Chapter Chapter 3. आर्थिक सुधार 1991 से Class 12 Economics-II CBSE notes in hindi निजीकरण - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 12 English Medium Economics-II All Chapters:
Chapter 3. आर्थिक सुधार 1991 से
3. निजीकरण
2.निजीकरण:
जब किसी सार्वजानिक क्षेत्र को या उसके प्रबंधन को किसी निजी क्षेत्र के हाथो सौप दिया जाता है तो उसे निजीकरण कहते है |
निजीकरण के दो प्रकार हैं :
(क) सरकार का सार्वजानिक कंपनी के स्वामित्व और प्रबधन से बाहर होना |
(ख) सार्वजानिक क्षेत्र की कंपनियों को सीधे बेच देना |
विनिवेश : किसी सार्वजानिक क्षेत्रक के उद्यमों द्वारा जनसामान्य को इक्विटी की बिक्री के माध्यम से निजीकरण को विनिवेश कहा जाता है |
निजीकरण की निति अपनाने का कारण :
(i) सार्वजानिक क्षेत्र के उद्यमों का ख़राब प्रदर्शन |
(ii) सार्वजानिक क्षेत्र के उद्यमों में रिसाव (leakage), चोरी (pilferage), अकुशलता (Inefficiency) तथा भ्रष्टाचार (Corruption) आदि बढ़ गए थे |
(ii) सार्वजानिक क्षेत्र के लिए पूँजी की कमी |
(iii) सार्वजानिक क्षेत्रों द्वारा उच्च स्तरीय मानदंड का प्रयोग नहीं किया जाना |
(iv) सार्वजानिक क्षेत्रों का उपयोग समाज कल्याण और राजनीति के लिए होना |
भारत के सार्वजानिक क्षेत्र के उद्यम जिन्हें नौ रत्न कहा जाता है :
(i) इंडियन आयल कारपोरेशन (IOC)
(ii) भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (BPCL)
(iii) आयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन ONGC)
(iv) स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (SAIL)
(v) भारत-हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL)
(vi) इंडियन पेट्रोकेमिकल कारपोरेशन लिमिटेड (IPCL)
(vii) विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL)
(viii) नेशनल थर्मल पॉवर कारपोरेशन (NTPC)
(ix) हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (HPCL)
निजीकरण से लाभ :
(i) निजीकरण से प्रतियोगी वातावरण का निर्माण होता है और उद्यमों का गुणवता में सुधार आता है |
(ii) निजीकरण उपभोक्ता के जरूरतों के अनुसार काम करता है और उनकी प्रभुसत्ता को प्रोत्साहित करता है |
(iii) निजीकरण उत्पादन में विविधीकरण को बढ़ावा देता है |
(iv) निजीकरण में स्वहित प्रबल होता है इसलिए उद्यमी अपना सौ फीसदी बचनबद्धता और योग्यता को लगाता है |
(v) निजीकरण से उद्यमियों को घरेलु एवं विदेशी वातावरण में कार्य करने को मिलता है जिससे प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलता है |
निजीकरण की हानियाँ :
(i) इससे समाज के समाजवादी ढाँचे को नुकसान पहुँचता है | चूँकि सार्वजानिक क्षेत्र के उद्यम समाज कल्याण के उदेश्य से लगाये जाते हैं |
(ii) निजीकरण से समाजवादी व्यवस्था की व्यावहारिक वैध्यता समाप्त हो जाती है जब उन्हें निजी हाथों में बेच दिया जाता है |
(iii) निजीकरण से बाजार की आर्थिक शक्तियाँ स्वतंत्र रूप से कार्य करने लगती हैं |
(iv) बाजार की शक्तियाँ उन्ही उत्पादों का उत्पादन करती है जिसमें लाभ अधिक हो अथवा उन्हीं लोगों के उत्पाद का उत्पादन किया जाता है जिनके पास खरीदने के लिए साधन हैं |
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