Chapter Chapter 9. औद्योगिक क्रांति Class 11 History CBSE notes in hindi औद्योगिक क्रांति के परिणाम - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 11 English Medium History All Chapters:
Chapter 9. औद्योगिक क्रांति
1. औद्योगिक क्रांति के परिणाम
अध्याय 9. औद्योगिक क्रांति (Part 1)
अध्याय परिचय : अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इंग्लैंड में उत्पादन की पारंपरिक पद्धतियों के स्थान पर मशीनों का उपयोग प्रारम्भ हुआ। इस परिवर्तन ने उद्योग, कृषि, परिवहन, व्यापार तथा समाज के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित किया। इस व्यापक परिवर्तन को औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) कहा जाता है। इस अध्याय में औद्योगिक क्रांति के अर्थ, कारण, इंग्लैंड में इसकी शुरुआत तथा प्रारम्भिक औद्योगिक विकास का अध्ययन किया गया है।
अध्याय के मुख्य बिंदु
इस अध्याय में औद्योगिक क्रांति की पृष्ठभूमि, इंग्लैंड में इसके प्रारम्भ होने के कारण, कृषि क्रांति, तकनीकी आविष्कार तथा वस्त्र उद्योग के विकास का अध्ययन किया गया है।
- औद्योगिक क्रांति का प्रारम्भ इंग्लैंड में हुआ।
- मशीनों ने हस्तशिल्प का स्थान लेना प्रारम्भ किया।
- कृषि क्रांति ने औद्योगिक विकास को गति दी।
- नए आविष्कारों से उत्पादन में वृद्धि हुई।
- कारखाना प्रणाली का विकास हुआ।
औद्योगिक क्रांति
औद्योगिक क्रांति का अर्थ
औद्योगिक क्रांति वह प्रक्रिया है जिसमें उत्पादन की पारंपरिक हस्तनिर्मित पद्धति के स्थान पर मशीनों द्वारा बड़े पैमाने पर उत्पादन प्रारम्भ हुआ। इससे उत्पादन की गति, गुणवत्ता तथा मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
औद्योगिक क्रांति केवल उद्योगों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसने समाज, अर्थव्यवस्था, परिवहन, कृषि तथा व्यापार को भी गहराई से प्रभावित किया।
औद्योगिक क्रांति की प्रमुख विशेषताएँ
- मशीनों का व्यापक उपयोग।
- कारखाना प्रणाली का विकास।
- बड़े पैमाने पर उत्पादन।
- नई तकनीकों का विकास।
- औद्योगिक नगरों का विकास।
औद्योगिक क्रांति का प्रारम्भ इंग्लैंड में क्यों हुआ?
इंग्लैंड की अनुकूल परिस्थितियाँ
औद्योगिक क्रांति का प्रारम्भ सबसे पहले इंग्लैंड में हुआ क्योंकि वहाँ प्राकृतिक संसाधनों, पूँजी, श्रमिकों, विकसित व्यापारिक व्यवस्था तथा राजनीतिक स्थिरता जैसी अनेक अनुकूल परिस्थितियाँ उपलब्ध थीं।
इंग्लैंड के पास विशाल औपनिवेशिक साम्राज्य भी था, जिससे उसे कच्चा माल तथा तैयार वस्तुओं के लिए बड़े बाजार प्राप्त हुए।
इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति के प्रमुख कारण
- प्रचुर मात्रा में कोयला और लौह अयस्क।
- राजनीतिक स्थिरता।
- पूँजी की उपलब्धता।
- उपनिवेशों से कच्चा माल।
- विकसित समुद्री व्यापार।
- वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति।
कृषि क्रांति
कृषि में सुधार
औद्योगिक क्रांति से पहले इंग्लैंड में कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार हुए, जिन्हें कृषि क्रांति (Agricultural Revolution) कहा जाता है। नई कृषि तकनीकों, बेहतर औजारों तथा वैज्ञानिक खेती के कारण उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
कृषि उत्पादन बढ़ने से खाद्यान्न की उपलब्धता बढ़ी और उद्योगों के लिए आवश्यक श्रमिक भी उपलब्ध होने लगे।
कृषि क्रांति की प्रमुख विशेषताएँ
- नई कृषि तकनीकों का प्रयोग।
- उन्नत बीजों का उपयोग।
- फसल चक्र (Crop Rotation) अपनाया गया।
- कृषि उत्पादन में वृद्धि।
- वैज्ञानिक खेती का विकास।
घेराबंदी आंदोलन (Enclosure Movement)
भूमि सुधार की प्रक्रिया
इंग्लैंड में छोटे-छोटे खेतों को मिलाकर बड़े खेत बनाए गए। इस प्रक्रिया को घेराबंदी आंदोलन (Enclosure Movement) कहा जाता है। इससे कृषि अधिक संगठित और उत्पादक बनी, लेकिन अनेक छोटे किसान अपनी भूमि से वंचित होकर नगरों की ओर चले गए।
घेराबंदी आंदोलन के प्रभाव
- बड़े कृषि फार्मों का विकास।
- उत्पादन में वृद्धि।
- छोटे किसानों का विस्थापन।
- उद्योगों के लिए श्रमिकों की उपलब्धता।
वस्त्र उद्योग का विकास
कपड़ा उद्योग का विस्तार
औद्योगिक क्रांति का प्रारम्भ वस्त्र उद्योग से हुआ। कपास की बढ़ती माँग तथा नई मशीनों के आविष्कार के कारण कपड़ा उद्योग में तेजी से विकास हुआ। पहले कपड़े हाथ से बनाए जाते थे, लेकिन बाद में मशीनों द्वारा बड़े पैमाने पर उत्पादन होने लगा।
वस्त्र उद्योग के विकास के कारण
- कपास की उपलब्धता।
- नई मशीनों का आविष्कार।
- बढ़ती बाजार माँग।
- कारखानों की स्थापना।
प्रमुख आविष्कार
नई मशीनों का विकास
औद्योगिक क्रांति के दौरान अनेक महत्वपूर्ण मशीनों का आविष्कार हुआ, जिससे उत्पादन की गति कई गुना बढ़ गई। इन मशीनों ने वस्त्र उद्योग में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया।
प्रमुख आविष्कार एवं आविष्कारक
- फ्लाइंग शटल (Flying Shuttle) – जॉन के (John Kay)
- स्पिनिंग जेनी (Spinning Jenny) – जेम्स हारग्रीव्स (James Hargreaves)
- वॉटर फ्रेम (Water Frame) – रिचर्ड आर्कराइट (Richard Arkwright)
- स्पिनिंग म्यूल (Spinning Mule) – सैम्युअल क्रॉम्पटन (Samuel Crompton)
- पावर लूम (Power Loom) – एडमंड कार्टराइट (Edmund Cartwright)
भाप इंजन (Steam Engine)
जेम्स वाट का योगदान
जेम्स वाट (James Watt) ने भाप इंजन में महत्वपूर्ण सुधार किए। उनके विकसित इंजन ने उद्योगों, खानों तथा परिवहन के क्षेत्र में क्रांति ला दी। भाप शक्ति के कारण कारखानों की उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ गई।
भाप इंजन का महत्व
- उद्योगों में उत्पादन बढ़ा।
- कारखानों का विस्तार हुआ।
- परिवहन में क्रांति आई।
- खनन उद्योग को बढ़ावा मिला।
- आर्थिक विकास में तेजी आई।
कारखाना प्रणाली (Factory System)
उत्पादन की नई व्यवस्था
मशीनों के उपयोग के साथ उत्पादन घरों से निकलकर बड़े कारखानों में होने लगा। श्रमिक निश्चित समय पर कार्य करने लगे और उत्पादन संगठित रूप से होने लगा। यही व्यवस्था कारखाना प्रणाली कहलाती है।
कारखाना प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ
- बड़े पैमाने पर उत्पादन।
- मशीनों का उपयोग।
- निश्चित कार्य समय।
- श्रम विभाजन।
- उत्पादन लागत में कमी।
Part 1 का सार
इस भाग में हमने औद्योगिक क्रांति, इंग्लैंड में इसके प्रारम्भ होने के कारण, कृषि क्रांति, घेराबंदी आंदोलन, वस्त्र उद्योग, प्रमुख आविष्कार, जेम्स वाट के भाप इंजन तथा कारखाना प्रणाली का अध्ययन किया। अगले भाग में परिवहन क्रांति, लौह एवं कोयला उद्योग, औद्योगिक नगरों का विकास, श्रमिक वर्ग तथा औद्योगिक समाज का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
औद्योगिक क्रांति : ब्रिटेन में, 1780 के दशक और 1850 के दशक के बीच उद्योग और अर्थ व्यवस्था का जो रूपांतरण हुआ उसे प्रथम औद्योगिक क्रांति के नाम से जाना जाता है |
औद्योगिक क्रांति के सकारात्मक परिणाम :
(i) नई मशीनों और तकनीकों का विकास हुआ |
(ii) हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों की तुलना में भारी पैमाने पर माल के उत्पादन को संभव बनाया |
(iii) भाप इंजन के अविष्कार से ब्रिटेन के उद्योग में एक नयी क्रांति आ गयी और जहाजों और रेलगाड़ियों द्वारा परिवहन की गति अधिक तेज हो गई |
(iv) औद्योगीकरण की वजह से लोग समृद्ध होने लगे और उनके जीवनशैली में काफी परिवर्तन आया |
औद्योगिक क्रांति शब्द का प्रयोग :
औद्योगिक क्रांति शब्द का प्रयोग यूरोपीय विद्वानों जैसे फ्रांस में जर्जिस मिशले (Georges Michelet) और जर्मनी में फ्राइड्रिक एंजेल्स(Friedrich Engels) द्वारा किया गया | अंग्रेजी में इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम दार्शनिक एवं अर्थशास्त्री ऑरनॉल्ड टॉयनबी (Arnold Toynbee,1852-83) उन परिवर्तनों का वर्णन करने के लिए किया गया जो ब्रिटेन के विकास में 1760 और 1820 के बीच हुए थे |
- सबसे पहला औद्योगिक क्रांति ब्रिटेन में हुआ |
कृषि क्रांति : अठारहवी शताब्दी में इंग्लैंड एक बड़े आर्थिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा था, जिसे बाद में कृषि-क्रांति कहा गया |
कृषि-क्रांति के प्रमुख कारण :
(i) ब्रिटेन में आये औद्योगिक क्रांति के कारण नए कल पुर्जो का बाढ़ सी आ गई जिसका फायदा कृषि क्षेत्र को भी मिला |
(ii) लोगों के नए विकल्प मिले और वस्तुओं के बिक्री के लिए बाजार का विस्तार हुआ |
(iii) बड़े जमींदारों ने अपनी ही सम्पतियों के आस-पास छोटे-छोटे खेत खरीद लिए और गाँव के सार्वजानिक जमीनों को घेर लिया |
(iv) भू-सम्पदाएँ बढ़ने से खाध्य उत्पादन में भारी वृद्धि हुई |
18 वीं शताब्दी में लंदन वित्त और व्यापार का केंद्र बना :
अठारहवीं शताब्दी से, यूरोप के बहुत-से शहर क्षेत्रफल और आबादी दोनों ही दृष्टियों से बढ़ने लगे थे। जिसमें लंदन सबसे बड़ा शहर था और i बड़े-बड़े शहर इसके आस-पास ही थे | लंदन यूरोप में ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में भी एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर लिया था | अठारहवीं शताब्दी तक आते-आते भूमंडलीय व्यापार का केंद्र, इटली तथा फ़्रांस के भूमध्यसागरीय पत्तनों (बंदरगाह) से हटकर, हॉलैंड और ब्रिटेन के अटलांटिक पत्तनों पर आ गया था। इसके बाद तो लंदन ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए ऋण प्राप्ति के प्रधान स्रोत के रुप में ऐम्सटर्डम का स्थान ले लिया। साथ ही, लंदन, इंग्लैंड, अफ्रीका और वेस्टइंडीज के बीच स्थापित त्रिकोणीय व्यापार का केंद्र भी बन गया। अमरीका और एशिया में व्यापार करने वाली कंपनियों के कार्यालय भी लंदन में थे।
ब्रिटेन के तीन हिस्से और उसकी विशेषताएँ :
इंग्लैंड, वेल्स और स्कॉटलैंड ये ब्रिटेन के तीन हिस्से थे जिस पर एक ही राजतन्त्र अर्थात सम्राट का शासन था |
विशेषताएँ :
(i) सम्पूर्ण राज्य में एक ही कानून व्यवस्था थी |
(ii) एक ही सिक्का अर्थात मुद्रा प्रणाली थी |
(iii) इन तीनों राज्यों के लिए एक बाजार व्यवस्था थी जिससे व्यापार करने वालों को एक राज्य से दुसरे राज्य में व्यापार करने पर अलग से कर नहीं चुकाना पड़ता था |
पिटवा लोहे का विकास : द्वितीय डर्बी (1711-68) ने ढलवा लोहे से पिटवा लोहे का विकास किया जो कम भंगुर था | हेनरी कोर्ट (1750-1823) ने आलोडन भटठी और बेलन मिल का अविष्कार किया | बेलन मिल एक संयंत्र है जिनसे पिघले लोहे में से अशुद्धि को दूर किया जा सकता था |
औद्योगिक क्रांति (औद्योगीकरण) का बुरे प्रभाव :
(i) औद्योगिक क्रांति के प्रभाव बच्चों व महिलाओं पर अधिकतर नकारात्मक रहे |
(ii) शैशव अवस्था में बच्चों की मौत,गरीब मजदुर खासकर बच्चों की दुर्दशा, पर्यावरण का क्षय और हैजा तथा तपेदिक की बीमारियाँ औद्योगीकरण की देन थी |
(iii) घिनौनी एवं गन्दी बस्तियों में रहना, कम मजदूरी में अधिक घंटे काम करना |
(iv) परिवारों में विखराव हुआ तथा रोजगार के तलाश में गांवों से शहरों में लोगों का पलायन हुआ जिससे शहरों का रूप विकृत हो गया |
(v) ब्रिटेनवासियों को पुराने मौसम में बदलाव के साथ-साथ बहुत से पर्यावरणीय संकटों का सामना करना पड़ा |
बच्चों और महिलाओ के दशा सुधारने के लिए ब्रिटेन में कानून :
बच्चों और महिलाओं की दशा सुधारने के लिए ब्रिटेन में कई कानून बनाये गए जो निम्नलिखित थे |
(i) 1833, 1842 खान और कोयला खान अधिनयम बनाया गया जिसके तहत 10 वर्ष के कम आयु बच्चों और स्त्रियों से खानों में काम लेने पर प्रतिबन्ध था |
(ii) 1847 का अधिनियम जिसे फील्डर्स फैक्ट्री अधिनियम कहा जाता है | इसके तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों व स्त्रियों से 10 घंटे से अधिक काम लेने पर पाबन्दी थी |
औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप समाज में दो वर्गों का उदय :
(i) मालिक
(ii) मजदुर वर्ग