Chapter Chapter 3. मुद्रा और साख Class 10 Economics CBSE notes in hindi बैंक और साख (Credit) - CBSE Study
कक्षा 10 Economics के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 3. मुद्रा और साख को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक बैंक और साख (Credit) को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Economics में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।
CBSE NOTES:
Class 10 English Medium Economics All Chapters:
Chapter 3. मुद्रा और साख
3. बैंक और साख (Credit)
अध्याय 3. मुद्रा और साख
आधुनिक अर्थव्यवस्था में बैंक बचत को सुरक्षित रखने तथा लोगों और व्यवसायों को ऋण उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। साख (Credit) उत्पादन, व्यापार तथा रोजगार को बढ़ावा देती है। हालांकि, साख का लाभ तभी मिलता है जब उसका उपयोग सही उद्देश्य के लिए किया जाए और ऋण की शर्तें उचित हों।
भाग 2 – बैंक और साख (Credit)
इस भाग में बैंकों के कार्य, बैंक जमा, ऋण, साख तथा ऋण की शर्तों का अध्ययन किया गया है।
बैंकों की भूमिका
बैंक ऐसी वित्तीय संस्थाएँ हैं जो लोगों से जमा स्वीकार करती हैं तथा विभिन्न उद्देश्यों के लिए ऋण उपलब्ध कराती हैं।
(i) बैंक जनता से धन जमा करते हैं।
(ii) बैंक किसानों, व्यापारियों एवं उद्योगों को ऋण प्रदान करते हैं।
(iii) बैंक बचत की आदत को प्रोत्साहित करते हैं।
(iv) बैंक धन के सुरक्षित लेन-देन की सुविधा उपलब्ध कराते हैं।
(v) बैंक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
बैंक जमा
लोग अपनी अतिरिक्त आय को सुरक्षित रखने तथा उस पर ब्याज प्राप्त करने के लिए बैंक में जमा करते हैं।
(i) बैंक जमा सुरक्षित होती है।
(ii) जमा राशि पर बैंक ब्याज देता है।
(iii) माँग जमा को आवश्यकता पड़ने पर निकाला जा सकता है।
(iv) बैंक जमा से नकदरहित लेन-देन आसान होता है।
(v) जमा राशि का उपयोग बैंक ऋण देने के लिए करते हैं।
बैंक ऋण कैसे प्रदान करते हैं?
बैंक जमा की गई राशि का एक भाग सुरक्षित रखते हैं तथा शेष धन को ऋण के रूप में उपलब्ध कराते हैं।
(i) बैंक जमा का केवल एक छोटा भाग नकद के रूप में रखते हैं।
(ii) शेष राशि विभिन्न व्यक्तियों एवं संस्थाओं को ऋण के रूप में दी जाती है।
(iii) ऋण पर बैंक ब्याज प्राप्त करते हैं।
(iv) ऋण से व्यापार एवं उत्पादन को बढ़ावा मिलता है।
(v) बैंक की आय का प्रमुख स्रोत ऋण पर मिलने वाला ब्याज है।
साख (Credit) का अर्थ
साख वह व्यवस्था है जिसमें ऋणदाता किसी व्यक्ति या संस्था को धन या वस्तु इस शर्त पर देता है कि उसे भविष्य में ब्याज सहित वापस किया जाएगा।
(i) साख आर्थिक गतिविधियों को गति देती है।
(ii) इससे व्यापार और उद्योग का विस्तार होता है।
(iii) किसान खेती के लिए ऋण प्राप्त करते हैं।
(iv) उद्यमी नए व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
(v) साख का सही उपयोग आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।
ऋण की शर्तें
ऋण देते समय बैंक या ऋणदाता कुछ शर्तें निर्धारित करते हैं, जिन्हें ऋण की शर्तें कहा जाता है।
(i) ब्याज दर।
(ii) ऋण चुकाने की अवधि।
(iii) गिरवी या संपार्श्विक (Collateral)।
(iv) भुगतान की विधि।
(v) आवश्यक दस्तावेज एवं अन्य शर्तें।
संपार्श्विक (Collateral)
संपार्श्विक वह संपत्ति होती है जिसे ऋण के बदले सुरक्षा के रूप में गिरवी रखा जाता है।
(i) इससे ऋणदाता का जोखिम कम होता है।
(ii) भूमि, भवन, आभूषण एवं सावधि जमा (FD) संपार्श्विक हो सकते हैं।
(iii) ऋण न चुकाने पर ऋणदाता संपार्श्विक पर अधिकार कर सकता है।
(iv) बड़े ऋणों में प्रायः संपार्श्विक आवश्यक होता है।
(v) कुछ छोटे ऋण बिना संपार्श्विक के भी दिए जाते हैं।
साख का महत्व
साख का उचित उपयोग व्यक्ति तथा देश दोनों के आर्थिक विकास में सहायक होता है।
(i) किसानों को खेती के लिए धन उपलब्ध होता है।
(ii) उद्योगों का विस्तार संभव होता है।
(iii) नए रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं।
(iv) व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा मिलता है।
(v) राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है।
जब साख समस्या बन जाती है
यदि ऋण का सही उपयोग न हो या आय का स्रोत प्रभावित हो जाए, तो साख आर्थिक बोझ बन सकती है।
(i) फसल खराब होने पर किसान ऋण नहीं चुका पाते।
(ii) व्यापार में घाटा होने पर आर्थिक कठिनाई बढ़ जाती है।
(iii) अधिक ब्याज दर ऋण का बोझ बढ़ाती है।
(iv) ऋण न चुकाने पर संपत्ति का नुकसान हो सकता है।
(v) इसलिए सोच-समझकर ऋण लेना चाहिए।
CBSE परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
(i) बैंक जमा स्वीकार करते हैं तथा ऋण प्रदान करते हैं।
(ii) साख आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है।
(iii) संपार्श्विक ऋण के बदले दी जाने वाली सुरक्षा है।
(iv) ऋण की प्रमुख शर्तों में ब्याज दर, अवधि एवं संपार्श्विक शामिल हैं।
(v) साख का सही उपयोग आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।