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Chapter 9. राजा और विभिन्न वृतांत Class 12 History Part-2 [LATEST] Solutions अध्याय-समीक्षा in Hindi - CBSE Study

Chapter 9. राजा और विभिन्न वृतांत History Part-2 Class 12 exercise - [LATEST] Solutions अध्याय-समीक्षा cbse board school study materials like cbse notes in Hindi medium, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter 9. राजा और विभिन्न वृतांत Class 12 History Part-2 [LATEST] Solutions अध्याय-समीक्षा in Hindi - CBSE Study

NCERT Solutions for Class 12 History Part-2 are carefully prepared according to the latest CBSE syllabus and NCERT textbooks to help students understand every concept clearly. These solutions cover all important Chapter 9. राजा और विभिन्न वृतांत with detailed explanations and step-by-step answers for better exam preparation. Each अध्याय-समीक्षा is explained in simple language so that students can easily grasp the fundamentals and improve their academic performance. The study material is designed to support daily homework, revision practice, and final exam preparation for Class 12 students. With accurate answers, concept clarity, and structured content, these NCERT solutions help learners build confidence and score higher marks in their examinations. Whether you are revising a specific topic or preparing an entire chapter, this resource provides reliable and syllabus-based guidance for complete success in History Part-2.

Class 12 English Medium History Part-2 All Chapters:

Chapter 9. राजा और विभिन्न वृतांत

1. अध्याय-समीक्षा

अध्याय-समीक्षा


  • मुग़ल कोन थे - दो महान शासक वंशो के वंशज थे | माता कि ओर से वे चीन और मध्य एशिया के   मंगोल शासक चंगेज खां ( जिनकी म्रत्यु 1227 इसवी में हुई ) के उतराधिकारी थे | पिता कि और से वे ईरान एव वर्तमान तुर्की के शासक तेमूर ( जिनकी म्रत्यु 1404 इसवी में हुई ) के वंशज थे | परन्तु मुगल अपने अपने आप को मुगल या मंगोल कहलवाना पसंद नि करते थे | ऐसा इस लिए था क्योकि चंगेज खां से जुडी स्मृतिया मुगलों के प्रतियोगियों उज्वेग से भी सम्बन्धित थी |दूसरी तरफ मुगल  , तेमूर के वंशज होने पर गर्व का अनुभव करते थे | ऐसा इसलिए क्योकि उनके इस महान पूर्वज ने 1390 इसवी में डेल्ही पर कब्जा क्र लिया था | 
  • मुगलों ने अपनी वंशावली का प्रदर्शन चित्र बनवाकर किया | प्रत्येक मुगल शासक ने तेमूर के साथ अपना चित्र बनवाया | पहला मुगल शासक बाबर मातृपक्ष से चंगेज खां का सम्बन्धी था | वो तुर्की बोलता था और उसने मुगलों का उपहास करते हुए उन्हें बाबर गिरोह के रूप में उलेखित किया | 16 वी शताब्दी के दोरान यूरोपियो ने परिवार कि इस शाखा के भारतीय शासको का वर्णन करने के लिए मुगल शब्द का प्रयोग किया | यहाँ तक कि रडयार्ड किपलिंग कि ( जंगल बुक ) के युवा नायक मोगली का नाम में इससे व्युत्पन्न हुआ है |

  •  बाबर 1526 इसवी - 1530 इसवी प्रथम मुगल शासक बाबर ( 1526 इसवी - 1530 इसवी ) ने जब 1494इसवी में फरगाना राज्य का उतराधिकारी प्राप्त किया तो उनकी उम्र केवल 12 वर्ष कि थी | मंगोलों कि दूसरी शाखा , उजबेगो के आक्रमण के कारण उसे अपनी पेत्रक गद्धी छोडनी पड़ी |  अनेक वर्षो तक भटकने के बाद उसने 1540 इसवी में काबुल पर लिया | उसने 1526 इसवी में काबुल पर कब्जा कर लिया | उसने 1526 इसवी में दिल्ली के इब्राहीम लोदी को पानीपत  में हराया और दिल्ली , आगरा , को अपने कब्जे में कर लिया | 1527 इसवी में खानुवा में राणा सांगा राजपूत राजाओ और उनके समर्थको को हराया | 1528 इसवी में चंदेरी में राजपूतो को हराया | 

     

  • हुमायूँ - हुमायूँ ने अपने पिता कि वसीयत के अनुसार जायदाद का बटवारा किया | प्रत्येक को एक प्रांत  मिला | उसके भाई मिर्जा कामरान कि मह्त्व्कंशाओ के कारण अपने अफगान प्रतिद्वंदियो ने सामने फीका पड़ गया | शेर खान ने हुमायु को दो बार हराया , 1539 इसवी में चौसा में एव 1540 इसवी कन्नोज में | इन पराजयों ने हुमायूँ  को ईरान कि ओर भागने को भागने को बाध्य किया | ईरान में हुमायु ने सफाविद शाह कि मदद ली | उसने 1555 इसवी में दिल्ली पर पुंज कब्जा कर लिया परन्तु उससे अगले वर्ष इस इमारत में दुर्घटना में उसकी म्रत्यु हो गयी | 

     

  • अकबर - 13 वर्ष कि अल्पायु में सम्राट  बना | 1568 इसवी में सिसिदयो कि राजधानी चितोड़ और 1569 इसवी में रणथम्भोर पर कब्जा कर लिया | 1579 इसवी 1580 इसवी के बिच मिर्जा हाकिम के पक्ष में विद्रोह हुए | सफविदो को हराकर कंधार पर कब्जा किया और कश्मीर को भी जोड़ लिया | मिर्जा हाकिम कि म्रत्यु के पश्चात काबुल को भी अपने राज्य में मिला लिया | दक्कन के अभियानों कि शुरुआत हुई | 

  • जहाँगीर -  मेवाड़ के सिसोदिया शासक अमर सिंह ने मुगलों कि सेवा स्वीकार कि इसके बाद सिक्खों , अहमो और अहमदनगर के खिलाफ अभियान चलाये गये , जो पूर्णत सफल नही हुए  | जहाँगीर के शासन के अंतिम वर्षो में राजकुमार खुर्म जो बाद में सम्राट शाहजहाँ कहलाया , ने विद्रोह किया | 

     

  • शाहजहाँ - अफगान अभिजात खान जहान लोदी ने विद्रोह किया और वह पराजित हुआ | अहमदनगर के विरुद्ध अभियान हुआ , जिसमे बुंदेलो कि हार हुई और ओरछा पर कब्जा कर लिया गया | उत्तर - पश्चिम में बल्ख पर करने के लिए उज्बेगो के विरुद्ध अभियान हुआ , जो असफल रहा | परिनाम्सव्रूप कांधार सफविदो के हाथ में चला गया | 

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