Chapter Chapter 2. भारतीय अर्थव्यवस्था 1950 - 1990 Class 12 Economics-II CBSE notes in hindi कृषि की विशेषताएँ, समस्याएँ एंव नीतियाँ - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 12 English Medium Economics-II All Chapters:
Chapter 2. भारतीय अर्थव्यवस्था 1950 - 1990
2. कृषि की विशेषताएँ, समस्याएँ एंव नीतियाँ
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्व -
- रोजगार का एक महत्वपूर्ण स्रोत : भारत में कृषि रोजगार का एक बहुत महत्वपूर्ण स्रोत है | वर्तमान में लगभग कुल कार्यशील जनसँख्या का लगभग 45% से अधिक लोग कृषि में लगे हुए है |
- औद्योगिक कच्चे माल की पूर्ति : उद्योगों द्वारा वस्तुओ के उत्पादन के लिए बड़े स्तर पर कच्चे माल की आवश्यकता होती है जैसे कपडा बनाने के लिए कपास, चीनी बानाने के लिए गन्ना आदि | कृषि उद्योगिक वस्तुओं के उत्पादन के लिए कच्चे माल का एक बहुत बड़ा पूर्तिकर्ता है i
- GDP में योगदान : कृषि क्षेत्र का भारतीय GDP में एक बहुत बड़ा योगदान रहा है | वर्ष 1950-51 के दौरान कृषि क्षेत्र का GDP में योगदान 50% था तथा वर्ष 2013-14 के दौरान 18% था | जिससे यह सिद्ध होता है की कृषि क्षेत्र का भारतीय GDP में कितना बड़ा योगदान है |
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में योगदान : कृषि भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है | भारत हर वर्ष सबसे अधिक कृषि वस्तुओं जैसे चाय, जुट, काजू, तंबाकू, काफी और मसालों आदि का निर्यात करता है |
- यातायात उद्योगों का आर्थिक आधार : कृषि यातायात उद्योगों को आर्थिक आधार प्रदान करने का काम करता है | भारत में रेल द्वारा तथा सड़क मार्ग द्वारा ज्यादातर कृषि वस्तुओं को ही लाया ले जाया जाता है |
भारतीय कृषि की विशेषताएँ -
- निम्न उत्पादकता : भारत की कृषि उत्पादकता विश्व के बड़े देशो की तुलना में सबसे कम है | उदाहरण के लिए भारत में प्रति हेक्टयर टन में गेहू का उत्पादन 3.2 तथा चावल का उत्पादन 2.8 है जबकि चीन में गेहू का उत्पादन 6.7 तथा चावल का उत्पादन 4.7 प्रति हेक्टयर है | इन आकड़ो से यह ज्ञात होता है की भारतीय कृषि उत्पादकता कितनी कम है |
- वर्षा पर निर्भरता : भारतीय कृषि वर्षा पर बहुत अधिक निर्भर करती है | भारत में सिचाई के स्थाई साधन ना होने के कारण लोगो को फसल उत्पादन के लिए वर्षा पर निर्भर होना पड़ता है | भारतीय किसानो के लिए अच्छी वर्षा का अर्थ है अच्छी फसल तथा कम वर्षा का अर्थ है कम फसल |
- निर्वाह खेती : भारत एक ऐसा देश है जहा बहुत अधिक मात्रा में निर्वाह खेती होती है | निर्वाह खेती का अर्थ है सिर्फ अपने जीवनयापन के लिए खेती करना | अभी भी भारत के अधिक राज्यों में किसान केवल अपने जीवनयापन के लिए खेती करते है |
- छिपी हुई बेरोजगारी : छुपी हुई बेरोजगारी ऐसी बेरोजगारी से है जिसमे बेरोजगारी छिपी हुई होती है | भारत में छिपी हुई बेरोजगारी सबसे अधिक कृषि क्षेत्र में ही पाई जाती है | भूमि के एक निश्चित टुकड़े पर काम करने वालो की संख्या उनकी वास्तविक आवश्यकता से अधिक होती है जिसके कारण देखने पर तो लगता है की अधिक लोग काम पर लगे है पर उससे वास्तविक उत्पादन में कोई ख़ास वृद्धि नहीं होती |
- पिछड़ी तकनीक : भारत में अधिकतर किसान गरीब होते है जिसके कारन वो नई तथा अच्छी तकनीको का प्रयोग फसल उत्पादन में नहीं कर पाते और उत्पादन के लिए पुरानी तकनीको जैसे गोबर खाद आदि का ही प्रयोग करते है |
- लघु जोते : भारतीय कृषि की एक अन्य विशेषता जोतो का आकार छोटा होना है | जोतो का आकर छोटा होने के कारण उत्पादन क्षमता कम हो जाती है साथ ही साथ किसान निर्वाह खेती करने के लिए मजबूर हो जाता है |
भारतीय कृषि की समस्याएँ -
- वित का अभाव : भारतीय कृषि की अन्य बड़ी समस्या वित् का आभाव है | भारत में अधिकतर किसान गरीब है | किसानो को बीज, उर्वरक, खाद तथा अन्य आवश्यक आगतो के लिए अल्पकालीन वित् की आवश्यकता होती है जिसके लिए किसानो को साहुकारो, जमींदारों आदि पर निर्भर होना पड़ता है |
- निम्न उत्पादकता : भारत की कृषि उत्पादकता विश्व के बड़े देशो की तुलना में सबसे कम है | उदाहरण के लिए भारत में प्रति हेक्टयर टन में गेहू का उत्पादन 3.2 तथा चावल का उत्पादन 2.8 है जबकि चीन में गेहू का उत्पादन 6.7 तथा चावल का उत्पादन 4.7 प्रति हेक्टयर है | इन आकड़ो से यह ज्ञात होता है की भारतीय कृषि उत्पादकता कितनी कम है | जो की एक चिंता का विषय है |
- वर्षा पर निर्भरता : भारतीय कृषि वर्षा पर बहुत अधिक निर्भर करती है | जो की एक बहुत बड़ी समस्या है| भारत में सिचाई के स्थाई साधन ना होने के कारण लोगो को फसल उत्पादन के लिए वर्षा पर निर्भर होना पड़ता है | भारतीय किसानो के लिए अच्छी वर्षा का अर्थ है अच्छी फसल तथा कम वर्षा का अर्थ है कम फसल |
- निर्वाह खेती : भारत एक ऐसा देश है जहा बहुत अधिक मात्रा में निर्वाह खेती होती है | निर्वाह खेती का अर्थ है सिर्फ अपने जीवनयापन के लिए खेती करना | अभी भी भारत के अधिक राज्यों में किसान केवल अपने जीवनयापन के लिए खेती करते है |
- छिपी हुई बेरोजगारी : छुपी हुई बेरोजगारी ऐसी बेरोजगारी से है जिसमे बेरोजगारी छिपी हुई होती है | भारत में छिपी हुई बेरोजगारी सबसे अधिक कृषि क्षेत्र में ही पाई जाती है | भूमि के एक निश्चित टुकड़े पर काम करने वालो की संख्या उनकी वास्तविक आवश्यकता से अधिक होती है जिसके कारण देखने पर तो लगता है की अधिक लोग काम पर लगे है पर उससे वास्तविक उत्पादन में कोई ख़ास वृद्धि नहीं होती |
- पिछड़ी तकनीक : पिछड़ी तकनीक कृषि के लिए एक गंभीर समस्या है |भारत में अधिकतर किसान गरीब होते है जिसके कारन वो नई तथा अच्छी तकनीको का प्रयोग फसल उत्पादन में नहीं कर पाते और उत्पादन के लिए पुरानी तकनीको जैसे गोबर खाद आदि का ही प्रयोग करते है |
- लघु जोते : भारतीय कृषि की एक अन्य मुख्य समस्या जोतो का आकार छोटा होना है | जोतो का आकर छोटा होने के कारण उत्पादन क्षमता कम हो जाती है साथ ही साथ किसान निर्वाह खेती करने के लिए मजबूर हो जाता है |
भारतीय कृषि में सुधार -
1. तकनीकी सुधार : कृषि के तकनीकी सुधार में निम्न शामिल है |
- अधिक उपज देने वाले बीजो का प्रयोग करना |
- रासायनिक खाद का प्रयोग करना |
- फसल संरक्षण के लिए किटनाशाक दवाओं का प्रयोग करना |
- फसल उत्पादन के लिए वैज्ञानिक खेती प्रबंध का प्रयोग करना |
- खेती के लिए खेती के यंतिकृत साधनों का प्रयोग करना |
2. सस्थागत या भूमि सुधार : कृषि के सस्थागत या भूमि सुधार में निम्न शामिल है |
- मध्यस्थों का उन्मूलन करना या खत्म करना |
- भूमि पर लगान के लिए एक स्थाई नियम बनाना |
- भूमि की चकबंदी करना |
- भूमि की उच्चतम सीमा निर्धारित करना |
- सहकारी खेती को प्रोत्साहित करना |
3. सामान्य सुधार : कृषि के सामान्य सुधार निम्न है |
- सिचाई के स्थाई साधनों का विकास करना |
- किसानो के लिए कम ब्याज दर पर साख का प्रावधान करना |
- कीमत समर्थन निति लागू करना |