Chapter Chapter 4. वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था Class 10 Economics CBSE notes in hindi विभिन्न देशों में उत्पादन, उदारीकरण एवं विश्व व्यापार संगठन (WTO) - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 10 English Medium Economics All Chapters:
Chapter 4. वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था
3. विभिन्न देशों में उत्पादन, उदारीकरण एवं विश्व व्यापार संगठन (WTO)
अध्याय 4. वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था
वैश्वीकरण के कारण उत्पादन की प्रक्रिया अब केवल एक देश तक सीमित नहीं रही है। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ विभिन्न देशों में उत्पादन करती हैं और आधुनिक तकनीक, पूँजी तथा प्रबंधन का उपयोग करके वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करती हैं। भारत में 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद उदारीकरण की नीति अपनाई गई, जिससे विदेशी व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिला।
भाग 2 – विभिन्न देशों में उत्पादन, उदारीकरण एवं विश्व व्यापार संगठन (WTO)
इस भाग में विभिन्न देशों में उत्पादन, विदेशी निवेश, उदारीकरण, व्यापार अवरोध तथा विश्व व्यापार संगठन (WTO) का अध्ययन किया गया है।
विभिन्न देशों में उत्पादन
आज अनेक वस्तुओं का उत्पादन विभिन्न देशों में मिलकर किया जाता है, जिससे लागत कम होती है और उत्पादन क्षमता बढ़ती है।
(i) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन के विभिन्न चरण अलग-अलग देशों में करती हैं।
(ii) प्रत्येक देश अपनी विशेष क्षमता के अनुसार उत्पादन में भाग लेता है।
(iii) कच्चा माल, मशीनें तथा तैयार वस्तुएँ विभिन्न देशों के बीच भेजी जाती हैं।
(iv) आधुनिक परिवहन एवं संचार ने इस प्रक्रिया को आसान बनाया है।
(v) इससे विश्व की अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे से अधिक जुड़ गई हैं।
विदेशी निवेश (Foreign Investment)
जब किसी देश की कंपनी दूसरे देश में उद्योग, व्यापार या अन्य आर्थिक गतिविधियों में पूँजी निवेश करती है, तो उसे विदेशी निवेश कहते हैं।
(i) विदेशी निवेश से नए उद्योग स्थापित होते हैं।
(ii) आधुनिक तकनीक का विकास होता है।
(iii) रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होते हैं।
(iv) उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है।
(v) आर्थिक विकास को गति मिलती है।
उदारीकरण (Liberalisation)
उदारीकरण का अर्थ व्यापार एवं निवेश पर लगाए गए अनावश्यक सरकारी प्रतिबंधों को कम करना या समाप्त करना है।
(i) भारत में 1991 में उदारीकरण की नीति लागू की गई।
(ii) विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश की अनुमति दी गई।
(iii) आयात-निर्यात संबंधी अनेक प्रतिबंध हटाए गए।
(iv) उद्योगों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी।
(v) उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प प्राप्त हुए।
व्यापार अवरोध (Trade Barrier)
व्यापार अवरोध वे प्रतिबंध हैं जो सरकार आयात एवं निर्यात पर लगाती है।
(i) आयात शुल्क (Import Duty) व्यापार अवरोध का प्रमुख उदाहरण है।
(ii) इनका उद्देश्य घरेलू उद्योगों की सुरक्षा करना होता है।
(iii) व्यापार अवरोध विदेशी प्रतिस्पर्धा को सीमित करते हैं।
(iv) उदारीकरण के बाद भारत में अनेक व्यापार अवरोध कम किए गए।
(v) अत्यधिक व्यापार अवरोध अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं।
विश्व व्यापार संगठन (WTO)
विश्व व्यापार संगठन एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो सदस्य देशों के बीच मुक्त एवं निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देती है।
(i) WTO की स्थापना 1995 में हुई।
(ii) यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नियम निर्धारित करता है।
(iii) सदस्य देशों के बीच व्यापारिक विवादों का समाधान करता है।
(iv) व्यापार पर अनावश्यक प्रतिबंधों को कम करने का प्रयास करता है।
(v) विश्व के अधिकांश देश इसके सदस्य हैं।
WTO की भूमिका
विश्व व्यापार संगठन वैश्विक व्यापार को व्यवस्थित एवं संतुलित बनाने का कार्य करता है।
(i) मुक्त एवं निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देता है।
(ii) सदस्य देशों के लिए व्यापार संबंधी नियम बनाता है।
(iii) व्यापारिक विवादों का समाधान करता है।
(iv) अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सहयोग को बढ़ाता है।
(v) वैश्विक बाजारों के विस्तार में सहायता करता है।
उदारीकरण का प्रभाव
उदारीकरण के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए।
(i) विदेशी निवेश में वृद्धि हुई।
(ii) उद्योगों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी।
(iii) उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद मिलने लगे।
(iv) आयात एवं निर्यात में वृद्धि हुई।
(v) भारतीय उद्योग वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बने।
CBSE परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
(i) उत्पादन की प्रक्रिया आज अनेक देशों में फैली हुई है।
(ii) विदेशी निवेश से उद्योग, रोजगार एवं तकनीक का विकास होता है।
(iii) भारत में उदारीकरण की नीति 1991 में लागू की गई।
(iv) व्यापार अवरोधों का उद्देश्य घरेलू उद्योगों की सुरक्षा करना है।
(v) WTO मुक्त एवं निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देता है।