपना कब्जा किया |
  • 1998 में नैरोबी (केन्या) तथा दारे-सलाम (तंजानिया) के अमेरिकी दूतावासों पर बमबारी हुई इसका जिम्मेदार अलकायदा आतकं वादी इस्लामी संगठन को माना गया। इसके प्रतिशोध् में अमेरिकन राष्ट्रपति ने ‘‘आपरेशन इनपफाइनाइट रीच’’ का आदेश दिया इसके अन्तर्गत सूडान और अफगानिस्तान में अलकायदा के ठिकानों पर क्रूज मिसाइलो से बमबारी की गई। इसकी जानकारी अमेरिका ने UN को भी नहीं दी।
  • 11 सितम्बर 2001आतंकवादी घटना के विरुद्र, आपरेशन एंड्यूरिन  फ्रीडम ' चलाया |
  • इस आपरेशन में अमरीकन ने सभी देशो को विश्व से आतंवाद का सफाया करने में योगदान करने को कहा | इसे 9/11की घटना से जाना जाता है |
  • यह घटना अमरीकन की शक्ति और उसके वचर्स्व को खुली चुनौती थी |
  • इस आपरेशन में अमरीकन ने 'अलकायदा' और अफगानिस्तान के तालिबान को निशान बनाया |
  • 9/11 की घटना का प्रभुत्व अलकायदा के ओसामा बिन लादने के द्वारा निर्देशित थी |
  • 19 मार्च 2003 इराक पर आक्रमण UN की अनुमति के बिना आक्रमण किया | सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों फ्रांस, रूस और चीन ने भी इसकी आलोचना की वास्तव में अमरीकन इराक में सद्दाम हुसैन के शासन को समाप्त करना, अपनी पसंद की सरकार स्थापित करना तथा इराक के तेल भंडार पर नियत्रण कारन था | इसे ' आपरेशन इराकी फ्रीडम 'कहा गया |
  • सद्दाम हुसैन को बंदी बनाया, उस पर मुक़दमा चला, दिसम्बर 2006 में उसे फांसी दे दी गई |
  • अमरीकन एक मात्र महाशक्ति के रूप में है उसने राजनीति को अपनी इच्छानुसार चलाने के प्रयास किये, अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं, संगठनों के परवाह नही की अपनी बात मनवाने के प्रयास किये? परन्तु यह दादागिरी कहीं भी गांव, नगर, प्रान्त राष्ट्र तथा विश्व मे अधिक दिन नहीं चलती उसे चुनौती मिलती है|
  • अमरीकन शक्ति के रास्ते में अवरोध : अमरीका की संस्थागत बनावट है | यहां शासन के तीन अंगो के बीच शक्ति का बंटवारा है | कार्यपालिका द्वारा सैन्य शक्ति पर अंकुश लगाने का काम करती है | अमरीकी समाज जो अपनी प्रकृति में उन्मुक्त है | अमरीका के विदेशी सैन्य-अभियानों पर अंकुश रखना में बड़ी भूमिका निभाती है |
  • नोटों (उतरी अटलांटिक ट्रीटी आग्र्नैजेशन) इन देशो में बाजारमूलक अर्थव्यवस्था चलती है |
  • नोटों में शामिल देश अमेरिका के वचर्स्व पर अंकुश लगा सकते है |
  • भारत-अमेरिका संबंध-सोवियत संघ के पतन के बाद भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण करने तथा वैशिवक अर्थव्यवस्था से जोड़ने का फैसला किया |
  • इस नीति द्वारा आथिर्क वृद्धि दर के कारण भारत अमेरिका समेत कई देशों के लिए आर्थिक सहयोगी बन गया है |
  • भारत-अमरीकी संबंधों के बीच दो नई बाते उभरी इन बातों का संबंध प्रौद्योगिकी और अमरीकी में बसे अनिवासी भारतीयों से है |

 

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