Chapter Chapter 4. औद्योगीकरण का युग Class 10 History CBSE notes in hindi भारत में औद्योगीकरण का विकास - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 10 English Medium History All Chapters:
Chapter 4. औद्योगीकरण का युग
3. भारत में औद्योगीकरण का विकास
Chapter 4. औद्योगीकरण का युग
19वीं शताब्दी में औद्योगीकरण का प्रभाव भारत पर भी दिखाई देने लगा। ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय उद्योगों में अनेक परिवर्तन हुए। एक ओर पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योग प्रभावित हुए, वहीं दूसरी ओर आधुनिक कपड़ा, जूट और इस्पात उद्योगों का विकास प्रारम्भ हुआ।
Part 2 – भारत में औद्योगीकरण का विकास
इस भाग में भारत में आधुनिक उद्योगों की शुरुआत, प्रमुख उद्योगों, भारतीय उद्यमियों तथा प्रथम विश्व युद्ध के प्रभाव का अध्ययन करेंगे।
भारत में औद्योगीकरण की शुरुआत
ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में आधुनिक उद्योगों का विकास प्रारम्भ हुआ।
- भारत में सबसे पहले आधुनिक सूती वस्त्र उद्योग विकसित हुआ।
- अधिकांश प्रारम्भिक उद्योग बंदरगाह नगरों में स्थापित किए गए।
- रेलमार्ग के विकास से उद्योगों को गति मिली।
- ब्रिटिश शासन ने व्यापारिक आवश्यकताओं के अनुसार उद्योगों को बढ़ावा दिया।
- भारतीय उद्योग धीरे-धीरे संगठित रूप लेने लगे।
सूती वस्त्र उद्योग
भारत का सबसे प्रमुख प्रारम्भिक आधुनिक उद्योग सूती वस्त्र उद्योग था।
- 1854 में मुंबई में पहली सूती कपड़ा मिल स्थापित हुई।
- मुंबई सूती वस्त्र उद्योग का प्रमुख केंद्र बन गया।
- कपास की उपलब्धता से उद्योग को लाभ मिला।
- भारतीय वस्त्रों की देश-विदेश में मांग बढ़ी।
- इस उद्योग से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला।
जूट उद्योग
जूट उद्योग का विकास मुख्य रूप से बंगाल क्षेत्र में हुआ।
- 1855 में पहली जूट मिल रिषड़ा (बंगाल) में स्थापित हुई।
- कच्चा जूट बंगाल में आसानी से उपलब्ध था।
- जूट के बोरे, रस्सियाँ और पैकिंग सामग्री बनाई जाती थी।
- इस उद्योग में बड़ी संख्या में श्रमिक कार्य करते थे।
- जूट उद्योग भारत के प्रमुख निर्यात उद्योगों में शामिल हुआ।
भारतीय उद्यमियों की भूमिका
भारतीय उद्यमियों ने आधुनिक उद्योगों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- भारतीय व्यापारियों ने उद्योगों में निवेश करना प्रारम्भ किया।
- उन्होंने कपड़ा, जूट और अन्य उद्योग स्थापित किए।
- भारतीय उद्योगपतियों ने विदेशी प्रतिस्पर्धा का सामना किया।
- उन्होंने स्वदेशी उद्योगों को प्रोत्साहन दिया।
- औद्योगिक विकास में निजी पूँजी का योगदान बढ़ा।
जमशेदजी टाटा का योगदान
जमशेदजी टाटा को भारत के प्रमुख उद्योगपतियों में गिना जाता है।
- उन्होंने आधुनिक इस्पात उद्योग की नींव रखी।
- 1907 में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) की स्थापना हुई।
- भारतीय औद्योगिक विकास को नई दिशा मिली।
- देश में भारी उद्योगों का विकास प्रारम्भ हुआ।
- टाटा समूह भारतीय उद्योगों का प्रमुख आधार बना।
द्वारकानाथ टैगोर का योगदान
द्वारकानाथ टैगोर प्रारम्भिक भारतीय उद्योगपतियों में से एक थे।
- उन्होंने व्यापार और उद्योग में निवेश किया।
- जहाजरानी तथा कोयला उद्योग को बढ़ावा दिया।
- भारतीय व्यापारियों को उद्योग स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।
- आधुनिक व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार किया।
प्रथम विश्व युद्ध और भारतीय उद्योग
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय उद्योगों को विकास का अवसर मिला।
- युद्ध के कारण ब्रिटेन से तैयार वस्तुओं का आयात घट गया।
- भारतीय कारखानों की मांग बढ़ गई।
- उद्योगों में उत्पादन तेजी से बढ़ा।
- नई मिलों और कारखानों की स्थापना हुई।
- भारतीय उद्योगपतियों को व्यापार का विस्तार करने का अवसर मिला।
श्रमिकों की स्थिति
भारतीय उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
- कार्य के घंटे लंबे होते थे।
- मजदूरी अपेक्षाकृत कम मिलती थी।
- कार्यस्थलों पर सुविधाओं का अभाव था।
- महिलाओं और बच्चों से भी कार्य कराया जाता था।
- धीरे-धीरे श्रमिक संगठनों का विकास होने लगा।
भारत में औद्योगीकरण का प्रभाव
औद्योगीकरण ने भारत की अर्थव्यवस्था और समाज में अनेक परिवर्तन किए।
- आधुनिक उद्योगों का विकास हुआ।
- रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए।
- शहरीकरण में वृद्धि हुई।
- व्यापार और परिवहन का विस्तार हुआ।
- भारतीय उद्योगपतियों का महत्व बढ़ा।
- स्वदेशी उद्योगों को प्रोत्साहन मिला।