Chapter Chapter 2. भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक Class 10 Economics CBSE notes in hindi रोजगार, प्रच्छन्न बेरोज़गारी एवं क्षेत्रकों का विकास - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 10 English Medium Economics All Chapters:
Chapter 2. भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक
3. रोजगार, प्रच्छन्न बेरोज़गारी एवं क्षेत्रकों का विकास
अध्याय 2. भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक
देश का आर्थिक विकास तभी संभव है जब सभी क्षेत्रकों में पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध हों और संसाधनों का उचित उपयोग किया जाए। भारत में रोजगार का बड़ा भाग अभी भी कृषि क्षेत्र में है, जहाँ प्रच्छन्न बेरोज़गारी जैसी समस्याएँ देखने को मिलती हैं। इसलिए सभी क्षेत्रकों का संतुलित विकास आवश्यक है।
भाग 3 – रोजगार, प्रच्छन्न बेरोज़गारी एवं क्षेत्रकों का विकास
इस भाग में रोजगार सृजन, प्रच्छन्न बेरोज़गारी, रोजगार बढ़ाने के उपाय तथा विभिन्न क्षेत्रकों के योगदान का अध्ययन किया गया है।
रोजगार सृजन
रोजगार सृजन का अर्थ लोगों के लिए नए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
(i) रोजगार से लोगों की आय में वृद्धि होती है।
(ii) उद्योगों की स्थापना से नए रोजगार उत्पन्न होते हैं।
(iii) सेवा क्षेत्र के विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
(iv) सरकारी योजनाएँ रोजगार उपलब्ध कराने में सहायता करती हैं।
(v) रोजगार आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है।
प्रच्छन्न बेरोज़गारी
जब किसी कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग लगे हों, लेकिन उनके हट जाने पर भी उत्पादन में कोई कमी न आए, तो उसे प्रच्छन्न बेरोज़गारी कहते हैं।
(i) यह मुख्यतः कृषि क्षेत्र में पाई जाती है।
(ii) अतिरिक्त श्रमिक उत्पादन में विशेष योगदान नहीं देते।
(iii) कुछ श्रमिकों के हटने पर भी उत्पादन समान रहता है।
(iv) यह श्रम शक्ति के अपूर्ण उपयोग को दर्शाती है।
(v) इससे उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
अधिक रोजगार की आवश्यकता
भारत जैसे विकासशील देश में बढ़ती जनसंख्या के कारण अधिक रोजगार के अवसर उत्पन्न करना आवश्यक है।
(i) बढ़ती जनसंख्या के साथ रोजगार की माँग भी बढ़ती है।
(ii) ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि रोजगार को बढ़ावा देना आवश्यक है।
(iii) कौशल विकास से रोजगार की संभावनाएँ बढ़ती हैं।
(iv) श्रम-प्रधान उद्योग अधिक रोजगार प्रदान करते हैं।
(v) सभी क्षेत्रकों का संतुलित विकास बेरोज़गारी कम करता है।
रोजगार बढ़ाने के उपाय
सरकार तथा निजी क्षेत्र मिलकर रोजगार के अवसर बढ़ा सकते हैं।
(i) लघु एवं कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देना।
(ii) सिंचाई एवं कृषि सुविधाओं का विस्तार करना।
(iii) सड़क, परिवहन एवं संचार सुविधाओं का विकास करना।
(iv) स्वरोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना।
(v) शिक्षा एवं कौशल विकास में निवेश बढ़ाना।
विभिन्न क्षेत्रकों का योगदान
भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रक राष्ट्रीय आय एवं रोजगार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
(i) प्राथमिक क्षेत्रक बड़ी जनसंख्या को आजीविका प्रदान करता है।
(ii) द्वितीयक क्षेत्रक औद्योगिक विकास को गति देता है।
(iii) तृतीयक क्षेत्रक का GDP में सबसे अधिक योगदान है।
(iv) सभी क्षेत्रक मिलकर आर्थिक विकास को मजबूत बनाते हैं।
(v) संतुलित विकास से देश की अर्थव्यवस्था अधिक सुदृढ़ होती है।
क्षेत्रकों के संतुलित विकास का महत्व
देश के समग्र विकास के लिए सभी क्षेत्रकों का संतुलित विकास आवश्यक है।
(i) राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है।
(ii) रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
(iii) गरीबी एवं क्षेत्रीय असमानता कम होती है।
(iv) लोगों के जीवन स्तर में सुधार होता है।
(v) अर्थव्यवस्था अधिक मजबूत एवं स्थिर बनती है।
CBSE परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
(i) प्रच्छन्न बेरोज़गारी मुख्यतः कृषि क्षेत्र में पाई जाती है।
(ii) भारत के GDP में तृतीयक क्षेत्रक का योगदान सबसे अधिक है।
(iii) रोजगार सृजन गरीबी कम करने का महत्वपूर्ण साधन है।
(iv) सभी क्षेत्रकों का संतुलित विकास आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक है।
(v) आधारभूत संरचना, उद्योग तथा कौशल विकास में निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।