Chapter Chapter 12. औपनिवेशिक शहर Class 12 History Part-3 CBSE notes in hindi Long Answered Questions - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 12 English Medium History Part-3 All Chapters:
Chapter 12. औपनिवेशिक शहर
3. Long Answered Questions
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न–उत्तर
अध्याय : औपनिवेशिक शहर
प्रश्न 1. औपनिवेशिक शहरों की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
औपनिवेशिक काल में शहरों का विकास केवल शहरीकरण की प्राकृतिक प्रक्रिया नहीं था, बल्कि यह ब्रिटिश शासन की राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक आवश्यकताओं से जुड़ा हुआ था। ब्रिटिशों के लिए शहर सत्ता के केंद्र, प्रशासनिक नियंत्रण के साधन और व्यापारिक गतिविधियों के मुख्य आधार थे। इन शहरों के माध्यम से उन्होंने पूरे देश पर नियंत्रण स्थापित किया। औपनिवेशिक शहरों को इस प्रकार बसाया गया कि उनमें ब्रिटिश प्रभुत्व और अनुशासन स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
प्रश्न 2. औपनिवेशिक काल में प्रमुख शहरों के विकास का वर्णन कीजिए।
औपनिवेशिक काल में कलकत्ता, बॉम्बे, मद्रास और दिल्ली प्रमुख शहरों के रूप में उभरे। कलकत्ता प्रारंभ में ब्रिटिश भारत की राजधानी बना और प्रशासनिक केंद्र रहा। बॉम्बे व्यापार और उद्योग का प्रमुख बंदरगाह बना, जबकि मद्रास दक्षिण भारत का प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र था। 1911 में राजधानी दिल्ली स्थानांतरित की गई और नई दिल्ली का निर्माण किया गया, जिसे ब्रिटिश साम्राज्य की शक्ति और भव्यता के प्रतीक के रूप में विकसित किया गया।
प्रश्न 3. औपनिवेशिक शहरों में सामाजिक और नस्ली विभाजन का वर्णन कीजिए।
औपनिवेशिक शहरों में समाज स्पष्ट रूप से विभाजित था। यूरोपीय अधिकारियों के लिए सिविल लाइन्स बनाई गईं, जो स्वच्छ, खुले और सुव्यवस्थित क्षेत्र थे। इसके विपरीत भारतीय जनता को ब्लैक टाउन या नेटिव टाउन में बसाया गया, जहाँ भीड़भाड़, तंग गलियाँ और अस्वच्छ परिस्थितियाँ थीं। यह विभाजन ब्रिटिश नस्ली श्रेष्ठता की भावना और सत्ता बनाए रखने की नीति को दर्शाता था।
प्रश्न 4. औपनिवेशिक वास्तुकला का स्वरूप और उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
ब्रिटिश शासन ने वास्तुकला को अपनी सत्ता के प्रदर्शन का साधन बनाया। गोथिक, इंडो-सरैसेनिक और रोमन स्थापत्य शैलियों में टाउन हॉल, रेलवे स्टेशन, सचिवालय, न्यायालय और चर्चों का निर्माण किया गया। इन इमारतों का उद्देश्य न केवल प्रशासनिक कार्यों को सुचारु बनाना था, बल्कि ब्रिटिश शासन की भव्यता, स्थायित्व और प्रभुत्व को प्रदर्शित करना भी था।
प्रश्न 5. औपनिवेशिक शहरों में स्वच्छता और नगर नियोजन की नीति का वर्णन कीजिए।
ब्रिटिश शासन ने स्वच्छता और नगर नियोजन को स्वास्थ्य सुधार से अधिक प्रशासनिक नियंत्रण के साधन के रूप में देखा। प्लेग महामारी के बाद चौड़ी सड़कों, जल निकासी और सफाई व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। गंदी और भीड़भाड़ वाली बस्तियों को हटाया गया, जिससे गरीब वर्ग को शहरों के बाहरी इलाकों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे सामाजिक असमानता और बढ़ गई।
प्रश्न 6. औपनिवेशिक शहरों में जीवन और संस्कृति का वर्णन कीजिए।
औपनिवेशिक शहरों में नए सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन देखने को मिले। यहाँ शिक्षित मध्य वर्ग का उदय हुआ। आधुनिक विद्यालय, कॉलेज, प्रेस, अख़बार, थिएटर और क्लब स्थापित किए गए। इन शहरों में आधुनिक विचारों का प्रसार हुआ और सामाजिक सुधार आंदोलनों को बल मिला। इस प्रकार औपनिवेशिक शहर आधुनिक भारतीय समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण बने।
प्रश्न 7. औपनिवेशिक शहर राष्ट्रीय आंदोलन के केंद्र कैसे बने?
औपनिवेशिक शहरों में प्रेस, शिक्षित वर्ग और राजनीतिक संगठन विकसित हुए। यहीं कांग्रेस की बैठकें, सभाएँ, जुलूस और हड़तालें आयोजित की गईं। अख़बारों और पत्रिकाओं के माध्यम से राष्ट्रवादी विचारों का प्रसार हुआ। इस प्रकार औपनिवेशिक शहर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख केंद्र बन गए।
प्रश्न 8. औपनिवेशिक शहरों के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
औपनिवेशिक शहरों ने आधुनिक शहरी भारत की नींव रखी। इन शहरों ने प्रशासनिक ढाँचा, आधुनिक शिक्षा और संचार व्यवस्था को विकसित किया। साथ ही, इन्होंने सामाजिक असमानता और शोषण को भी बढ़ावा दिया। फिर भी, यही शहर आगे चलकर भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन और आधुनिक भारत के विकास के केंद्र बने।