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Chapter Chapter 3. आर्थिक सुधार 1991 से Class 12 Economics-II CBSE notes in hindi वैश्वीकरण - CBSE Study

Chapter Chapter 3. आर्थिक सुधार 1991 से Economics-II Class 12 cbse notes वैश्वीकरण in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter Chapter 3. आर्थिक सुधार 1991 से Class 12 Economics-II CBSE notes in hindi वैश्वीकरण - CBSE Study

कक्षा 12 Economics-II के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 3. आर्थिक सुधार 1991 से को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक वैश्वीकरण को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Economics-II में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 12 English Medium Economics-II All Chapters:

Chapter 3. आर्थिक सुधार 1991 से

4. वैश्वीकरण

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3. वैश्वीकरण (Globlisation) : 

किसी देश की अर्थव्यवस्था को विश्व के अन्य देशों की अर्थव्यवस्था से मुक्त व्यापार के माध्यम से, अथवा पूँजी और श्रम की गतिशीलता के माध्यम से एक दुसरे से जोड़ना वैश्वीकरण कहलाता है | 

इससे विश्व की सभी अर्थव्यवस्थाएँ अपनी-अपनी योग्ताओं के साथ एक मंच पर आ जाते है और एक दुसरे से जुड़ने लगते है, एक खुला बाजार मिलता है और आर्थिक निर्भरता बढ़ने लगती है | यह समग्र विश्व को एक बनाने या सीमामुक्त विश्व की रचना करने का प्रयास है |  

आर्थिक सुधारों की मान्यता : 

(1) भारतीय अर्थव्यवस्था का विश्व अर्थव्यवस्था से निकटतम संबंध होना चाहिए | 

(2) वस्तु, सेवाओं, टेक्नोलॉजी, तथा अनुभव का बिना रोक टोक विश्व में विनिमय हो सकेगा |

(3) वैश्वीकरण से संसार के विभिन्न देशों के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था के सहयोग में वृद्धि होगी |

(4) विकसित देशों से पूँजी तथा तकनीक का प्रवाह भारत की ओर हो सकेगा |  

भारतीय अर्थव्यवस्था में वैश्वीकरण को प्रोत्साहित करने वाली निति संबंधी रणनीतियाँ :

(1) विदेशी निवेश की अंश (हिस्सा/share) सीमा में वृद्धि: इसकी रणनीति यह रही की अब भारत में विदेशी निवेश की सीमा को 40 % से बढाकर 51% या 100% किया जाय | 

(2) रुपये की आंशिक परिवर्तनीयता : इसका अर्थ है डॉलर अथवा पौंड या स्टर्लिग जैसी विदेशी करेंसी को विदेशी सौदों के लिए बाजार कीमत पर खरीदना तथा बेचना | 

(3) दीर्घकालीन व्यापार निति : आर्थिक सुधारों के लिए विदेशी व्यापार निति को दीर्घ अवधि अर्थत पांच वर्ष के लिए लागु किया गया था | 

(4) प्रशुल्कों में कमी : भारतीय अर्थव्यवस्था को लाभ पहुँचाने के लिए अब धीरे-धीरे आयातों और निर्यातों पर तटकर और सीमा-शुल्क धीरे-धीरे घटाए जा रहे हैं | 

(5) परिमाणात्मक प्रतिबंधों का हटाना: अब सभी आयातों पर से परिमाणात्मक प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटाया जा रहा है | यह भारत के WTO के प्रति प्रतिबद्धता पर आधारित था | 

 

सकल घरेलु उत्पाद (GDP): किसी निर्धारित समय पर देशी की सीमाओं के अन्दर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं के उत्पादन के योग को सकल घरेलु उत्पाद (GDP) कहते हैं | 

 

 

 

 

 

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