Chapter 8. धर्मनिरपेक्षता Class 11 Political Science-II CBSE notes in hindi भारत में धर्म परिवर्तन के कारण - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 11 English Medium Political Science-II All Chapters:
8. धर्मनिरपेक्षता
2. भारत में धर्म परिवर्तन के कारण
सहिष्णुता का अर्थ : सहिष्णुता एक मानसिक स्थिति है जिसमें दूसरों की राय या विचारों के प्रति सहिष्णु होना पाया जाता है |
आधुनिक समय में धर्मनिरपेक्ष राज्य की आवश्यकता -
(i) धर्मिक स्वतंत्रता किसी भी सभ्य समाज की एक महत्वपूर्ण विशेषता होती है | इसी विशेषता के कारण विभिन्न धार्मिक मान्यताओं के लोग एक दुसरे के साथ मिल-जुल कर रह पाते है और एक दुसरे का सम्मान करते हैं |
(ii) ऐसे राज्य किसी व्यक्ति के धार्मिक पहचान के प्रति संवेदनशील होता है जिससे वह राज्य में उपजे असहिष्णुतापूर्ण व्यवहार के प्रति सुरक्षा की गारंटी देता है |
(iii) धर्मनिरपेक्ष राज्य राजनितिक दृष्टि से सर्वमान्य होता है इसलिए सर्वाधिक स्थायी भी होता है |
(iv) विश्व को धार्मिक असहिष्णुता, घृणा एवं हिंसा द्वेष आदि के मुक्त रखने के लिए धर्मनिरपेक्ष राज्य की आवश्यकता है |
(v) यह सभी प्रकार के धार्मिक मान्यताओं के नागरिकों को स्वतंत्र जीवन शैली जीने का अधिकार देता है |
धर्मांतरण (धर्मपरिवर्तन) : जब कोई व्यक्ति धार्मिक स्वतंत्रता के आधार पर अपना पुस्तैनी धार्मिक मान्यता त्याग कर कोई अन्य धार्मिक मान्यता को स्वीकार कर लेता है तो उसे धर्मांतरण या धर्म परिवर्तन कहते हैं |
भारत में धर्म परिवर्तन के कारण :
(i) बलात धर्म परिवर्तन या जबरदस्ती धर्म परिवर्तन जो कि क़ानूनी अपराध है |
(ii) लालच या धन मुहैया कराकर अथवा अन्य सुविधाएँ देकर धर्म परिवर्तन करवाना |
(iii) अपने धार्मिक मान्यताओं के प्रति अविश्वास का होना या किसी अन्य धर्म में रूचि का होना |
(iv) कुछ लोग अपने धर्म की कट्टरता से दुखी या परेशान होकर भी अपना धर्म परिवर्तन कर लेते हैं |
धर्मांतरण या धर्म परिवर्तन को लेकर गाँधी जी के विचार -
सैद्धांतिक दुरी :