8. जीव जनन कैसे करते है Class 10 Science [LATEST] Solutions महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर in Hindi - CBSE Study
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Class 10 English Medium Science All Chapters:
8. जीव जनन कैसे करते है
4. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
अतिरिक्त एवं महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर:
प्रश्न 1: डी. एन. ए. प्रतिकृति (COPY) का प्रजनन में क्या महत्व हैं ?
उत्तर : जनन की मूल घटना डी. एन. ए. की प्रतिकृति बनाना है । डी. एन. ए. की प्रतिकृति बनाने के लिए कोशिकाएँ विभिन्न रासायनिक क्रियाओं का उपयोग करती है । जनन कोशिका में इस प्रकार डी. एन. ए. की दो प्रतिकृतियाँ बनती है। जनन के दौरान डी. एन. ए. प्रतिकृति का जीव की शारीरिक संरचना एवं डिजाइन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो विशिष्ट निकेत के योग्य बनाती है ।
प्रश्न 2: जीवों में विभिन्नता स्पीशीज के जीवित रहने के लिए किस प्रकार उतरदायी हैं?
उत्तर : जीवों में विभिन्नता ही उन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों में बने रहने में सहायक हैं। शीतोष्ण जल में पाए जाने वाले जीव़ परिस़्िथतिक तं़त्ऱ के अनुकुल जीवित रहते है। यदि वैश्विक उष्मीकरण के कारण जल का ताप बढ जाता हैं तो अधिकतर जीवाणु मर जाएगें, परन्तु उष्ण प्रतिरोधी क्षमता वाले कुछ जीवाणु ही खुद को बचा पाएगें और वृद्धि कर पाएगें । अतः जीवों में विभिन्नता स्पीशीज की उतरजीविता बनाए रखने में उपयोगी हैं ।
प्रश्न 3: शरीर का अभिकल्प समान होने के लिए जनन जीव के अभिकल्प का ब्लूप्रिंट तैयार करता है। परन्तु अंततः शारीरिक अभिकल्प में विविधता आ ही जाती है। क्यों?
उत्तर : क्योंकि कोशिका के केन्द्रक में पाए जाने वाले गुणसूत्रों के डी. एन. ए. के अणुओं में आनुवांशिक गुणों का संदेश होता है जो जनक से संतति पीढी में जाता है । कोशिका के केन्द्रक के डी. एन. ए. में प्रोटीन संश्लेषण के लिए सूचना निहित होती हैं इस सूचना के भिन्न होने की अवस्था में बनने वाली प्रोटीन भी भिन्न होगी । इन विभिन्न प्रोटीनों के कारण अंततः शारीरिक अभिकल्प में विविधता आ ही जाती है।
प्रश्न 4: डी. एन. ए. की प्रतिकृति बनाना जनन के लिए आवश्यक क्यो है ?
उत्तर : डी. एन. ए. की प्रतिकृति बनाना जनन के लिए आवश्यक हैं क्योंकि-
(1) डी. एन. ए. की प्रतिकृति संतति जीव में जैव विकास के लिए उतरदायी होती हैं ।(2) डी. एन. ए. की प्रतिकृति में मौलिक डी. एन. ए. से कुछ परिवर्तन होता है मूलतः समरूप नहीं होते अतः जनन के बाद इन पीढीयों में सहन करने की क्षमता होती है ।
(3) डी. एन. ए. की प्रतिकृति में यह परिवर्तन परिवर्तनशील परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता प्रदान करती है ।
प्रश्न 5: कुछ पौधें को उगाने के लिए कायिक प्रवर्धन का उपयोग क्यों किया जाता है ?
या
प्रश्न 5: कायिक प्रवर्धन के लाभ लिखिए ।
उत्तर : कुछ पौधें को उगाने के लिए कायिक प्रवर्धन का उपयोग करने के कारण निम्न हैं ।
(1) जिन पौधों में बीज उत्पन्न करने की क्षमता नहीं होती है उनका प्रजनन कायिक प्रवर्धन विधि के द्वारा ही किया जाता हैं ।
(2) इस विधि द्वारा उगाये गये पौधे में बीज द्वारा उगाये गये पौधों की अपेक्षा कम समय में फल और फूल लगने लगते है।
(3) पौधों में पीढी दर पीढी अनुवांशिक परिवर्तन होते रहते हैं । फल कम और छोटा होते जाना आदि, जबकि कायिक प्रवर्धन द्वारा उगाये गये पौधों जनक पौधें के समान ही फल फूल लगते हैं ।
प्रश्न 6: निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दीजिए:
(i) यौवनारंभ क्या है ?
(ii) यह किन शारीरीक परिवर्तनों के साथ शुरू होता है ?
(iii) लडके तथा लडकी में यौवनारंभ कब शुरू होता है ।
(iv) यौवनावस्था के लक्षणों को नियंत्रित करने वाले नर तथा मादा हार्मोनो के नाम लिखिए ।
उत्तर :
(i) किशोरावस्था की वह अवधि जिसमें जनन उतक परिपक्व होना प्रारंभ करते है । यौवनारंभ कहा जाता है ।
(ii) लड़कों तथा लडकियों में यौवनारंभ निम्न शारिरिक परिवर्तनों के साथ आरंभ होता है ।
लडकों में - दाढ़ी मूँछ का आना , आवाज में भारीपन, काँख एवं जननांग क्षेत्र में बालों का आना , त्वचा तैलिय हो जाना, आदि ।
लडकियों में - स्तन के आकार में वृद्धि होना, आवाज में भारीपन, काँख एवं जननांग क्षेत्र में बालों का आना , त्वचा तैलिय हो जाना, और रजोधर्म का होने लगना , जंघा की हडियो का चौडा होना, इत्यादि।
आदि ।
(iii) लडकियों में यौवनारंभ 12 - 14 वर्ष में होता है जबकि लडको में यह 13 - 15 वर्ष में आरंभ होता है ।
(iv) नर हार्मोन - टेस्टोस्टेरॉन
मादा हार्मोन - एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्ट्रोन
प्रश्न 7: पुष्पी पादप में निषेचन प्रक्रिया को समझाने के लिए बिजाण्ड का नामांकित चित्र बनाइए तथा निषेचन की प्रक्रिया को लिखे ।
उत्तर : पौधे में परागण के बाद निषेचन होता हैं। जब परागकण वर्तिकाग पर एकत्रित हो जाते है। परागनलिका बीजांड में एक सूक्ष्म छिद्र द्वारा प्रवेश करती है जिसे बीजांडद्वार कहते है | परागनलिका से दो पुंयुग्मक भ्रुणकोष में प्रवेश करते हैं भ्रूणकोष में अंड रहता हैं। नर तथा मादा युग्मको का यह संलयन युग्मक संलयन कहलाता हैं जिसको निषेचन कहते है। तथा इससे युग्मनज बनता है। निषेचन के बाद अंडाशय फल में तथा बीजांड बीज में विकसित होते है।

प्रश्न 8: दोहरा निषेचन क्या है ?
उत्तर : पुष्पी पादप में संलयन क्रिया में तीन केंद्रक होते है एक युग्मक तथा दो ध्रुविय केन्द्रक । अत: प्रत्येक भ्रूणकोष में दो संलयन, युग्मक - संलयन तथा त्रिसंलयन होने की क्रिया विधि को दोहरा निषेचन कहते है।
प्रश्न 9: मानव में नर तथा मादा जननांग क्या है ? प्रत्येक का कार्य लिखो ।
उत्तर : मानव में नर जननांग का नाम वृषण है तथा मादा जननांग का नाम अंडाशय है।
वृषण का कार्य शुक्राणु उत्पन्न करना तथा नर हॉर्मोन टेस्टोस्टीरोन का स्राव करना है जबकि अंडाशय का कार्य अंडाणु उत्पन्न करना तथा मादा हॉर्मोन एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्ट्रॉन का स्राव करना है।
प्रश्न 10: आर्वत-चक्र के मध्य में यदि मैथुन सम्पन्न हो तभी निचेषन संभव हैैं। कारण स्पष्ट किजिए।
उत्तर : आर्वत-चक्र के मध्य में यदि मैथुन सम्पन्न हो तभी निचेषन संभव हैैं। कारण स्पष्ट है क्योकि आर्वत - चक्र के मध्य में अंडाशय से अंडाणु का उत्सर्जन होता है। अंडोत्सर्ग चक्र के 11वें से 16 वें दिन के बीच होता है। इसी आवर्त-चक्र के मध्य में अंडाणु गर्भाशय में उपस्थित रहता है निषेचन के लिए अंडाशय में अंडाणु का उपस्थित होना आवश्यक है।
प्रश्न 11: शिशु जन्म नियंत्रण की विधियो का वर्णन करो ।
उत्तर :
(i) रोधिका विधि - रोधिका विधियो में कंडोम, मध्यपट, और गर्भाशय ग्रीवा जैसी भौतिक विधियों का उपयोग होता है।
(ii) रासायनिक विधि - महिलाओ द्वारा गर्भ नियंत्रण हेतु विशिष्ट औषधियो का उपयोग ही रासायनिक विधि कहलाती है। जैसे -गर्भ निरोधक गोलिया माला - डी आदी।
(iii) शल्य क्रिया विधि - शल्य क्रिया में पुरूष नसबंदी (वासेक्टॉमी) तथा स्त्रियों में स्त्रिनसबंदी को (ट्बेकटॉमी) कहते है।
(iv) IUCD (Intra Uterine Contraceptive Devices) - इस विधि के अंतर्गत कॉपर-टी जैसी युक्तियों का प्रयोग किया जाता है जो एक विशेष सिद्धांत पर कार्य करता है और निचेचन की क्रिया को रोक देता है |
प्रश्न 12: IUCD, HIV, AIDS, और OC को विस्तारपूर्वक लिखिए।
उत्तर : IUCD - इन्टरायुटेराइन कॉन्ट्रासेवटिव डिवाइसेज।
HIV - ह्युमन इम्युनो वाइरस।
AIDS - एक्वायर्ड इम्युनो डेफिसेंसी सिड्रोंम।
OC - ओरल कॉन्ट्रासेवटिव ।
प्रश्न 13: जन्म नियंत्रण की शल्य विधि का वर्णन करो ।
उत्तर : शल्य क्रिया में पुरूष नसबंदी (वासेक्टॉमी) तथा स्त्रियों में स्त्रिनसबंदी को (ट्युबेकटॉमी) कहते है। पुरूष नसबंदी (वासेक्टॉमी) - इसमें वास डिफ्रेस नामक नली को शल्य क्रिया द्वारा काट कर अलग कर दिया जाता है। स्त्रिनसबंदीे (ट्बेकटॉमी) - इसमें फैलोपियन ट्युब नामक नली को शल्य क्रिया द्वारा काट कर अलग कर दिया जाता है।
प्रश्न - लैंगिक संचारित रोगों को परिभाषित किजिए और इनके दो उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर - कुछ संक्रामक रोग लैंगिक संसर्ग द्वारा एक संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति तक फैलते है। ऐसे रोगों को लैंगिक संचारित रोग (ैज्क्) कहते है। जैसे - सुजाक;गोनिरिया),आशतक;सिफिलिस) और एड्स भी लैंगिक संचारित रोग है।
प्रश्न - आर्वत चक्र का वर्णन करो ं।
उत्तर - प्रत्येक 28 दिन बाद अंडाशय तथा गर्भाशय में होनें वाली घटना ऋतुस्राव द्धारा चिन्हित होती है तथा आर्वत चक्र या स्त्रियों का लैगिक चक्र कहलाती है।
प्रश्न - द्वि-विखंडन तथा बहु- विखंडन में अंतर बताइए।
उत्तर - जब एक कोशिकिय जीव से दो नए जीवों की उत्पति होती है। अत: इसे द्वि-विखंडन कहते है। बहु-विखंडन में पहले केंद्रकिय विभाजन होता है। जनक कोशिका के कोशिकाद्रव्य का छोटा सा खण्ड संतति केंद्रक के चारो ओर बाह्य झिल्ली का निर्माण करता है। जितनी संतति कोशिका होती हैं उतनी संतति जीव बनते है। इस प्रकार के विखंडन को बहु-विखंडन कहते है।
प्रश्न - ऊतक संवर्धन तकनीक क्या है ? इस तकनीक का उपयोग किस प्रकार के पौधों संवर्धन के लिए किया जाता है।
उत्तर - ऊतक संवर्धन तकनीक में पौधों के ऊतक अथवा उसकी कोशिकाओं को पौधे के शीर्ष के वर्धमान भाग से पृथक कर नए पौधे उगाए जाते है । ऊतक संवर्धन तकनीक द्वारा सिधी एकल पौधे से अनेक संक्रमण मुक्त परिस्थितियों में उत्पन्न किए जाते हैं। इस तकनीक का उपयोग सामान्यत: सजावटी पौधों के संवर्धन में किया जाता है ।
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